जितेन्द्र समाधिया की दमदार पैरवी, डकैती के गंभीर आरोपों से शिवम राजपूत दोषमुक्त

विशेष न्यायालय का बड़ा फैसला—अभियोजन के साक्ष्य नहीं कर सके आरोप साबित, धारा 395, 397 और 11/13 एम.पी.डी.पी. के आरोपों से मिली राहत
शिवपुरी। डकैती के गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में शिवपुरी के विशेष न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त शुभम् उर्फ शिवम राजपूत को दोषमुक्त कर दिया। मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र समाधिया ने बचाव पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए अभियोजन के साक्ष्यों और गवाहों की गहन जिरह की तथा अंतिम बहस में न्याय दृष्टांत प्रस्तुत किए।
विशेष न्यायाधीश (म.प्र. डकैती एवं व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र) अरुण कुमार सिंह की अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को प्रमाणित करने में सफल नहीं रहा।
तीन लाख की डकैती का था आरोप, अदालत में नहीं टिक सकी अभियोजन की कहानी
प्रकरण के अनुसार थाना कोलारस क्षेत्र में कोलारस गेट के पास शफी अहमद की मोटरसाइकिल में टक्कर मारकर उनके साथ मारपीट एवं चोट पहुंचाने तथा उनके पास से करीब तीन लाख रुपये, चेकबुक, बिलबुक और मंडी कट्टा रसीद सहित अन्य सामग्री लूटने का आरोप लगाया गया था।
मामले में शिवम राजपूत सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। दो सह-अभियुक्त आकाश बैरागी एवं संदीप साहू के फरार घोषित होने की जानकारी भी प्रकरण में सामने आई।
जिरह में परखे गए गवाह, अंतिम बहस में रखे न्याय दृष्टांत
मामले की सुनवाई के दौरान विवेचक एवं तत्कालीन थाना प्रभारी कोलारस आलोक सिंह भदौरिया सहित अन्य साक्षियों के बयान न्यायालय में दर्ज किए गए। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र समाधिया ने गवाहों से जिरह करते हुए अभियोजन के साक्ष्यों की विश्वसनीयता और आरोपों को प्रमाणित करने वाली कड़ियों पर प्रभावी तर्क रखे।
अंतिम बहस के दौरान बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष प्रासंगिक न्याय दृष्टांत भी प्रस्तुत किए। न्यायालय ने पूरे प्रकरण में प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया।
फैसला साफ—अभियोजन आरोप साबित करने में रहा असफल
न्यायालय ने अपने निर्णय में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए अपराधों को प्रमाणित नहीं माना। इसके बाद शिवम राजपूत को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 395 सहपठित धारा 397 तथा धारा 11/13 एम.पी.डी.पी. के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।
गंभीर आरोपों के बीच आया महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला
डकैती जैसे गंभीर आरोपों वाले इस मामले में आया फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषमुक्त किया है। मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र समाधिया की पैरवी और प्रभावी जिरह बचाव पक्ष की ओर से प्रमुख रूप से सामने रही।
अदालत का संदेश स्पष्ट है—आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, न्यायालय में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करना ही होगा।
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