Telegram Join our Telegram Channel for Daily Latest News Updates! Join Now ×

अवैध शराब रोकनी है तो पहले बताओ वैध शराब बिकती कहां है—दुकानों, ब्रांड, कीमत और बिलिंग की जानकारी सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी आबकारी की है!

जिले में कितनी शासकीय शराब दुकानें, कहां-कहां स्थित, कौन सा ब्रांड कितनी कीमत पर—बिल से बिक्री और रेट लिस्ट की जानकारी भी सार्वजनिक करे आबकारी विभाग!

शिवपुरी। जिले में अवैध शराब को लेकर पिछले दिनों जिस तरह महिलाओं का विरोध, हंगामा और तनाव की स्थिति बनी, उसके बाद प्रशासन ने आम लोगों से अवैध शराब की सूचना देने के लिए नंबर जारी किए और गांव-गांव तक सूचना तंत्र सक्रिय करने की पहल की। लेकिन इसके बावजूद जिले के अलग-अलग हिस्सों से शासकीय दुकानों के अलावा शराब उपलब्ध होने की बातें लगातार आम लोगों के बीच सुनाई दे रही हैं। ऐसे में सवाल अब सिर्फ अवैध शराब की बिक्री का नहीं, बल्कि आबकारी विभाग की पूरी निगरानी व्यवस्था का है। जब आम आदमी को पता है कि शराब कहां मिल रही है तो विभाग को क्यों नहीं?
सबसे पहले आबकारी विभाग को यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए कि शिवपुरी जिले में कुल कितनी शासकीय शराब दुकानें हैं, वे किन-किन स्थानों पर संचालित हैं, प्रत्येक दुकान पर कौन-कौन से ब्रांड उपलब्ध हैं और प्रत्येक ब्रांड की निर्धारित बिक्री कीमत कितनी है। इसके साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इन दुकानों पर शराब की बिक्री नियमानुसार बिल देकर हो रही है या नहीं, निर्धारित रेट लिस्ट दुकान पर प्रदर्शित है या नहीं और ग्राहक से तय कीमत से अधिक राशि तो नहीं ली जा रही। जब विभाग आम आदमी से अवैध शराब की सूचना मांगता है तो आम आदमी को यह बताना भी विभाग की जिम्मेदारी है कि कहां से शराब खरीदना अधिकृत है और किस स्थान पर होने वाली बिक्री अवैध मानी जाएगी।
आज स्थिति यह है कि आम ग्राहक के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उसके आसपास दिखाई देने वाली शराब बिक्री वैध है या अवैध। यदि शासकीय शराब दुकान के अलावा किसी ढाबे, होटल, किराना दुकान, मकान अथवा अन्य स्थान पर शराब उपलब्ध होने की बात सामने आती है तो आम आदमी किस आधार पर तय करे कि वहां बिक्री नियमों के मुताबिक है या नहीं? विभाग यदि अधिकृत दुकानों की पूरी सूची, स्थान, उपलब्ध ब्रांड और निर्धारित कीमत सार्वजनिक कर दे तो आम आदमी खुद भी संदिग्ध बिक्री को पहचान सकता है और तत्काल सूचना दे सकता है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now


सवाल यह भी है कि यदि किसी दुकान पर बिल नहीं दिया जा रहा, रेट लिस्ट दिखाई नहीं दे रही या निर्धारित कीमत से अधिक राशि ली जा रही है तो इसकी निगरानी कौन करेगा? आबकारी विभाग के पास दुकानों के निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच की व्यवस्था है, फिर ऐसी शिकायतों की नियमित जांच और उसका परिणाम जनता के सामने क्यों नहीं आता? बिल से बिक्री हो रही है या नहीं, स्टॉक कितना आया और कितना बिका—इन सवालों का जवाब कागजों से ज्यादा जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
सबसे गंभीर सवाल सरकारी दुकान बंद होने के बाद शराब की उपलब्धता को लेकर है। यदि किसी क्षेत्र में अधिकृत दुकान बंद होने के बाद भी शराब आसानी से मिलने की बातें लगातार सामने आती हैं तो विभाग को यह पता लगाना चाहिए कि शराब वहां पहुंच कहां से रही है। किस दुकान से स्टॉक निकला, किस माध्यम से पहुंचा और किस स्थान पर बिक्री हुई—इस पूरी कड़ी की निगरानी आखिर किसकी जिम्मेदारी है?
पिछले दिनों महिलाओं के विरोध और कई स्थानों पर बने तनावपूर्ण माहौल के बाद प्रशासन ने सूचना तंत्र मजबूत करने की पहल की। लेकिन केवल सूचना नंबर जारी करने से अवैध शराब की समस्या खत्म नहीं होगी। सूचना मिलने के बाद शराब के स्रोत तक पहुंचना, अवैध बिक्री वाले स्थान की पहचान करना और कार्रवाई के बाद वहां दोबारा बिक्री न हो यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है। यदि छोटी-बड़ी कार्रवाई के बावजूद अवैध शराब की बिक्री की बातें लगातार आम लोगों के बीच बनी हुई हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि विभाग की निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है।
अब जिला आबकारी विभाग के सामने सीधा सवाल है—जिले में कितनी शासकीय शराब दुकानें हैं, वे कहां-कहां हैं, उनमें कौन-कौन से ब्रांड उपलब्ध हैं, उनकी निर्धारित कीमत क्या है, क्या प्रत्येक बिक्री बिल के माध्यम से हो रही है और क्या निर्धारित रेट लिस्ट हर दुकान पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित है? इन सवालों के जवाब जनता के सामने होने चाहिए, क्योंकि शराब की बिक्री की व्यवस्था जितनी पारदर्शी होगी, उतनी ही आसानी से वैध और अवैध बिक्री के बीच अंतर किया जा सकेगा।
महिलाएं सड़क पर उतर चुकीं, प्रशासन सूचना तंत्र खड़ा कर चुका और इसके बाद भी अवैध शराब की बिक्री की बातें थम नहीं रहीं—अब आबकारी विभाग को सिर्फ कार्रवाई के आंकड़े नहीं, बल्कि पूरी शराब बिक्री व्यवस्था का खुला हिसाब जनता के सामने रखना होगा।
आम आदमी को यह पता होना चाहिए कि शराब कहां वैध रूप से बिकती है, कौन सा ब्रांड कितने में मिलता है और कहां होने वाली बिक्री पर उसे तत्काल सवाल उठाना चाहिए। यही जानकारी सार्वजनिक करना आबकारी विभाग की जिम्मेदारी है। जब तक आबकारी बिभाग के जिला अधिकारी को अब बतानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर आकर जनता को बताना होगा की बिभाग द्वारा इतनी दुकाने शाशकीय रिकॉर्ड मे इस स्थान पर दर्ज है और इसके अलाबा सभी वाह स्थान जहा शराब का बिक्रय हो रहा है या होता पाया जाता है वह् पूरी तरह अबैध है क्युकी अब सिर्फ कागज़ी खानापूर्ती से काम नही चलेगा क्युकी इस गंभार मामले को लेकर जब स्वयं कलेक्टर को बीच मे हस्तचेप करना ओड़ा तो बिभागा भी होनी जिम्मेदारी जनता के साने स्पष्ट करे जिससे कलेक्टर का आदेश धरातल पर असली कारगार साबित हो सके अब देखना होगा की जिला आबकारी अधिकारी जिले भर मे शाशकीय दुकानों को छोड़कर हो रही शराब की बिक्री पर पूरी तरह कगाम लगाने मे कामयाबी हासिल कर पाते है या नहीं या फिर हमेशा की तरह कागज़ी घोड़े दौड़ कर शान्त हो जाएंगे।

📢 सूचना एवं विज्ञापन हेतु निवेदन: यदि आपके क्षेत्र से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण स्थानीय खबर, सामाजिक गतिविधि या जनहित से संबंधित जानकारी है, तो कृपया प्रकाशन के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल के साथ साझा करें। विज्ञापन एवं प्रचार-प्रसार हेतु भी आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। संपर्क करने के लिए कांटेक्ट उस पेज पर जाये। धन्यवाद्!

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

संजीव पुरोहित

मैं संजीव पुरोहित, शिवपुरी (मध्य प्रदेश) से हूँ और शिवपुरी मेल का चीफ एडिटर हूँ। मेरा उद्देश्य स्थानीय और जनहित से जुड़ी सच्ची, निष्पक्ष व ज़मीनी खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button
Close

Ad Blocker Detected

We rely on advertising revenue to support our journalism and keep this website running. Please consider disabling your ad blocker to continue accessing our content.