“मुझ पर राजनीती का जादू नही चल पाएगा ” — शिवपुरी पहुंचे नए कलेक्टर अर्पित वर्मा के तेवर सख्त, पहले दिन ही दिया साफ संदेश।

शिवपुरी।जिले में नए कलेक्टर के रूप में पदभार संभालते ही अर्पित वर्मा ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं। मीडिया से पहली ही मुलाकात में उन्होंने दो टूक कहा — “अतिक्रमण होगा तो हटेगा, चाहे कोई भी हो… और मुझ पर किसी भी तरह का पॉलिटिकल प्रेशर काम नहीं करता।”
उनके इस बयान ने साफ संकेत दे दिया है कि शिवपुरी में अब प्रशासनिक ढर्रा बदलने वाला है और राजनैतिक प्रेशर की दम पर अतिक्रमण और भ्रस्टाचार करने वाले लोगो मे एक भय नुमा संदेश गया है।
शिवपुरी मे पदभार संभालने आये नबागत कलेक्टर पहुचे पहले ही दिन मंदिर, फिर दिखाया एक्शन मोड।
सोमवार को प्रभार लेने से पहले कलेक्टर वर्मा ने सिद्धेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने कार्यकाल की शुरुआत की। इसके बाद कलेक्ट्रेट पहुंचते ही उन्होंने औपचारिकता से ज्यादा फील्ड और सिस्टम पर फोकस दिखाया।
शाम को आयोजित प्रेस मीट में उन्होंने पत्रकारों से सीधे संवाद कर जिले की जमीनी हकीकत जानी — और यहीं से उनकी कार्यशैली की झलक भी मिल गई।
नबागत कलेक्टर ने स्पष्ट की अब शिवपुरी जिले मे “योजनाएं कागज पर नहीं, जमीन पर दिखेंगी”
कलेक्टर वर्मा ने कहा कि उनकी प्राथमिकता साफ है —
शासन की योजनाएं धरातल पर उतरें
हर पात्र हितग्राही तक वास्तविक लाभ पहुंचे
शहर और गांव दोनों में संतुलित विकास हो
हालांकि यह बयान प्रशासनिक रूप से परिचित जरूर लगा, लेकिन जिस आत्मविश्वास के साथ उन्होंने इसे रखा, उसने संकेत दिया कि इस बार बात सिर्फ कहने तक सीमित नहीं रह सकती।
पत्रकार बार्ता मे नबागत कलेक्टर के साथ हुई शहर की समस्याओं पर खुलकर चर्चा
पत्रकारों ने शहर की बदहाल सड़कों, पानी संकट, सीवर प्रोजेक्ट की अव्यवस्था, तालाबों पर कब्जे और नगरपालिका के अंदरूनी विवाद जैसे मुद्दों को खुलकर सामने रखा।इ
स पर कलेक्टर का जवाब सीधा था —
“हम सब मिलकर शिवपुरी को बेहतर बनाएंगे, आपकी बातों को गंभीरता से लिया जाएगा।”
जिले में अबैध कॉलोनियों और अतिक्रमण पर सख्त रुख
कलेक्टर ने साफ किया कि शहर में विकसित हो रही कॉलोनियों में नियमों का पालन अनिवार्य होगा।
अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई
नागरिक सुविधाओं की सुनिश्चितता
शासकीय जमीन पर कब्जों पर सख्ती
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने में किसी तरह की राजनीतिक बाधा उनके लिए मुद्दा नहीं है।
फिलहाल हमेधा की तरह नए कलेक्टर की आमद के पहले दिन के संकेत बताते हैं कि अर्पित वर्मा उन अफसरों में हैं जो कम बोलते हैं और सीधे काम पर उतरते हैं। कलेक्ट्रेट की शाखाओं का निरीक्षण और सिस्टम को समझने की उनकी शुरुआत बताती है कि वे फाइलों के बजाय जमीन पर ज्यादा फोकस करेंगे।
शिवपुरी की सबसे बड़ी समस्या — जमीनों का गड़बड़झाला — अब उनके रडार पर आ सकता है। खास बात यह है कि इन मामलों में अक्सर राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चा रहती है, लेकिन कलेक्टर के शुरुआती बयान से संकेत है कि इस बार कार्रवाई निष्पक्ष और सख्त हो सकती है।
कुल मिलाकर, शिवपुरी में प्रशासनिक “एक्शन मोड” की शुरुआत हो चुकी है। अब देखना होगा कि यह सख्ती कितनी तेजी से जमीन पर नजर आती है — क्योंकि जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बदलाव देखना चाहती है।
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