गणपति के जयकारों पर भारी न पड़ जाए डीजे का धमाका, आज प्रशासन की असली परीक्षा

उत्सव की आड़ में डेसिबल की मनमानी कितनी चलेगी? ‘शिवपुरी मेल’ ने पहले ही चेताया था, अब निगरानी और कार्रवाई की बारी
शिवपुरी। अनंत चतुर्दशी पर आज जिलेभर में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस आस्था, उमंग और भव्यता के साथ निकलेंगे। गणपति बप्पा के जयकारों और ढोल-बैंड के बीच बड़ी संख्या में डीजे भी सड़कों पर रहेंगे। उत्सव में जोश जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या जोश की आवाज इतनी बढ़ जाएगी कि बुजुर्गों, बच्चों, बीमार लोगों और आम राहगीरों के लिए परेशानी बन जाए? गणेश उत्सव की शुरुआत में ही ‘शिवपुरी मेल’ ने प्रशासन का ध्यान इस संभावित समस्या की ओर खींचते हुए सुझाव दिया था कि डीजे और बैंड संचालकों की बैठक बुलाकर ध्वनि सीमा स्पष्ट कराई जाए तथा उल्लंघन की स्थिति में मौके पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था रखी जाए।
कानून भी इस मामले में स्पष्ट है। Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के तहत लाउडस्पीकर अथवा पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल के लिए लिखित अनुमति जरूरी है। सार्वजनिक स्थान पर ध्वनि संबंधित क्षेत्र के निर्धारित ambient noise standard से अधिकतम 10 dB(A) ऊपर और कुल 75 dB(A) से अधिक नहीं हो सकती। आवासीय क्षेत्र में दिन के समय 55 dB(A), वाणिज्यिक क्षेत्र में 65 dB(A) और silence zone में 50 dB(A) का ambient standard है। नियमों के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक भी लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लागू है, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमित छूट को छोड़कर।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन ने इस बार डीजे और बैंड संचालकों को बाकायदा कोई लिखित निर्देश दिए हैं? ‘शिवपुरी मेल’ की पड़ताल में जिला प्रशासन की वेबसाइट पर अनंत चतुर्दशी के लिए डीजे-बैंड की ध्वनि सीमा, समय और कार्रवाई को लेकर कोई अलग सार्वजनिक आदेश फिलहाल सामने नहीं आया है। यदि प्रशासन ने बैठक, आदेश या पुलिस-प्रशासन स्तर पर कोई निर्देश जारी किए हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना भी जरूरी है, ताकि डीजे संचालक और आम नागरिक दोनों स्पष्ट रूप से जान सकें कि उन्हें किन नियमों का पालन करना है। और यदि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है तो आज निकलने वाले हजारों लोगों के जुलूस के बीच नियमों का पालन कौन और कैसे कराएगा—यह सवाल सीधे प्रशासनिक तैयारी पर खड़ा होता है।
अब असली परीक्षा कागज पर नियम होने की नहीं, सड़क पर उनके दिखाई देने की है। क्या प्रमुख विसर्जन मार्गों पर sound level meter से ध्वनि की जांच होगी? क्या नियम तोड़ने वाले डीजे संचालकों को मौके पर रोका जाएगा? Noise Rules के अनुसार निर्धारित सीमा से अधिक शोर की शिकायत पर सक्षम प्राधिकारी को कार्रवाई करनी होती है और आवश्यक होने पर शोर को रोकने या नियंत्रित करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। यदि प्रशासन ने पहले से तैयारी कर रखी है तो यह निश्चित रूप से स्वागतयोग्य कदम होगा; लेकिन यदि नियम मौजूद हैं और निगरानी की व्यवस्था जमीन पर दिखाई नहीं देती, तो फिर जवाबदेही केवल डीजे संचालक तक सीमित नहीं रह सकती—निगरानी और प्रवर्तन की जिम्मेदारी निभाने वाले तंत्र से भी सवाल पूछा जाएगा।
और इस व्यवस्था का सबसे सहज ‘टेस्ट’ भी हो सकता है। जिस डीजे की आवाज आम नागरिकों को सड़क पर झेलनी पड़ती है, वही जुलूस जब कलेक्टर और एसपी निवास के सामने से गुजरे तो प्रशासनिक मानकों के अनुरूप आवाज में ही गुजरे। उद्देश्य किसी अधिकारी को असुविधा देना नहीं, बल्कि यह देखना है कि जिस ध्वनि सीमा को पूरे जिले में लागू कराया जाना है, उसका पालन जमीन पर कितना हो रहा है। कलेक्टर और पुलिस प्रशासन यदि पहले से ही डीजे संचालकों को सीमित ध्वनि, निर्धारित समय और अनुशासन के निर्देश दे चुके हैं, तो आज उसका असर जुलूसों में साफ दिखाई देना चाहिए।
क्योंकि गणपति की भक्ति को तेज आवाज की प्रतियोगिता बनाने की जरूरत नहीं है। उत्सव पूरे उत्साह से मनाइए, डीजे-बैंड भी बजाइए, लेकिन इतना जरूर ध्यान रहे कि किसी बुजुर्ग की नींद, किसी मरीज का सुकून या किसी परिवार की सामान्य दिनचर्या उत्सव के शोर में दब न जाए। आज शिवपुरी में गणपति विसर्जन के साथ डीजे के डेसिबल का भी इम्तिहान है—और इस इम्तिहान का परिणाम केवल डीजे संचालकों के नहीं, प्रशासन की तैयारियों के रूप में भी दिखाई देगा।
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