21 जुलाई को पेश होगा मध्यप्रदेश का अनुपूरक बजट, विधानसभा में समान नागरिक संहिता समेत 8 अहम विधेयकों पर होगी निर्णायक बहस

जनहित के 65 से अधिक मुद्दे गूंजेंगे सदन में, सरकार की वित्तीय और विधायी परीक्षा आज
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के जुलाई 2026 सत्र के तहत मंगलवार, 21 जुलाई का दिन सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। विधानसभा की दैनिक कार्यसूची के अनुसार सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी, जिसमें सरकार वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक अनुमान (अनुपूरक बजट) प्रस्तुत करेगी। साथ ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, राजमार्ग संशोधन विधेयक, कार्यस्थल सरलीकरण संहिता, धन्वंतरि स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, उपकर संशोधन तथा वेट संशोधन विधेयक सहित कुल 8 महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित कराने की प्रक्रिया भी चलेगी।
सत्र की शुरुआत प्रश्नकाल से होगी। इसके बाद विभिन्न विभागों के वार्षिक प्रतिवेदन सदन के पटल पर रखे जाएंगे। महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय, ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, उच्च शिक्षा तथा पर्यटन विभागों की रिपोर्टें सदन में प्रस्तुत होंगी।
कार्यसूची के अनुसार नियम 138(1) के तहत सदस्यों द्वारा सरकार का ध्यान विभिन्न जनसमस्याओं की ओर आकर्षित किया जाएगा। वहीं 65 से अधिक याचिकाएं भी सदन में प्रस्तुत की जाएंगी, जिनमें सड़क, पुल, स्कूल, अस्पताल, विद्युत, सिंचाई, खेल मैदान, पेयजल और अन्य विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रदेशभर के स्थानीय विकास के मुद्दे भी विधानसभा में प्रमुखता से उठेंगे।
विधानसभा की विभिन्न समितियों के प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त दो विधायकों को जुलाई सत्र की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति संबंधी प्रस्ताव भी सदन में रखा जाएगा।
राजनीतिक दृष्टि से सबसे अधिक नजरें मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पर रहेंगी। विपक्ष द्वारा इस विधेयक सहित अन्य सरकारी प्रस्तावों पर तीखी बहस की संभावना है, जबकि सरकार इन्हें विकास और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम बताकर पारित कराने की तैयारी में है।
कुल मिलाकर मंगलवार का विधानसभा सत्र केवल औपचारिक कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय प्रबंधन, विधायी सुधार और जनहित के मुद्दों पर सरकार की दिशा और विपक्ष की रणनीति—दोनों की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। यह सत्र प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक एजेंडे के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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