54 पन्नों के शपथ-पत्र से भोपाल तक हड़कंप, 57 निकायों की जांच के लिए चार सदस्यीय दल गठित

13 बिंदुओं में 57 निकायों के भुगतान से नियुक्ति-पदोन्नति तक सवाल; SNA-SPARSH से लेकर बैकडेट आदेशों तक रिकॉर्ड खंगालेगी चार सदस्यीय समिति
भोपाल ब्यूरो। ग्वालियर-चंबल संभाग के नगरीय प्रशासन में फाइलों के भीतर चल रही कथित अनियमितताओं पर अब भोपाल की सीधी नजर है। राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के शिवपुरी जिलाध्यक्ष एवं पत्रकार माखन सिंह धाकड़ ने 21 सितंबर 2026 को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत सह शपथ-पत्र पेश किया। शिकायत कोई सामान्य आवेदन नहीं, बल्कि 54 पन्नों का दस्तावेज है, जिसमें 13 बिंदुओं के जरिए अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, भुगतान, नियुक्ति, पदोन्नति, प्रभार और वित्तीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अब इस शिकायत ने विभागीय जांच का रूप ले लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने 29 सितंबर 2026 को आदेश क्रमांक 28713 जारी कर चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है।

57 निकायों के भुगतान पर उठे सवाल, अब बिल से लेकर डिजिटल एंट्री तक होगी पड़ताल
शिकायत में संभाग के 57 नगरीय निकायों में हुए भुगतानों की देयकवार जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई मामलों में नियमों और निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर वित्तीय कार्रवाई की गई। यही वजह है कि शिकायत में केवल फाइल देखने की बात नहीं, बल्कि SNA-SPARSH पोर्टल पर दर्ज डिजिटल रिकॉर्ड से भुगतान की वास्तविकता मिलाने की मांग की गई है। यानी जांच में यह देखा जा सकता है कि बिल किसके स्तर से चला, किसने स्वीकृत किया, भुगतान कब हुआ और सिस्टम में उसकी एंट्री किस तारीख को हुई।

शिकायत के निशाने पर प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता, सहायक संचालक रीता कैलाशिया, प्रभारी लेखापाल सुनील लचौरिया और लिपिक सौरभ सिंह कौरव की कार्यप्रणाली से जुड़े अलग-अलग मामले हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि संभागीय कार्यालय में प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के इस्तेमाल में नियमों की अनदेखी हुई तथा पसंदीदा अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रभार और अन्य लाभ दिए गए। इन आरोपों की सच्चाई अब जांच समिति के रिकॉर्ड परीक्षण से सामने आएगी।
निलंबन के बाद की तारीखें भी बनीं सवाल—बैकडेट आदेशों का आरोप
शिकायत में 7 सितंबर 2026 को अमरसत्य गुप्ता के निलंबन का भी उल्लेख है। विभागीय आदेश के मुताबिक उन्हें भिंड नगरपालिका में निर्माण कार्यों से संबंधित जांच रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं करने, अन्य विभागीय जांच प्रकरण लंबित रहने तथा लोकायुक्त और न्यायालयीन मामलों से जुड़े प्रतिवेदन लंबित रहने के आरोपों के बीच निलंबित किया गया था। उन्हें भोपाल संचालनालय से संबद्ध किया गया था।

यहीं से शिकायत का सबसे संवेदनशील हिस्सा सामने आता है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि निलंबन की तारीख के आसपास ही कुछ निकायों में पदोन्नति, समयमान वेतनमान और प्रभार से संबंधित ऐसे आदेश जारी किए गए जिनकी तारीख और प्रक्रिया की जांच जरूरी है। शिकायत में इन्हें बैकडेट आदेशों से जोड़कर जांच की मांग की गई है। अब समिति के सामने असली सवाल यही रहेगा कि आदेश वास्तव में कब तैयार हुए, किसने जारी किए और संबंधित डिजिटल एवं विभागीय रिकॉर्ड में उनकी स्थिति क्या है।
शिवपुरी की फाइल से भिंड, दतिया, सबलगढ़ और गुना तक मामला
54 पन्नों की शिकायत में शिवपुरी नगरपालिका से जुड़े एक तदर्थ कर्मचारी की नियमित लेखापाल पद पर पदोन्नति के लिए DPC प्रक्रिया, भिंड में निर्माण कार्यों के भुगतान, अनुकंपा नियुक्ति, संविदा नियुक्ति, आरक्षित पदों पर पदोन्नति और विभिन्न निकायों में अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रभार दिए जाने जैसे मामलों का उल्लेख है।
शिकायत में दावा किया गया है कि शिवपुरी में 29 दिसंबर 1991 को केवल 89 दिनों के लिए तदर्थ रूप से नियुक्त किए गए राघवेंद्र श्रीवास्तव को नियमित लेखापाल बनाने की प्रक्रिया के लिए DPC कराए जाने की अनुशंसा शासन को भेजी गई। शिकायतकर्ता ने इस प्रक्रिया को नियम विरुद्ध बताते हुए रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।
इसी तरह फूप में अनुकंपा नियुक्ति, दतिया से जुड़े कर्मचारी के पुत्र की नियुक्ति, गौरमी में सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्ति, सबलगढ़ में पदोन्नति, चाचौड़ा में आरक्षित पदों से जुड़े मामले और गुना में स्वीकृत पदों से बाहर पदोन्नति जैसे मामलों को भी शिकायत में शामिल किया गया है। इन मामलों में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच के बाद ही तय होगा।
भितरवार का भवन भी शिकायत के दायरे में
शिकायत में सहायक संचालक रीता कैलाशिया के भितरवार नगरपालिका के प्रभार के दौरान पुराने भवन को बिना टेंडर डिस्मेंटल कराए जाने का आरोप भी लगाया गया है। साथ ही शिकायतकर्ता ने संयुक्त संचालक की सील से अधिकारियों को NOC और समयमान वेतनमान दिए जाने तथा विभिन्न निकायों में पसंदीदा अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रभार देने के आरोप लगाए हैं। इन दावों के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेज और विभागीय रिकॉर्ड अब जांच समिति के सामने होंगे।
अब सवाल आरोपों का नहीं, रिकॉर्ड की तारीखों का भी है
भोपाल से गठित समिति में उप संचालक देवेंद्र कुमार व्यास को अध्यक्ष बनाया गया है। अन्य तीन अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है। संचालनालय के 29 सितंबर के आदेश में समिति को शिकायत में उल्लेखित आरोपों की जांच कर 15 दिवस के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यानी अब जांच की असली तस्वीर कागजों से निकलेगी। 57 निकायों में भुगतान की फाइलें, बिल-वाउचर, स्वीकृति आदेश, DDO संबंधी रिकॉर्ड, पदोन्नति और नियुक्ति आदेश, प्रभार संबंधी दस्तावेज तथा SNA-SPARSH की डिजिटल एंट्री—हर कड़ी को जोड़कर देखना होगा।
54 पन्नों के शपथ-पत्र ने सवालों की लंबी फेहरिस्त विभाग के सामने रख दी है। भोपाल ने अब उन सवालों का जवाब फाइलों से मांग लिया है। 15 दिन की समय-सीमा में आने वाली जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितना दम है और नगरीय प्रशासन की इन फाइलों में नियमों की अनदेखी हुई है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि मामला शिकायत की मेज से उठकर जांच की मेज तक पहुंच चुका है।
Live Cricket Info








