Telegram Join our Telegram Channel for Daily Latest News Updates! Join Now ×

गधे की तस्वीर पर नर्सिंग पंजीयन, एक आवेदन ने खोल दी सत्यापन व्यवस्था की पोल

फर्जी नाम-पते और गधे की तस्वीर वाला आवेदन भी पहुंच गया प्रमाणपत्र तक, नर्सिंग पंजीयन की जांच व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल!

भोपाल। मध्यप्रदेश में नर्सिंग पंजीयन का एक मामला सोशल मीडिया पर भले ही ठहाकों का कारण बना हो, लेकिन कागजों के पीछे की कहानी इतनी हल्की नहीं है। आवेदन में आवेदक की जगह गधे की तस्वीर लगाई गई, नाम ‘डंकी’, पिता के नाम में ‘डंकी फादर’ और जाति में ‘एनिमल’ लिखा गया। इसके बावजूद आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ी और शुल्क जमा होने के बाद प्रोविजनल नर्सिंग पंजीयन प्रमाणपत्र जारी हो गया।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

मामला सामने आने के बाद कौंसिल की ओर से इसे प्रोविजनल पंजीयन बताया गया और आगे सत्यापन की प्रक्रिया का हवाला दिया गया। लेकिन यहीं वह बिंदु है जहां पूरी प्रक्रिया को कागज पर नहीं, जमीन पर परखने की जरूरत पड़ती है। जिस आवेदन में पहचान से जुड़ी जानकारियां पहली नजर में ही असामान्य थीं, वह प्रारंभिक जांच से निकलकर प्रमाणपत्र जारी होने तक कैसे पहुंच गया?

मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन कौंसिल की पंजीयन व्यवस्था में दस्तावेजों के सत्यापन और संस्थान स्तर से प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया निर्धारित है। फिर इस आवेदन में वह पड़ाव कहां था, जहां तस्वीर, नाम, शैक्षणिक दस्तावेज और आवेदक की वास्तविक पहचान का मिलान होना था? यदि प्रक्रिया में यह जांच हुई थी तो आवेदन आगे कैसे बढ़ा और यदि नहीं हुई तो जिम्मेदारी किस स्तर की बनती है—यह स्पष्ट होना चाहिए।

यह मामला केवल पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी मानकर छोड़ देना भी पर्याप्त नहीं होगा। जानबूझकर गलत जानकारी देकर सरकारी पंजीयन प्राप्त करने का प्रयास जांच में प्रमाणित होता है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का प्रश्न भी उठता है। दूसरी ओर, पंजीयन व्यवस्था में हुई चूक की प्रशासनिक जिम्मेदारी भी अलग से तय होनी चाहिए।

नर्सिंग क्षेत्र में पंजीयन महज ऑनलाइन प्रमाणपत्र नहीं है। इसके आधार पर किसी व्यक्ति की पेशेवर पहचान बनती है और आगे वह स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सकता है। इसलिए यहां दस्तावेजों की जांच में छोटी चूक भी सामान्य ऑनलाइन गलती नहीं मानी जा सकती। खासकर तब, जब एक परीक्षण आवेदन में ही पहचान से जुड़ी इतनी स्पष्ट विसंगतियां सामने आ गई हों।

अब गेंद कौंसिल के पाले में है। उसे यह बताना होगा कि आवेदन किस स्तर पर जांचा गया, दस्तावेजों का सत्यापन किसने किया, प्रमाणपत्र जारी करने से पहले कौन-कौन से परीक्षण हुए और इस घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई की गई।

सोशल मीडिया पर घूम रही गधे की तस्वीर पर लोग हंस सकते हैं, लेकिन नर्सिंग पंजीयन की इस कहानी में हंसी से ज्यादा चिंता की बात यह है कि एक असंभव-सा आवेदन भी सरकारी प्रक्रिया में इतनी दूर तक पहुंच गया। अब देखना यह है कि जांच केवल उस फर्जी आवेदन तक सीमित रहती है या पूरी पंजीयन प्रक्रिया की भी पड़ताल होती है।

📢 सूचना एवं विज्ञापन हेतु निवेदन: यदि आपके क्षेत्र से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण स्थानीय खबर, सामाजिक गतिविधि या जनहित से संबंधित जानकारी है, तो कृपया प्रकाशन के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल के साथ साझा करें। विज्ञापन एवं प्रचार-प्रसार हेतु भी आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। संपर्क करने के लिए कांटेक्ट उस पेज पर जाये। धन्यवाद्!

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

संजीव पुरोहित

मैं संजीव पुरोहित, शिवपुरी (मध्य प्रदेश) से हूँ और शिवपुरी मेल का चीफ एडिटर हूँ। मेरा उद्देश्य स्थानीय और जनहित से जुड़ी सच्ची, निष्पक्ष व ज़मीनी खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button
Close

Ad Blocker Detected

We rely on advertising revenue to support our journalism and keep this website running. Please consider disabling your ad blocker to continue accessing our content.