धनतेरस आज: सोना-चांदी ही नहीं, इन छोटी चीजों की खरीदारी भी मानी जाती है शुभ; जानिए पूजा का मुहूर्त, धन प्राप्ति के उपाय और क्या करें-

शुक्रवार को धनतेरस का विशेष संयोग, भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की होगी आराधना; शाम को यमदीपदान की परंपरा, जानिए कैसे करें पूजा और किन कामों से घर में आएगी सुख-समृद्धि
शिवपुरी | आज शुक्रवार, 6 नवंबर को देशभर में धनतेरस का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी के साथ पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव का शुभारंभ हो गया है। धनतेरस को केवल सोना-चांदी खरीदने का पर्व समझना अधूरा होगा। यह दिन आरोग्य, धन, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना भी इस दिन विशेष फलदायी मानी जाती है।
शिवपुरी में पूजा का शुभ समय
धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व है। शिवपुरी में सूर्यास्त शाम लगभग 5:35 बजे होगा। शाम 6 बजे के बाद लक्ष्मी-कुबेर पूजन करना शुभ माना जा रहा है। प्रचलित पंचांग गणना के अनुसार शाम लगभग 5:32 से 8:09 बजे तक प्रदोष काल और 6:02 से 7:57 बजे तक वृषभ काल बताया गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। इस दौरान भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव का पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
क्या खरीदें, जिससे घर में आए बरकत?
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए महंगी खरीदारी जरूरी नहीं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार चांदी का सिक्का, पीतल या तांबे के बर्तन, स्टील के बर्तन, मिट्टी के दीपक, झाड़ू और पूजा सामग्री खरीदना भी शुभ माना जाता है। साबुत धनिया और गोमती चक्र को भी लक्ष्मी पूजन में शामिल करने की परंपरा है। मान्यता है कि नई वस्तु खरीदने से घर में शुभता और समृद्धि का प्रवेश होता है। हालांकि खरीदारी के लिए कर्ज लेना या अपनी क्षमता से अधिक खर्च करना उचित नहीं है।
धनतेरस पर ऐसे करें पूजा और ये उपाय
शाम को घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीपक, धूप, पुष्प, अक्षत और मिठाई अर्पित कर आरती करें। भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य और माता लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। कुबेर देव का स्मरण कर धन के सदुपयोग और आर्थिक स्थिरता का संकल्प लें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लक्ष्मी पूजन में साबुत धनिया अर्पित करना, घी का दीपक जलाना और श्रीसूक्त या लक्ष्मी मंत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। शुक्रवार का संबंध ज्योतिष में शुक्र ग्रह से भी माना गया है, जो सुख-सुविधा और ऐश्वर्य का कारक है। इसलिए इस बार शुक्रवार को पड़ रही धनतेरस को विशेष संयोग के रूप में देखा जा रहा है।
यमदीपदान का भी है विशेष महत्व
धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की सुख-रक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना करने की परंपरा है। इसे यमदीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना गया है।
धनतेरस पर इन बातों का रखें ध्यान
परंपरागत मान्यताओं में घर की साफ-सफाई रखने, मुख्य द्वार पर दीपक जलाने और घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। कुछ परिवार लोहे की वस्तुएं और धारदार सामान खरीदने से बचते हैं, हालांकि यह क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा है, कोई सार्वभौमिक धार्मिक निषेध नहीं। अनावश्यक खर्च, दिखावे और उधार से बचना भी जरूरी है।
धनतेरस का असली अर्थ सिर्फ तिजोरी भरना नहीं
इस पर्व का सामाजिक पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण है। बाजार में खरीदारी करते समय स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीपक खरीदें, छोटे दुकानदारों और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करें। किसी जरूरतमंद परिवार के घर दीपक और मिठाई पहुंचाकर उसकी दीपावली भी रोशन करें। आखिर धन का वास्तविक महत्व तभी है, जब उससे अपने परिवार के साथ समाज के दूसरे लोगों के जीवन में भी खुशियां लाई जा सकें।
धनतेरस हमें संदेश देती है कि सोना-चांदी और धन-संपत्ति के साथ स्वस्थ शरीर, परिवार का प्रेम, ईमानदारी की कमाई और मन का संतोष भी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। इस दिन भगवान धन्वंतरि से आरोग्य, माता लक्ष्मी से समृद्धि और कुबेर देव से धन की सद्बुद्धि के साथ रक्षा की प्रार्थना करें।
शिवपुरी मेल की ओर से धनतेरस के पावन पर्व पर सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं।
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