सोशल मीडिया पर अफवाहों की दुकान बंद, अब हर क्लिक की होगी कीमत

कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सोसल मीडिया पर मनमानी पर लगाई लगाम अब भ्रामकता और मनमानी नही चलेगी।
शिवपुरी में सोशल मीडिया के जरिए अफवाह, भड़काऊ संदेश और धार्मिक, जातिगत या साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने वाली सामग्री फैलाने वालों के लिए प्रशासन ने अब साफ चेतावनी दे दी है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिया है। संदेश सीधा है—सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का मंच है, अफवाह और उन्माद फैलाने का लाइसेंस नहीं।
आज के दौर में एक अफवाह को लोगों तक पहुंचने में उतना समय नहीं लगता, जितना किसी अधिकारी को उसका खंडन करने में लगता है। एक फोटो, वीडियो या ऑडियो को संदर्भ से काटकर पेश किया और देखते ही देखते वह सैकड़ों मोबाइल तक पहुंच जाता है। यही कारण है कि प्रशासन ने केवल आपत्तिजनक सामग्री बनाने वालों को ही नहीं, बल्कि उसे लाइक, शेयर और फॉरवर्ड करने वालों को भी चेतावनी के दायरे में रखा है।
सबसे बड़ा सवाल उन लोगों के लिए है जो हर भड़काऊ संदेश को बिना जांचे आगे बढ़ाते हुए बाद में कहते हैं—“मैंने तो सिर्फ फॉरवर्ड किया था।” अब यह सोच भारी पड़ सकती है। यदि सामग्री धार्मिक, साम्प्रदायिक या जातिगत भावनाएं भड़काने वाली है, घृणा या वैमनस्य पैदा कर सकती है अथवा हिंसा और गैरकानूनी गतिविधि के लिए उकसाती है, तो उसे आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता और प्रभाव पर विचार करना जरूरी है।
ग्रुप एडमिन के लिए भी आदेश में जिम्मेदारी तय की गई है। ग्रुप आपका है तो उसमें क्या चल रहा है, इसकी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। एडमिन की कुर्सी सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है। भड़काऊ और आपत्तिजनक सामग्री को ग्रुप में फैलने से रोकना जरूरी होगा।
प्रशासन ने ऐसे संदेशों पर भी रोक लगाई है जिनके जरिए किसी व्यक्ति, संगठन या समुदाय को एक जगह एकत्र होकर गैरकानूनी गतिविधि के लिए उकसाया जाता हो या जिनसे लोकशांति और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पैदा हो। आखिर सोशल मीडिया की स्क्रीन पर शुरू हुआ विवाद कई बार सड़क पर तनाव में बदल सकता है। प्रशासन इसी कड़ी को शुरुआत में ही तोड़ना चाहता है।
यह आदेश नागरिकों के लिए सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला संदेश भी है। हर वायरल चीज सच नहीं होती और हर फॉरवर्ड करने लायक नहीं होती। सोशल मीडिया पर अंगुली जितनी तेजी से चलती है, उतनी ही तेजी से विवाद भी फैल सकता है।
उल्लंघन की स्थिति में आईटी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसलिए अब सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के सामने सरल नियम है—पोस्ट करने से पहले सोचें, शेयर करने से पहले जांचें और फॉरवर्ड करने से पहले रुकें।
क्योंकि अफवाह फैलाने वाले को शायद यह सिर्फ एक मैसेज लगे, लेकिन प्रशासन के लिए वही मैसेज कानून-व्यवस्था का सवाल बन सकता है। सोशल मीडिया पर आजादी जरूर है, लेकिन उस आजादी के साथ जिम्मेदारी भी है—और शिवपुरी प्रशासन ने अब उस जिम्मेदारी की सीमा स्पष्ट कर दी है।
Live Cricket Info








