“आंगनबाड़ी व्यवस्था में बड़ा सफाया: 2 बर्खास्त, 20 पर कार्रवाई… खनियांधाना में प्रशासन का हंटर”

“पोषण योजनाओं में लापरवाही पड़ी भारी: बंद पड़े केंद्रों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, कई कार्यकर्ता निशाने पर”
खनियांधाना में आंगनबाड़ी व्यवस्था पर चला प्रशासन का डंडा
2 कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त, 20 से अधिक कार्यकर्ता-सहायिकाओं पर गिरी गाज
लापरवाही, अनुपस्थिति और योजनाओं में अनियमितता पर प्रशासन सख्त
शिवपुरी/खनियांधाना। प्रदेश सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के दावों के बीच खनियांधाना क्षेत्र में आंगनबाड़ी व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। लगातार मिल रही शिकायतों और निरीक्षण रिपोर्टों के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 2 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दीं, जबकि 20 से अधिक कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को नोटिस जारी कर मानदेय काटने की कार्रवाई की गई है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर जिला कार्यक्रम अधिकारी डी.एस. जादौन के मार्गदर्शन एवं एसडीएम पिछोर ममता शाक्य के निर्देशन में परियोजना अधिकारी प्रियंका बुनकर द्वारा यह कार्रवाई की गई।

बताया गया है कि निरीक्षण के दौरान कई आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से बंद मिले। कहीं कार्यकर्ता अनुपस्थित थीं तो कहीं बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा था। पोषण ट्रैकर एवं संपर्क एप पर कार्य नहीं करने, रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही, कुपोषित बच्चों के प्रबंधन में उदासीनता तथा मुख्यालय पर निवास नहीं करने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
कार्रवाई के तहत खनियांधाना वार्ड क्रमांक 9 की कार्यकर्ता स्नेहलता यादव एवं सिनावल कला की कार्यकर्ता गीता लोधी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। वहीं 2 अन्य कार्यकर्ताओं को सेवा समाप्ति से पूर्व एक माह का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है।

इसके अलावा गूडर की सुषमा जैन, अमुहाय की कमलेश चौहान, देवीपुरा की रक्षा शर्मा, मजरा धमधोली की वर्षा यादव एवं दीप्ती यादव, रिजोदा की केशकुंवर, ढोंगा की रामवती वंशकार, दुर्गापुर की किरण सोनी, मायापुर की राजकुमारी सेन, कंचनपुर की सुषमा जाटव, मुहारी की गुड्डी केवट, अमरपुर ललन की फूलवती, जेरा की ममता कोली एवं देवखो की बेबी राजा सहित 20 से अधिक कार्यकर्ता-सहायिकाओं का 3 से 15 दिन तक का मानदेय राजसात किया गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में निरीक्षण अभियान और तेज होगा तथा योजनाओं में लापरवाही बरतने वालों पर और सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिन केंद्रों पर महीनों से योजनाएं दम तोड़ रही थीं, वहां जिम्मेदारों की नजर आखिर अब तक क्यों नहीं पड़ी? और क्या यह कार्रवाई केवल शुरुआती चेतावनी है या पूरे जिले में आंगनबाड़ी व्यवस्था की बड़ी सर्जरी की तैयारी?
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