शिवपुरी में D.Ed.-B.Ed. जांच की रफ्तार सुस्त, डेढ़ महीने बाद भी संकुलों से रिकॉर्ड नहीं!

7 सितंबर को निकला था जांच का आदेश, अब तक दस्तावेज और पालन प्रतिवेदन का इंतजार; कार्रवाई की जगह फिर पत्र भेजने की तैयारी
शिवपुरी। D.Ed.-B.Ed. की अंकसूचियों के सत्यापन का मामला शिवपुरी में आगे बढ़ने के बजाय संकुलों के दस्तावेजों पर अटका नजर आ रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 7 सितंबर को जांच के निर्देश जारी किए थे। डेढ़ महीने से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी विभागीय सूत्रों के मुताबिक, संबंधित संकुलों से न तो जरूरी दस्तावेज मिले हैं और न ही पालन प्रतिवेदन। अब विभाग दोबारा पत्र भेजने की तैयारी में है। **जांच शुरू कराने के लिए आदेश जारी हुआ था, लेकिन अब तक उसकी प्रगति का ठोस ब्योरा सामने नहीं आया।

जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव के हस्ताक्षर से जारी पत्र क्रमांक शिकायत-1/2026/6071 में फर्जी शैक्षणिक अर्हता और अंकसूचियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेज जांचने तथा नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। लोक शिक्षण संचालनालय के 13 अगस्त 2026 के पत्र का हवाला देते हुए समय-सीमा में पालन प्रतिवेदन मांगा गया था। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया, लेकिन अब तक जांच किस स्तर तक पहुंची, यह स्पष्ट नहीं है।
जिन संकुलों को दस्तावेज जुटाकर रिपोर्ट देनी थी, वहां से जानकारी नहीं आने की स्थिति में विभाग की अगली कार्रवाई भी सामने नहीं आई है। कितने शिक्षकों की अंकसूचियां सत्यापन के लिए भेजी गईं, कितनी रिपोर्ट प्राप्त हुईं और किन संकुलों का काम बाकी है—इनका ब्योरा सार्वजनिक नहीं है। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हुए तो देरी की वजह क्या है और संबंधित अधिकारियों से इस बारे में क्या जवाब लिया गया, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
एक आदेश के बाद डेढ़ महीने तक रिपोर्ट का इंतजार और अब फिर पत्र भेजने की तैयारी—जांच की मौजूदा तस्वीर फिलहाल यही है।यदि संकुल स्तर पर काम पूरा नहीं हुआ है तो उसे पूरा कराने की जिम्मेदारी भी विभाग की है। केवल पत्र जारी होने से जांच पूरी नहीं होती; अंकसूचियों का सत्यापन और उसकी रिपोर्ट ही बताएगी कि मामला कहां तक पहुंचा।
इस जांच में किसी शिक्षक को दस्तावेजों के सत्यापन से पहले दोषी नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन शैक्षणिक अर्हताओं की जांच का आदेश जारी होने के बाद उसकी प्रगति का हिसाब सामने आना चाहिए। दस्तावेज सही हैं तो स्थिति साफ होगी और गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुलेगा।
फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 7 सितंबर के आदेश के बाद कितने संकुलों ने रिपोर्ट दी और शेष से दस्तावेज लेने के लिए क्या कदम उठाए गए। D.Ed.-B.Ed. की अंकसूचियों की जांच अब केवल पत्राचार में उलझी न रहे; विभाग को सत्यापन की वास्तविक स्थिति और आगे की कार्रवाई का ब्योरा सामने रखना चाहिए।
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