भारत का बल्ला गरजा, लेकिन गेंद ने खोल दी पोल! पाकिस्तान पर सोना, वेस्टइंडीज के खिलाफ बड़े सवाल

“351 रन का तूफान फिर भी सवालों में टीम इंडिया, बल्ले ने बचाई लाज तो गेंदबाजी ने बढ़ाई बेचैनी”
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के लिए 3 अक्टूबर का दिन जीत, जश्न और कुछ जरूरी सवालों को एक साथ लेकर आया। एशियन गेम्स के पुरुष क्रिकेट फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया। श्रीयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 211 रन बनाए, जिसमें अभिषेक शर्मा की 61 रन की तेजतर्रार पारी ने भारत को मजबूत शुरुआत दी। जवाब में पाकिस्तान की टीम 192 रन तक ही पहुंच सकी।
लेकिन इसी दिन भारतीय क्रिकेट की दूसरी तस्वीर भी सामने आई। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे में भारत ने 351 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। शुरुआती झटकों के बाद केएल राहुल ने मोर्चा संभाला और 87 गेंदों पर नाबाद 129 रन की शानदार पारी खेलकर भारतीय पारी को ऐसी रफ्तार दी कि स्कोर 350 के पार पहुंच गया। यहां तक तो कहानी पूरी तरह भारत के पक्ष में दिखाई देती है, लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है—जब बल्लेबाज 351 रन खड़े कर दे तो फिर गेंदबाजी को कितनी बड़ी परीक्षा देनी पड़ रही है?
गुवाहाटी में इससे पहले भारत ने वेस्टइंडीज के 405 रन के जवाब में 406 रन बनाकर मुकाबला जीता था। यानी भारतीय बल्लेबाजी लगातार अपना दम दिखा रही है, लेकिन 400 के आसपास पहुंचते स्कोर यह भी बता रहे हैं कि गेंदबाजों के सामने चुनौती कितनी बड़ी है। मुख्य कोच गौतम गंभीर भी बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों पर गेंद और बल्ले के बीच पर्याप्त मुकाबला नहीं होने को लेकर चिंता जता चुके हैं। ऐसे में सवाल किसी एक गेंदबाज का नहीं, बल्कि उस पूरे संतुलन का है जिस पर बड़े टूर्नामेंट में टीम इंडिया को भरोसा करना होगा।
एशियन गेम्स का स्वर्ण भारतीय क्रिकेट की गहराई और प्रतिभा का प्रमाण है। युवा खिलाड़ियों ने मौके को भुनाया है और टीम के पास विकल्पों की कमी नहीं दिखती। लेकिन 2027 विश्व कप की तैयारी के बीच केवल स्कोरबोर्ड पर बड़े आंकड़े देखना पर्याप्त नहीं होगा। बल्ला कितना भी गरजे, बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए गेंद को भी उतनी ही मजबूती से बोलना पड़ेगा। सपाट पिचों पर रनों की बारिश अच्छी लगती है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब सामने मजबूत बल्लेबाजी हो, पिच चुनौती दे और कुछ रन बचाने की जिम्मेदारी गेंदबाजों के कंधों पर हो।
फिलहाल तस्वीर दिलचस्प है—एक तरफ पाकिस्तान को हराकर भारत के खाते में फिर सोना आया है, दूसरी तरफ वेस्टइंडीज के खिलाफ बड़े स्कोर के बावजूद गेंदबाजी पर चर्चा शुरू हो गई है। यानी टीम इंडिया के पास जश्न मनाने के कारण भी हैं और अपनी कमियों को समय रहते तलाशने का मौका भी। क्योंकि विश्व क्रिकेट के बड़े मंच पर सिर्फ रन बनाने वाली टीम नहीं, बल्कि दबाव में रन बचाने वाली टीम ही पूरी कहानी लिखती है।
Live Cricket Info

