दो महीने से 5,200 रसोइयों का मानदेय अटका, 1,800 स्व-सहायता समूह भी भुगतान के इंतजार में

शिवपुरी के 2,252 स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर असर की आशंका, पोर्टल बदलने के बाद अटकी भुगतान प्रक्रिया
शिवपुरी। जिले के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाले 5,200 रसोइयों को दो महीने से मानदेय नहीं मिला है। वहीं भोजन व्यवस्था से जुड़े करीब 1,800 स्व-सहायता समूहों का भुगतान भी लंबित है। जिले के 2,252 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में संचालित इस व्यवस्था में लगातार दो माह से भुगतान नहीं होने से रसोइयों और समूहों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
जिले में एक रसोइये को प्रतिमाह 4 हजार रुपए मानदेय दिया जाता है। इस हिसाब से रसोइयों के मानदेय पर करीब 2.08 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च होते हैं। इसके अलावा स्व-सहायता समूहों को सामग्री और संचालन के लिए करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। दो महीने का भुगतान जोड़ने पर लंबित राशि करीब 6 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

पोर्टल बदलने के बाद बढ़ी परेशानी
जून तक मध्यान्ह भोजन से जुड़े भुगतान पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से किए जा रहे थे। इसके बाद शासन स्तर से एसएनए स्पर्श पोर्टल की व्यवस्था शुरू की गई। पोर्टल बदलने के बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। संबंधित व्यवस्था में आवश्यक अपडेट और प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण जुलाई और अगस्त का भुगतान अटक गया।
अब सितंबर भी समाप्त होने को है। ऐसे में रसोइयों को तीसरे महीने के भुगतान की चिंता सताने लगी है। रसोइयों का कहना है कि मानदेय पहले ही कम है और वह भी समय पर नहीं मिलने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
स्व-सहायता समूहों पर भी बढ़ा दबाव
मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में स्व-सहायता समूहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। जिले में करीब 1,800 समूह इस व्यवस्था से जुड़े हैं। इन समूहों को भोजन सामग्री और संचालन के लिए मिलने वाली राशि भी दो माह से अटकी है। भुगतान नहीं होने से समूहों को भोजन व्यवस्था जारी रखने में आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्व-सहायता समूह महासंघ की प्रदेश अध्यक्ष सरिता ओमप्रकाश बघेल ने भी दो माह से मानदेय नहीं मिलने की बात कही है। उनके अनुसार इस संबंध में भोपाल में ज्ञापन दिया गया है। समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। जिला स्तर पर भी रसोइयों की ओर से काम बंद करने की चेतावनी सामने आई है।
2,252 स्कूलों में रोज पहुंचता है भोजन
जिले के 2,252 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना संचालित है। इन स्कूलों में बड़ी संख्या में बच्चों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में रसोइयों और स्व-सहायता समूहों का भुगतान लंबे समय तक अटका रहने का असर पूरी व्यवस्था पर पड़ सकता है।
इस संबंध मे डीपीसी दफेदर सिंह सिकरवार ने मध्यान्ह भोजन वितरण व्यवस्था से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए मध्यान्ह भोजन शाखा प्रभारी सीमा उपाध्याय से संपर्क करने की बात कही है।
अब सवाल यह है कि पोर्टल बदलने की प्रक्रिया के बीच दो माह का भुगतान क्यों अटका रहा और भुगतान की जिम्मेदारी संभाल रहे विभाग ने समय रहते इसकी व्यवस्था क्यों नहीं की। रसोइयों और स्व-सहायता समूहों को लंबित भुगतान कब तक मिलेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है।
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