ग्वालियर DEO हरिओम् चतुर्वेदी पर गिरी गाज: कोर्ट के आदेशों से खिलवाड़ पड़ा भारी, आयुक्त ने किया तत्काल निलंबित!”

“कलेक्टर शिवपुरी संज्ञान ले – शिवपुरी शिक्षा बिभाग के भी ग्वालियर की तर्ज पर कई अबमानना के मामले कोर्ट मे बिचाराधीन है!
भोपाल/ लोक शिक्षण विभाग में एक बार फिर अफसरशाही की लापरवाही पर बड़ा हथौड़ा चला है। हाईकोर्ट के आदेशों को हल्के में लेना और विभागीय निर्देशों को ठेंगा दिखाना ग्वालियर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी को भारी पड़ गया। आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मामला हाईकोर्ट में चल रहे एक पुराने न्यायालयीन प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें सेवानिवृत्त व्याख्याता अनंत पुढीर के मामले में 5 जुलाई 2023 को फैसला आया था। लेकिन आरोप है कि प्रभारी DEO हरिओम चतुर्वेदी ने पूरे दो साल बाद रिट अपील दायर करने का प्रस्ताव भेजा और फिर विभागीय अनुमति मिलने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विभागीय निर्देशों के मुताबिक जहां रिव्यू याचिका दायर की जानी थी, वहां साहब ने शासकीय अधिवक्ता से केवल “पालन का अभिमत” भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की। इसी लापरवाही के चलते न्यायालयीन अवमानना प्रकरण भी खड़ा हो गया।
आयुक्त ने अपने आदेश में साफ कहा है कि हरिओम चतुर्वेदी ने शासकीय कार्य के प्रति गंभीर उदासीनता और लापरवाही बरती है, जो म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का खुला उल्लंघन है। यही नहीं, उनके कृत्य को “गंभीर कदाचरण” की श्रेणी में माना गया है।
आदेश के अनुसार हरिओम चतुर्वेदी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय डाइट ग्वालियर निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कोर्ट के आदेशों और विभागीय निर्देशों की अनदेखी करने वाले अफसरों पर कार्रवाई इतनी देर से क्यों होती है? क्या शिक्षा विभाग में जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी खुद को नियमों से ऊपर समझने लगे हैं?
फिलहाल ग्वालियर शिक्षा विभाग में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा हुआ है और अफसरों के बीच यह चर्चा तेज है कि “कोर्ट के आदेशों से खिलवाड़ अब महंगा पड़ सकता है।”
Live Cricket Info








