पिछोर के चांदनी चौक में आस्था का महाकुंभ! 50वें वर्ष में मां का दरबार, नौ देवियों के दर्शन और 12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी

नवरात्रि विशेष: 1977 से जुड़ी दुर्गा स्थापना की परंपरा का उत्सव, भैरवनाथ के दर्शन से लेकर प्रतिदिन भंडारे तक जुट रहे श्रद्धालु
शिवपुरी ब्यूरो | पिछोर। नवरात्रि में पिछोर के चांदनी चौक में सजा मां दुर्गा का दरबार इस बार खास है। नवयुवक मंडल का नवदुर्गा महोत्सव 50वें वर्ष में पहुंचा है और इसी के साथ आयोजन में धार्मिक आस्था का विशेष रंग देखने को मिल रहा है। यहां मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की अलग-अलग स्थापना की गई है। परिसर में भगवान भोलेनाथ के
12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी और भैरवनाथ के दर्शन भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए लोग पहुंच रहे हैं, वहीं प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है।

1977 से शुरू हुई परंपरा, समय के साथ बढ़ता गया उत्साह
नवयुवक मंडल के सदस्यों के अनुसार, पिछोर में वर्ष 1977 में मां दुर्गा की स्थापना की गई थी। उस समय शुरू हुई यह परंपरा धीरे-धीरे लोगों की आस्था से जुड़ती गई। आज नवरात्रि के दौरान पिछोर के अलग-अलग वार्डों और आसपास के गांवों में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। चांदनी चौक का आयोजन इसी परंपरा के 50वें वर्ष के कारण विशेष महत्व रखता है। आधी सदी से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के बीच इस बार मंडल ने नौ देवियों की स्थापना और 12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी को प्रमुख आकर्षण बनाया है।

एक ही परिसर में नौ देवियों के दर्शन, साथ में शिवभक्ति का स्वरूप
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। चांदनी चौक में अलग-अलग स्थापित नौ देवियों के दर्शन के साथ श्रद्धालु भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी भी देख रहे हैं। भैरवनाथ की स्थापना ने भी दरबार को धार्मिक स्वरूप दिया है। देवी आराधना और शिवभक्ति के इस संगम के चलते आयोजन नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना हुआ है।
दर्शन के साथ भंडारा, महोत्सव में दिख रही सामूहिक आस्था
मां के दरबार में प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु दर्शन-पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। चांदनी चौक में आयोजित यह महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछोर की उस परंपरा की याद भी दिलाता है, जो वर्षों से लोगों के बीच बनी हुई है। 50वें वर्ष में पहुंचा यह आयोजन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और नवरात्रि के उत्साह को एक साथ सामने ला रहा है।
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