सागर से उठी कलम, भोपाल में गूंजा सम्मान: अपने दम पर पत्रकारिता की अलग जमीन बनाने वाली ममता मल्हार सम्मानित

मुश्किलों के बीच अपनी राह बनाई, कलम को जनसरोकारों से जोड़ा और अपने बूते खड़ा किया मीडिया का मंच—ममता मल्हार के संघर्ष को मिला सम्मान!
भोपाल। पत्रकारिता में रास्ते अक्सर तैयार नहीं मिलते, उन्हें अपनी कलम और संघर्ष से बनाना पड़ता है। सागर से पत्रकारिता का सफर शुरू करने वाली ममता मल्हार ने भी यही किया। विभिन्न संस्थानों में अपनी भूमिका निभाने के बाद उन्होंने अपने बूते मल्हार मीडिया की स्थापना की और स्वतंत्र पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। जनपक्षीय पत्रकारिता के लिए भोपाल प्रेस क्लब की ओर से ममता मल्हार को सम्मानित किया गया।

ममता मल्हार की कहानी सिर्फ एक महिला पत्रकार के सम्मान तक सीमित नहीं है। यह उस संघर्ष की कहानी है, जिसमें पत्रकार ने परिस्थितियों से समझौता करने के बजाय अपनी राह खुद चुनी। सागर से शुरू हुआ सफर भोपाल तक पहुंचा और फिर अपने मीडिया मंच के जरिए उन्होंने पत्रकारिता को अपनी दृष्टि और सरोकारों के साथ आगे बढ़ाया। मल्हार मीडिया उसी निरंतर संघर्ष और आत्मनिर्भर पत्रकारिता का परिणाम है।

पत्रकारिता के बदलते दौर में जब खबरों की दिशा और पत्रकार की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, ममता मल्हार ने जनसरोकारों को अपनी पत्रकारिता के केंद्र में रखने का प्रयास किया। आम आदमी से जुड़े मुद्दों और व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने लाने की उनकी कोशिश ने उन्हें एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में पहचान दिलाई।
एक महिला पत्रकार के लिए अपने दम पर मीडिया संस्थान खड़ा करना और उसे लगातार आगे बढ़ाना आसान सफर नहीं रहा होगा। लेकिन ममता मल्हार ने मुश्किलों को अपनी राह की दीवार नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने काम से यह साबित किया कि पत्रकारिता में पहचान किसी पद या बड़े संस्थान से नहीं, बल्कि लगातार खड़े रहने वाली कलम और जनता के सवालों के प्रति प्रतिबद्धता से बनती है।
भोपाल प्रेस क्लब का यह सम्मान उसी यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। सागर से चली एक पत्रकार की कलम ने अपने लिए जगह मांगी नहीं, अपने काम से बनाई—और आज वही सफर सम्मान के मुकाम तक पहुंचा है।
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