1956 में जन्मा मध्यप्रदेश, 2000 में हुआ विभाजन, 70 साल में कितनी बदली तस्वीर? जानिए गठन की पूरी कहानी और आज क्या होगा खास

चार प्रशासनिक इकाइयों को मिलाकर बना था प्रदेश, नागपुर से भोपाल तक बदली राजधानी की कहानी; 71वें स्थापना दिवस पर तीन दिन सजेगा राज्योत्सव, 102 विद्यार्थियों को एक-एक लाख और किसानों को मिलेंगे ट्रैक्टर-बुलेट
भोपाल, शिवपुरी । देश के हृदय में बसे मध्यप्रदेश ने आज अपने गठन के 70 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए इस राज्य ने सात दशकों में कई बड़े बदलाव देखे। कभी अलग-अलग रियासतों और प्रशासनिक इकाइयों में बंटा यह क्षेत्र एक राज्य बना, फिर 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के अलग होने से इसका नक्शा बदल गया। आज मध्यप्रदेश 71वें स्थापना दिवस में प्रवेश कर रहा है। राजधानी भोपाल में तीन दिवसीय राज्योत्सव के साथ प्रदेश अपनी ऐतिहासिक यात्रा और विकास की उपलब्धियों का उत्सव मनाएगा।
आखिर क्यों बना था मध्यप्रदेश?
आजादी के बाद देश में रियासतों और अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों को एक व्यवस्था में लाने की प्रक्रिया चल रही थी। मध्य भारत का क्षेत्र भी कई हिस्सों में बंटा हुआ था। प्रशासनिक एकरूपता और बेहतर शासन व्यवस्था के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया।
आयोग की सिफारिशों के आधार पर संसद ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित किया। इसके तहत 1 नवंबर 1956 को नए मध्यप्रदेश का गठन हुआ। इसमें तत्कालीन मध्यप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्य को मिलाया गया। इसके अलावा राजस्थान के कोटा जिले की सिरोंज उपखंड भी मध्यप्रदेश में शामिल की गई।
इस तरह अलग-अलग ऐतिहासिक पहचान वाले क्षेत्रों को मिलाकर नए मध्यप्रदेश की नींव रखी गई।
नागपुर से भोपाल तक, ऐसे बदली राजधानी
एक दिलचस्प ऐतिहासिक तथ्य यह है कि पुराने मध्यप्रदेश की राजधानी नागपुर थी। उस समय विदर्भ भी मध्यप्रदेश का हिस्सा था। 1956 में पुनर्गठन के दौरान विदर्भ महाराष्ट्र में चला गया और नए मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल बनाई गई। तब से भोपाल प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है।
2000 में फिर बदला प्रदेश का नक्शा
मध्यप्रदेश के इतिहास में दूसरा बड़ा बदलाव 1 नवंबर 2000 को हुआ, जब छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया। मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत छत्तीसगढ़ भारत का 26वां राज्य बना। इसके बाद मध्यप्रदेश का क्षेत्रफल घटा और वर्तमान भौगोलिक स्वरूप सामने आया।
गौर करने वाली बात है कि मध्यप्रदेश का गठन और छत्तीसगढ़ का गठन, दोनों 1 नवंबर को ही हुए।
सात दशकों में कितना बदला मध्यप्रदेश?
1956 में गठन के बाद प्रदेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग क्षेत्रों को एक प्रशासनिक व्यवस्था में लाने की थी। समय के साथ नए जिले और संभाग बने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संस्थानों का विस्तार हुआ और सड़क, बिजली, सिंचाई तथा पेयजल परियोजनाओं ने विकास को गति दी।
कृषि में गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों ने प्रदेश की पहचान बनाई। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रीवा जैसे शहर व्यापार, शिक्षा और उद्योग के प्रमुख केंद्र बने। खजुराहो, सांची, भीमबेटका, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों ने प्रदेश को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
हालांकि रोजगार, किसानों की आय, ग्रामीण स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आदिवासी क्षेत्रों का विकास आज भी बड़ी चुनौतियां हैं। यही वे क्षेत्र हैं, जिन पर आने वाले वर्षों में सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी।
आज भोपाल में क्या-क्या होगा खास?
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में 1 से 3 नवंबर तक तीन दिवसीय राज्य स्तरीय राज्योत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है— विरासत से विकास के पथ की ओर अग्रसर प्रदेश’।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज सुबह 11 बजे कृषि प्रदर्शनी, विकास दीर्घा, महिला उद्यमिता मंडप और स्वाद-देशज व्यंजन मेले का उद्घाटन करेंगे।
शाम 6:30 बजे मुख्य समारोह शुरू होगा। इसमें 71 बच्चों द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, पुलिस बैंड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। प्रसिद्ध गायिका मोनाली ठाकुर की संगीत प्रस्तुति भी समारोह का प्रमुख आकर्षण रहेगी।
विद्यार्थियों और किसानों के लिए बड़े पुरस्कार
स्थापना दिवस समारोह में भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति के अंतर्गत 102 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को एक-एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे।
वहीं किसान स्वाभिमान पर्व क्विज के 165 विजेताओं को 55 ट्रैक्टर, 55 बुलेट मोटरसाइकिल और 55 ई-स्कूटर पुरस्कार स्वरूप दिए जाएंगे। कृषि प्रदर्शनी में आधुनिक खेती, जैविक कृषि, सिंचाई तकनीक और कृषि यंत्रों की जानकारी भी मिलेगी।
2 और 3 नवंबर को भी होंगे आयोजन
2 नवंबर को प्रदेश के 20 से अधिक पारंपरिक लोक और जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुतियां होंगी। 3 नवंबर को प्रसिद्ध लोक गायक मामे खान की प्रस्तुति के साथ राज्योत्सव का समापन होगा।
इसके अलावा भोपाल के शौर्य स्मारक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लाई गई मिट्टी से संकल्प वृक्ष का रोपण किया जाएगा। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी स्थापना दिवस के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
अब आगे क्या होगा मध्यप्रदेश का लक्ष्य?
70 वर्षों की यात्रा पूरी करने के बाद प्रदेश के सामने अब विकास को हर गांव और हर नागरिक तक पहुंचाने की चुनौती है। युवाओं के लिए रोजगार, किसानों की आय में वृद्धि, उद्योगों का विस्तार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं तथा आदिवासी अंचलों का विकास आने वाले समय की बड़ी प्राथमिकताएं होंगी।
मध्यप्रदेश के पास कृषि, खनिज, वन, जल संसाधन और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इनका बेहतर उपयोग ही प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
1956 में जिन अलग-अलग क्षेत्रों को मिलाकर मध्यप्रदेश बनाया गया था, आज वही विविधता इसकी सबसे बड़ी पहचान है। सात दशकों में प्रदेश का नक्शा और तस्वीर दोनों बदले हैं। अब जरूरत है कि विकास का अगला अध्याय ऐसा हो, जिसमें राजधानी से लेकर दूरस्थ गांव तक हर नागरिक को बेहतर अवसर और सुविधाएं मिलें।
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
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