शिवपुरी की सड़कों पर कल सिर्फ एक पिता नहीं रो रहा था… पूरा शहर व्यवस्था की लाश पर बैठा इंसाफ मांग रहा था।

“मेरा बेटा तड़प-तड़प कर मर गया… कोई बचाने नहीं आया”

शिवपुरी/ इंटरसिटी स्लीपर बस हादसे में मासूम आना जैन की दर्दनाक, खौफनाक और निर्मम मौत के बाद आखिरकार परिजनों का सब्र टूट गया।
घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी न बस संचालक पर कोई ठोस कार्रवाई हुई… न परिवहन विभाग पर जवाबदेही तय हुई… और न ही किसी जिम्मेदार ने पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने की कोशिश की।
आक्रोशित परिजन, शहरवासी और व्यापारी समाज आज सड़कों पर उतर आया।
मासूम को न्याय दिलाने की मांग लेकर भीड़ कलेक्ट्रेट पहुंची, लेकिन जब कलेक्टर नहीं मिले तो पिता सड़क पर ही बैठ गया।
वह दृश्य किसी भी संवेदनशील इंसान को अंदर तक झकझोर देने वाला था।
रोते-बिलखते पिता ने कहा—
“बस में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे… स्टाफ भाग गया… मेरा बेटा मदद के लिए तड़पता रहा… और मर गया…”

कलेक्टर भीड़ के बीच जमीन पर बैठे
मामले की गंभीरता तब दिखी जब कलेक्टर खुद परिजनों और भीड़ के बीच नीचे बैठकर ज्ञापन लेने पहुंचे।
उन्होंने पूरी बात सुनी, परिजनों को शांत कराया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
सबसे अलग तस्वीर तब सामने आई जब कलेक्टर खुद पीड़ित परिवार और भीड़ के साथ पैदल कलेक्ट्रेट तक गए।
लेकिन बड़ा सवाल अब भी वहीं खड़ा है—
हादसे के बाद ही क्यों जागता है परिवहन विभाग?
आखिर हर बड़ी मौत के बाद ही आरटीओ और परिवहन विभाग की “नींद” क्यों खुलती है?
बस जलती है… लोग मरते हैं… तब अधिकारी सड़क पर कॉपी-पेन लेकर चालान काटते दिखाई देते हैं।
लेकिन हादसे से पहले कभी सड़कों पर खतरनाक स्लीपर बसों की फिटनेस जांचते क्यों नहीं दिखते?
इंटरसिटी बस हादसे के बाद अचानक कलेक्टर और परिवहन अधिकारी बसों की चेकिंग करते नजर आए।
अगर यही जांच पहले होती…
अगर फिटनेस सही से जांची जाती…
अगर सुरक्षा इंतजाम देखे जाते…
तो शायद आज एक मासूम जिंदा होता।
“तीन जिलों का प्रभार… और सुरक्षा भगवान भरोसे!”
शिवपुरी आरटीओ के पास शिवपुरी, अशोकनगर सहित तीन जिलों का प्रभार है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि एक अधिकारी आखिर तीन-तीन जिलों की परिवहन व्यवस्था कैसे संभालेगा?
लोगों का आरोप है कि परिवहन विभाग में दलालों का कब्जा है।
बिना दलाल के कोई काम नहीं होता।
फिटनेस से लेकर परमिट तक सबकुछ “सेटिंग” और “रकम” के दम पर चलता है।
यही वजह है कि कबाड़ और खतरा बन चुकी बसें भी सड़कों पर मौत बनकर दौड़ती रहती हैं।
बस संचालक की चुप्पी ने बढ़ाया गुस्सा
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि हादसे के बाद अब तक बस संचालक की तरफ से न कोई सार्वजनिक बयान आया… न संवेदना… न माफी… और न ही पीड़ित परिवार से संपर्क।
परिजनों का आरोप है कि बस मालिक ने एक बार भी फोन कर दुख तक व्यक्त नहीं किया।
उधर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा यह कहते हुए संदेश प्रसारित किए गए कि “बीमा क्लेम मिल जाएगा…”
इन टिप्पणियों ने लोगों के गुस्से में आग डालने का काम किया है।
लोग पूछ रहे हैं—क्या एक मासूम की जिंदगी सिर्फ बीमा क्लेम बनकर रह गई है?
जनता का फूटा गुस्सा आज शिवपुरी की जनता अनय जैन के पिता के साथ खड़ी नजर आई।
भीड़ सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि उस लापरवाह व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतरी थी जिसने एक मासूम की जान ले ली।
जिले के लोगों ने कलेक्टर से मांग की है कि—
परिवहन विभाग से दलालों का कब्जा हटाया जाए
फिटनेस घोटालों की जांच हो
रिश्वतखोरी पर कार्रवाई हो
दोषी बस संचालक पर सख्त कार्रवाई हो
और भविष्य में ऐसी मौतों को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए
सबसे बड़ा सवाल…
अगर हादसे के बाद ही कार्रवाई होनी है…
तो क्या हर बार किसी मासूम की मौत जरूरी है?
शिवपुरी आज सिर्फ न्याय नहीं मांग रहा…
व्यवस्था से जवाब मांग रहा है।
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