दतिया में BJP की ‘महाबगावत’! टिकट बदलते ही फूटा सियासी ज्वालामुखी, हाईवे बना रणभूमि… संगठन में इस्तीफों का सैलाब

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा तो सड़क पर उतरे समर्थक, 12 किमी तक थम गए पहिए; जिलाध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों और पार्षदों के इस्तीफों से मचा हड़कंप
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित करने का फैसला पार्टी के लिए भारी राजनीतिक तूफान बन गया। जिस सीट पर भाजपा एकजुट होकर चुनावी रण में उतरने की तैयारी कर रही थी, वहीं टिकट की घोषणा के बाद संगठन के भीतर बगावत खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगी।

पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन अंतिम क्षणों में बदले फैसले ने समर्थकों के सब्र का बांध तोड़ दिया। देखते ही देखते दतिया का बाजार बंद होने लगा और फिर हजारों समर्थकों ने झांसी-ग्वालियर हाईवे पर डेरा डाल दिया। विरोध इतना उग्र हुआ कि दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब 12 किलोमीटर तक यातायात ठप हो गया।

पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने रुख पर अड़े रहे। देर रात तक हाईवे पर तनावपूर्ण माहौल बना रहा और पूरा घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया।

भाजपा संगठन में भूचाल, इस्तीफों की झड़ी
टिकट वितरण के विरोध में भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण सहित कई जिला पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए। भाजपा पार्षदों के इस्तीफों की खबरों ने भी संगठन में हलचल बढ़ा दी। कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आने से पार्टी के सामने उपचुनाव से पहले संगठनात्मक चुनौती खड़ी हो गई है।
जिसका नाम चर्चा में नहीं… उसी पर लगा दांव
पूरे चुनावी माहौल में डॉ. नरोत्तम मिश्रा सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। अवधेश नायक और घनश्याम सिंह के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन आशुतोष तिवारी का नाम अंतिम दौर तक प्रमुख दावेदारों में नहीं माना जा रहा था। पार्टी के अंतिम फैसले ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया।

कांग्रेस को भी राहत नहीं
दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को भी दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा। ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने और उपचुनाव प्रक्रिया रोकने की उनकी मांग खारिज कर दी गई। इससे चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है।
दतिया का उपचुनाव अब बना प्रतिष्ठा की जंग
एक तरफ भाजपा के भीतर खुला असंतोष, दूसरी ओर कांग्रेस की कानूनी मुश्किलें—इन घटनाक्रमों ने दतिया उपचुनाव को पूरे मध्यप्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक लड़ाई बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या भाजपा संगठन में उठी नाराजगी को शांत कर पाएगी या यह सियासी तूफान मतदान तक अपना असर बनाए रखेगा।
Live Cricket Info






