करोड़ो की उर नहर् परियोजना बनी जल संसाधन एबं राजश्व बिभाग की लूट का अड्डा — जल संसाधन

जल संसाधन बिभाग ने अपने भ्र्स्टाचार के काले कारनामे छुपाने के लिए प्रशासन का ध्यान भटकाने के लिए किया कलेक्टर को एक पत्र जारी न्यायालय मे हुआ पत्र झूठा साबित – सूत्र।
जल संसाधन बिभाग के अधिकारियों ने मिलकर शाशकीय जमीनो और नहर लाइन से हटकर जमीनो का भी बनबा दिया मुआब्ज़ा।
(संजीब पुरोहित,संपादक)
शिवपुरी। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर बिधानसभा मे पिछले कुछ बर्षो से संचालित है करोड़ो रुपय की उर नहर परियोजना जो आज भी अपूर्ण होकर भ्रस्टाचार की कब्रगाह बनकर रह गयी है इस योजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए समुचित पानी देना था लेकिन इस योजना को शुरुआत से ही जल संसाधन बिभाग के अधिकारियों ने लूट का अड्डा बनाकर रख दिया सारे नियम बिरुद्ध कार्य इस परियोजना मे किये गये हर अधिकारी ने भ्रस्टाचार के लिए हर वो तरीके अपनाये जो किसान हित मे न होकर सिर्फ निज हित साधने मे फलीभूत हो सके जैसा की सुनने मे और चर्चा मे आ रहा है की जल संसाधन बिभाग ने राजश्व बिभागा के साथ मिलकर शाशकीय जमीनो का भी मुआब्ज़ा बनाकर् अबार्ड पारित करा डाला कई जगह नहर की मेंन् लाइन से हटकर मुआब्ज़ा बनबा डाला कई जगह रकबे से ज्यादा का मुआब्ज़ा बनबा डाला ऐसे कई भ्र्स्ताचार के मामले है जिनकी अगर उच्च स्तरीय जांच एजेंसियो से जांच करा दी जाए तो बेहद चौकाने वाले परिणाम सामने आएंगे और करोड़ो रूपए का घोटाला सामने निकलकर् आएगा लेकिन सबसे बड़ा चिंतनीय बिषय है की यह जांच करेगा कौन क्युकी इसमे राजश्व के बड़े बड़े अधिकारियो की स्वयं संलिप्पत्ता है तो इसकी जांच होना शायद मुश्किल है लेकिन अब यह जांच लोकायुक्त और इंटेलिजेंस के पास दी जा रही है जिससे की सारे चेहरे बेनक़ाब होकर् सामने आ सके शिवपुरी मेल सारे पुख्ता दस्ताबेजो के साथ इस मामले को बरिष्ठ स्तर पर लेकर जाएगा और जो दोषी बधिकारी बचे हुए है उन पर बेधानिक कार्रवाही करबाएगा।
शाशकीय जमीने भी नहीं बची उनके भी बन गये मुआब्जे और हो गया अबार्ड पारित आखिर कैसे?
जैसा की प्रथम दृष्ट्या दस्ताबेजो को देखकर पता चल रहा है की की कुछ जमीनो के सर्बे नंबरों के जो मुआब्जे बने है वह आज की स्थिति मे अगर देखे जाए तो शाशकीय भूमी दर्शा रहे है अब आखिर शाहकीय भूमी होने के बाबजूद भी कैसे इन जमीनो का मुआब्ज़ा बना दिया गया जबकी नियमानुसार अगर बात करे तो हमेशा मुआब्ज़ा किसान की निजी भूमी का ही बनाकर अबार्ड मे शामिल कराया जाता है लेकिन यहा सब कुछ सिर्फ खुल्लमखुल्ला हुआ है न कोई देखने वाला न कोई कहने वाला सिर्फ भ्रस्टाचार का केंद्र बनाया गया है।
नहर लाइन से हटकर जमीनो का भी दिया मुआब्ज़ा जो जमीन नहर मे आ ही नही रही थी उनका भी बना डाला मुआब्ज़ा आखिर कैसे हुआ सम्भव ?जैसा की देखने मे आया की लोअर उर नहर परियोजना मे जो मुआब्ज़ा बितरित किया गया है उसमे काफी संदेहास्पद स्थितिया दिखाई दे रही है और सोसल मीडिया पर काफी बायरल भी हो रही है जैसे की जो जमीन नहर के नक़्शे की लाइन मे आ ही नहीं रही है उसको भी मुआब्जे की लिस्ट मे शामिल कर लिया गया अब जो जमीन नहर मे जा ही नहीं रही वाह आखिर कैसे शामिल हुई यह आज तक एक अबूझ पहेली बनी हुआ है ऐसे कई सर्वें नंबर दिखे भी दस्ताबेजो मे नहर लाइन से हटकर है और वो मुआब्जे मे शामिल है।रकबे से ज्यादा जमीनो का बटा मुआब्ज़ा रकबा कम लेकिन मुआब्जे मे बढ़ाकर किया शामिल आखिर कैसे हुआ सम्भव ?
करोड़ो की परियोजना मे ऐसे कई कार्य सुनने मे आ रहे है जो एक जादू का पिटारा जैसा महसूस हो रहा है इसी क्रम मे जैसा की बायरल दस्ताबेजो मे दिखाई दिया की कुछ जमीनो का मुआब्ज़ा ऐसा भी बना डाला जिनमे किसान की जमीन का रकबा नहर लाइन के अंदर कम है लेकिन मुआब्जे मे वही रकबा बढ़ाकर मुआब्ज़ा बनाया हुआ प्रतीत हो रहा है अब यह कैसे सम्भव हुआ भगवान जाने जब किसान की जमीन का रकबा एक नहर मे कम गया तो ज्यादा रकबे का मुआब्ज़ा कैसे बना डाला लेकिन जल संसाधन बिभाग के जादूगरो ने असम्भव को भी सम्भव बनाकर रख डाला।


भ्रस्टाचार और घोटाले के नाम से चर्चित परियोजना मे काफी संसानीखेज बाते निकलकर सामने आ रही है कई ऐसे मामले निकलकर सुनने मे आ रहे जो अभी तक कागजो मे दफन है ऐसा ही एक मामला सुनने में आया की परियोजना के मुआब्ज़ा बनाने वाले जादूगरो ने किसानों के बने हुए मुआब्जो में दूसरे खाते लगा लगाकर करबा दिये भुगतान अब जादूँगरो ने ऐसा कैसे सम्भव कर दिया यह तो जादूँगरो के बड़े जादूँगर ही जाने की यह असम्भव को कैसे सम्भव कर डाला।
कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो उर नहर ओरियोजना में दस्ताबेजो में ऐसे ऐसे तथ्य दफन है की जब इन्हे जांच में सम्मिलित किया जाएगा तो न जाने कितने जादूँगर इन भ्रामक तथ्यों में उलझते हुए नजर आएंगे क्युकी यह सारे जादूगर आज अपने आपको को इस भ्र्स्स्ताचार से बचा हुआ महसूस कर रहे है जबकी बायरल दस्ताबेजो में जो स्थितिया प्रथम दृष्ट्या दिखाई दे रही है उन्हे देखकर तो यही लग रहा है की यहाँ तो पूरी दाल की दाल ही काली है क्युकी मुआब्जे से लेकर अबार्ड पारित होने तक जितने अधिकारियों कर्मचारियों ने इस ओर निगाहे डाली वह सब ही धरतराष्ट्र बने रहे और खेला हो गया लेकिन अब वह सभी जिन्होंने इस मुआब्जे बनाने मे दस्ताबेजो पर अपने हस्ताक्षर रुपी चिड़िया बनाई वह सभी जांच के दायरे में आकर अपना अपना पक्ष रखेंगे।
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