करोड़ों के घोटाले से बेहाल सहकारी बैंक को कलेक्टर अर्पित वर्मा की पहल ने दी ऑक्सीजन! 30 लाख की वसूली से जगी हजारों खाताधारकों की उम्मीद

अपनी जमा पूंजी के लिए सालों से भटक रहे लोगों को कलेक्टर की सख्ती से मिली राहत की नई आस, अब वसूली के साथ खाताधारकों को रकम लौटाने की भी उठी उम्मीद।
शिवपुरी। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शिवपुरी में इन दिनों एक अजीब तस्वीर सामने आ रही है। एक तरफ वर्षों से बैंक में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले और अनियमितताओं के कारण आम खाताधारक अपनी ही जमा पूंजी पाने के लिए बैंक की चौखट पर चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बकायादारों से कर्ज वसूली के लिए प्रशासन ने सख्ती का रुख अपना लिया है।
हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि कुछ खाताधारकों के खातों में लाखों रुपये जमा होने के बावजूद उन्हें जरूरत के मुताबिक अपनी ही रकम नहीं मिल पा रही। पीड़ित खाताधारकों का आरोप है कि बैंक में नकदी की कमी बताकर उन्हें कभी एक हजार रुपये देकर तो कभी दूसरे बहाने से वापस लौटा दिया जाता है। अपनी मेहनत की कमाई के लिए बैंक के चक्कर काटते इन लोगों की परेशानी अब किसी से छिपी नहीं है।
इसी बीच कलेक्टर अर्पित वर्मा की पहल ने बैंक की वसूली व्यवस्था में नई जान फूंकने का काम किया है। उनके मार्गदर्शन और निर्देशों के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शिवपुरी, कोलारस और खनियाधाना शाखाओं से जुड़े ऋणधारकों ने कुल 30 लाख 13 हजार 868 रुपये की बकाया राशि जमा कराई है। बैंक ने ऋणधारकों को सूचना-पत्र जारी कर निर्धारित समय में रकम जमा कराने की प्रक्रिया अपनाई, जिसके बाद यह राशि वसूल हुई।
कोलारस शाखा में ही 6 लाख 98 हजार 120 रुपये जमा हुए। इसके अलावा अन्य ऋणधारकों से भी लाखों रुपये की वसूली हुई। प्रशासन की इस कार्रवाई ने दिखाया है कि यदि बैंक की वसूली व्यवस्था को गंभीरता से संचालित किया जाए तो बकाया रकम वापस लाने की दिशा में ठोस परिणाम मिल सकते हैं।
लेकिन इस पूरी कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा मुद्दा उन हजारों आम खाताधारकों का है, जिनकी जमा पूंजी वर्षों से बैंक में फंसी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। जिन लोगों ने बैंक पर भरोसा करके अपनी जिंदगीभर की कमाई जमा की, आज वही लोग अपनी रकम के लिए परेशान हैं। ऐसे में कर्जदारों से वसूली की तरह खाताधारकों को उनकी जमा पूंजी लौटाने के लिए भी ऐसी ही सख्ती और ठोस कार्ययोजना की जरूरत है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा की पहल ने डूबती उम्मीदों को नई सांस दी है। यदि इसी तरह वसूली अभियान लगातार चलता रहा और बैंक में जमा होने वाली राशि का उपयोग नियमानुसार पीड़ित खाताधारकों को राहत देने में भी किया गया, तो हजारों परिवारों की दुआएं प्रशासन को जरूर मिलेंगी।
अब खाताधारकों की निगाहें कलेक्टर की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। उन्हें सिर्फ वसूली के आंकड़े नहीं, बल्कि अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार है।
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