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जब कलेक्टर जागे, तब टूटी खनन माफियाओं की नींद!”

4 खदानों के पट्टे निरस्त, खनन गतिविधियाँ प्रतिबंधित… लेकिन बड़ा सवाल — आखिर खनिज विभाग अब तक करता क्या रहा?

शिवपुरी। जिले में अवैध खनन और नियमों को ठेंगा दिखाकर चल रहे क्रेशरों पर आखिरकार प्रशासन का बड़ा हथौड़ा चला है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देश पर जिले की 4 खदानों के पट्टे निरस्त कर दिए गए हैं और तत्काल प्रभाव से खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।

लेकिन इस पूरी कार्रवाई ने जितनी चर्चा खनन माफियाओं की बढ़ाई है, उससे कहीं ज्यादा सवाल खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े कर दिए हैं।

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कलेक्टर के आदेश के बाद जब खदानों का भौतिक सत्यापन हुआ तो नियमों का खुला उल्लंघन, स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन, और शासन की देय राशि जमा न करने जैसी गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। इसके बाद 3 क्रेशर आधारित खदानों और 1 फर्शी पत्थर खदान की लीज निरस्त कर दी गई।

निरस्त की गई खदानें

  • ग्राम देवरीखुर्द, तहसील नरवर — पट्टेदार राजीव सिंघल

  • दबरा दिनारा, तहसील करैरा — पट्टेदार नीलेश पाठक

  • बामौर, तहसील बदरवास — पट्टेदार रामेश्वर गुप्ता

  • केनवाह, तहसील पिछोर — पट्टेदार श्याम सिंह गुर्जर

अब सबसे बड़ा सवाल…

अगर इन खदानों में वर्षों से नियम विरुद्ध खनन हो रहा था, तो खनिज विभाग आखिर कर क्या रहा था?
क्या विभाग को अवैध उत्खनन दिखाई नहीं दे रहा था?
या फिर सब कुछ देखकर भी “मैनेजमेंट” के दम पर आंखें बंद रखी गई थीं?

जिन खदानों पर आज कलेक्टर को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी पड़ी, उन पर खनिज विभाग पहले कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया?
क्या विभागीय अधिकारियों की चुप्पी ने अवैध खनन को खुला संरक्षण दिया?
क्या शासन को करोड़ों के राजस्व नुकसान का जिम्मेदार सिर्फ खदान संचालक हैं, या फिर विभागीय लापरवाही भी बराबर की दोषी है?

कलेक्टर की कार्रवाई ने खोली विभाग की पोल

इस कार्रवाई ने यह साफ संकेत दे दिया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो अवैध खनन पर लगाम लगाई जा सकती है।
लेकिन इससे खनिज विभाग की निष्क्रियता भी पूरी तरह उजागर हो गई है।

जिले में लंबे समय से अवैध उत्खनन, ओवरलोड परिवहन और नियम विरुद्ध क्रेशर संचालन की शिकायतें उठती रही हैं, मगर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। अब जब कलेक्टर ने सीधे मोर्चा संभाला, तब जाकर विभाग हरकत में दिखाई दिया।

जनता पूछ रही है…

  • आखिर किन अधिकारियों के संरक्षण में ये खेल चलता रहा?

  • क्या अब विभागीय जिम्मेदारी भी तय होगी?

  • क्या सिर्फ पट्टे निरस्त कर देने से मामला खत्म हो जाएगा?

  • या फिर उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने वर्षों तक आंखें मूंदे रखीं?

खनन माफियाओं पर हुई यह कार्रवाई जितनी बड़ी है, उससे कहीं बड़ा मुद्दा उस सिस्टम का है जिसने अवैध खनन को वर्षों तक पनपने दिया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कार्रवाई सिर्फ खदानों तक सीमित रहती है या फिर विभागीय जवाबदेही तक भी पहुंचती है।

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संजीव पुरोहित

मैं संजीव पुरोहित, शिवपुरी (मध्य प्रदेश) से हूँ और शिवपुरी मेल का चीफ एडिटर हूँ। मेरा उद्देश्य स्थानीय और जनहित से जुड़ी सच्ची, निष्पक्ष व ज़मीनी खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

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