“GST दफ्तर से सोशल मीडिया तक… महिला अफसर का आरोप: ‘एक करोड़ दो, नहीं तो बर्बाद कर दूंगा’”

10 महीने तक मानसिक प्रताड़ना, बेटी तक को बनाया निशाना — सहायक आयुक्त जया शर्मा ने खोला ब्लैकमेलिंग का बड़ा खेल
शिवपुरी।
सरकारी दफ्तर में शुरू हुआ एक मामूली प्रशासनिक विवाद अब सोशल मीडिया, कथित ब्लैकमेलिंग और धमकियों के संगीन मामले में बदल चुका है। जीएसटी विभाग की सहायक आयुक्त जया शर्मा ने बदरवास निवासी प्रदीप कुमार जाटव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि आरोपी पिछले करीब 10 महीनों से महिला अधिकारी को सोशल मीडिया पर बदनाम कर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था और कथित रूप से एक करोड़ रुपए की मांग कर रहा था।
पीड़ित अधिकारी सहायक आयुक्त जी एस टी जया शर्मा का कहना है कि यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत दुश्मनी तक सीमित नहीं है, बल्कि सुनियोजित तरीके से उनकी छवि धूमिल करने, नौकरी पर सवाल खड़े करने और परिवार को डराने का प्रयास किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने कथित तौर पर उनकी 7 वर्षीय बेटी तक को सोशल मीडिया पोस्टों में घसीटा और अभद्र टिप्पणियां कीं।
आवेदन निरस्त हुआ… और शुरू हो गया “सोशल मीडिया हमला”
शिकायत के अनुसार पूरा विवाद 18 जुलाई 2025 से शुरू हुआ। उस दिन आरोपी अपने परिचित का जीएसटी पंजीयन कराने के लिए आवेदन लेकर विभागीय कार्यालय पहुंचा था। तकनीकी और विभागीय कारणों से आवेदन निरस्त कर दिया गया। आरोप है कि आवेदन खारिज होते ही आरोपी भड़क उठा और कथित तौर पर बोला— “20 लाख का नुकसान हुआ है, इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
इसके बाद सोशल मीडिया पर लगातार पोस्टों की बौछार शुरू हो गई। महिला अधिकारी के मुताबिक आरोपी ने उन्हें “हत्यारिन” जैसे शब्दों से संबोधित किया, पुराने मामलों को जोड़कर भ्रामक पोस्ट साझा कीं और विभिन्न विभागों में शिकायतों की झड़ी लगा दी।
“एक करोड़ दो… नहीं तो जिंदगी बर्बाद कर दूंगा!”
महिला अधिकारी ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए एक करोड़ रुपए की मांग की। इतना ही नहीं, जब उन्होंने विरोध किया और पुलिस कार्रवाई की चेतावनी दी तो आरोपी ने उल्टा एससी-एसटी एक्ट में झूठा फंसाने की धमकी देना शुरू कर दिया।
पीड़िता का कहना है कि पूरा घटनाक्रम किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है, क्योंकि सोशल मीडिया पर लगातार अभियान चलाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने पुलिस से इस पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की गहराई से जांच की मांग की है।
पुलिस हरकत में, जल्द गिरफ्तारी के संकेत
रोहित दुबे ने बताया कि सहायक आयुक्त की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, धमकी, आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस कथित ऑनलाइन अभियान में और कौन-कौन लोग शामिल थे। जल्द गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
क्या अब सरकारी अधिकारियों को सोशल मीडिया ट्रायल और डिजिटल ब्लैकमेलिंग के जरिए झुकाने की कोशिश हो रही है?
क्या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब व्यक्तिगत बदले और दबाव की नई प्रयोगशाला बनते जा रहे हैं?
और सबसे बड़ा सवाल — अगर एक वरिष्ठ महिला अधिकारी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही, तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी?
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