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बरगी डैम त्रासदी: “आंधी आई… और सिस्टम बह गया!”

बरगी डेम मे नहीं डूबा क्रूज… डूब गयी व्यस्था! 9 मौतो ने खोलकर रख दी सिस्टम की पोल!

“टिकट 29,सबार 47…बरगी डेम मे मौत का सौदा ! सिस्टम ने ली 9 जाने “

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“20 साल पुराना क्रूज 74km/h की आंधी..मौत का पूरा इंतजाम था!”

जबलपुर। बरगी डैम में गुरुवार शाम जो हुआ, वह सिर्फ एक हादसा था…या लापरवाही, अव्यवस्था और सिस्टम की नाकामी का खौफनाक विस्फोट था। तेज आंधी चली, लहरें उठीं… और देखते ही देखते पर्यटकों से भरा क्रूज पानी में समा गया।अब तक 9 लाशें मिल चुकी हैं, 4 लोग (तीन मासूम सहित) अब भी लापता हैं, और 28 लोगों को जैसे-तैसे बचाया गया।लेकिन सबसे बड़ा सवाल —क्या यह मौतें टाली जा सकती थीं?
“मां ने मौत को भी मात दी… पर सिस्टम हार गया”इस त्रासदी की सबसे दिल दहला देने वाली तस्वीर —दिल्ली से घूमने आई मरीना मैसी…जब रेस्क्यू टीम ने उनका शव निकाला, तो वह अपने चार साल के बेटे त्रिशान को लाइफ जैकेट के अंदर सीने से चिपकाए हुए थीं।
इतनी मजबूती से… कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी।
मां ने आखिरी सांस तक अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की
लेकिन सिस्टम ने दोनों को डूबने दिया यह तस्वीर नहीं, व्यवस्था पर लगा सबसे बड़ा सवाल है।
“टिकट 29… सवार 47! ये पर्यटन है या जुआ?”
प्रशासनिक आंकड़े खुद कहानी बयां कर रहे हैं:
टिकट सिर्फ 29 लोगों की कटी
लेकिन क्रूज में बैठे थे 43 से 47 लोग
यानी, ओवरलोडिंग खुलकर… और चेकिंग गायब!
क्या किसी ने रोका?
क्या किसी ने गिना?
या फिर सबकुछ “चलता है” के भरोसे छोड़ दिया गया?

“लाइफ जैकेट बांटी गई… जब मौत सामने खड़ी थी!”
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस हादसे की असली कहानी बयान कर रहे हैं:
जब क्रूज में पानी भरने लगा, तब जाकर लाइफ जैकेट बांटी गई वो भी बंधी हुई हालत में… घबराहट के बीच यानी,
सुरक्षा पहले नहीं… आखिरी समय का दिखावा थी!
अगर यात्रियों को पहले ही जैकेट पहनाई जाती,
तो शायद आज कई जिंदगियां जिंदा होतीं।

“74 Km/h की हवा… और 20 साल पुराना क्रूज!”
हादसे के वक्त हवा की रफ्तार 74 किलोमीटर प्रति घंटा थी।
और जिस क्रूज पर लोग सवार थे —
वह 2006 में बना यानी लगभग 20 साल पुराना
सवाल सीधा है: क्या इस क्रूज की फिटनेस सही थी?
क्या यह तेज हवाओं को झेलने के काबिल था?
अगर नहीं…तो इसे पानी में उतारना ही जुर्म था।
“पर्यटन विभाग की चुप्पी… सबसे बड़ा अपराध”
Madhya Pradesh Tourism Board के अधीन चल रही इस व्यवस्था पर अब सवालों की बाढ़ है।
एक ही क्रूज ऑपरेट हो रहा था दूसरा पहले से खराब पड़ा है
सुरक्षा इंतजाम कागजों में मजबूत… जमीन पर कमजोर
तो क्या पर्यटन विभाग सिर्फ टिकट बेच रहा था…
या जिंदगियों के साथ जोखिम का कारोबार कर रहा था?

“राहत जारी… लेकिन जिम्मेदार अब भी आज़ाद”
एसडीआरएफ और प्रशासन ने कई लोगों को बचाया,
लेकिन अंधेरा और मौसम राहत कार्य में बाधा बना।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2 लाख घायलों को 50 हजार की सहायता का ऐलान किया मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने जांच के आदेश दिए,पर सवाल वही —
क्या जांच सिर्फ औपचारिकता होगी… या दोषियों पर कार्रवाई भी होगी?
हादसे के बाद प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी जबलपुर पहुंचे हैं।
हादसे में मरीना मैसी और उनके चार साल के बेटे त्रिशान की भी मौत हो गई। बचाव दल को आज सुबह दोनों के शव मिले। मां ने अपनी ही लाइफ जैकेट के भीतर अपने कलेजे के टुकड़े को समेट लिया था। उसने बच्चे को अपने सीने से इतनी मजबूती से चिपकाया था कि काल का क्रूर झोंका भी उन्हें अलग नहीं कर सका।
रेस्क्यू टीम ने जब उन्हें बाहर निकाला, तो दोनों के शव एक-दूसरे को बाहों में जकड़े हुए थे।
यह परिवार दिल्ली से घूमने आया था। हादसे में पिता प्रदीप मैसी और बेटी सिया किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।
वही, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया के ए-3 सेक्शन में कार्यरत कर्मचारी कामराज आर्य परिवार के 15 लोगों के साथ घूमने गए थे। कामराज के माता-पिता भी साथ में थे, लेकिन वे किनारे बैठे हुए थे। कामराज के साथ उनकी पत्नी, भाभी और बच्चे क्रूज में घूमने गए हुए थे।
कामराज मूलतः कर्नाटक के रहने वाले हैं। उनके एक बेटे को बचा लिया गया। वहीं कामराज, उनकी पत्नी और एक बेटा अब भी लापता है।
क्रूज के पायलट महेश ने बताया कि सुरक्षा के इंतजाम तो थे, लेकिन अचानक आए तेज तूफान के चलते क्रूज अनियंत्रित हो गया। किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। महेश को 10 साल का अनुभव है।
पर्यटन विभाग के अधिकारी योगेंद्र रिछारिया ने बताया कि बरगी डैम में फिलहाल एक क्रूज ऑपरेट किया जा रहा है। इसे 2006 में बनाया गया था। इसकी कैपेसिटी 60 यात्रियों की है। एक अन्य क्रूज खराब है।
हादसे में नीतू सोनी (43), निवासी कोतवाली, जबलपुर, सौभाग्यम अलागन (42), निवासी अन्नानगर, वेस्ट तारापुरम, तमिलनाडु, मधुर मैसी (62), निवासी खाजन बस्ती, नई दिल्ली, काकुलाझी पति कामराज (38), निवासी वेस्ट लैंड खमरिया, जबलपुर, रेशमा सैयद (66), निवासी सिविल लाइन, भसीन आर्केड, जैक्सन होटल के पास, जबलपुर, शमीम नकवी (68), निवासी डेरखी, भोपाल, मरीना मैसी पति प्रदीप मैसी (39), निवासी दिल्ली, त्रिशान पिता प्रदीप मैसी (4), निवासी दिल्ली एवं ज्योति सेन, निवासी फूटाताल जबलपुर के शव बरामद हुए हैं।
वही, श्रीतमिल पिता कामराज (5), कामराज पिता श्रीरामालिंगम, विराज सोनी पिता श्रीकृष्णा सोनी (6) एवं मयूरम पिता परिमल (9) अभी भी लापता है जिनकी तलाश जारी है।
“यह हादसा नहीं… सिस्टम का चार्जशीट है”
बरगी डैम में डूबा सिर्फ एक क्रूज नहीं… डूबा है प्रशासन का भरोसा डूबी है सुरक्षा व्यवस्था
और डूब गई है वो जिम्मेदारी, जो हर नागरिक की जान की गारंटी होनी चाहिए
“अब भी नहीं चेते… तो अगला नंबर किसका?”
यह सिर्फ जबलपुर की घटना नहीं है।पूरे मध्यप्रदेश में जहां-जहां क्रूज पर्यटन चल रहा है,वहां हर लहर अब खतरे की चेतावनी बन चुकी है।
अंतिम वार बरगी डैम में आंधी से ज्यादा खतरनाक था सिस्टम का अंधापन।अब देखना है —
सरकार इस त्रासदी से सबक लेती है…
या फिर अगली चीख का इंतजार करती है।

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संजीव पुरोहित

मैं संजीव पुरोहित, शिवपुरी (मध्य प्रदेश) से हूँ और शिवपुरी मेल का चीफ एडिटर हूँ। मेरा उद्देश्य स्थानीय और जनहित से जुड़ी सच्ची, निष्पक्ष व ज़मीनी खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

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