मंदाकिनी का कहर: चित्रकूट में डूब गई आस्था की नगरी, रामघाट का पुल बहा; सड़कों पर नावें, 36 गांव हाई अलर्ट—MP से NDRF की 3 टीमें रवाना

राम की तपोभूमि में नदी का रौद्र रूप, घर-दुकान और धार्मिक स्थल पानी में; गोबरियां में करीब 50 लोगों का रेस्क्यू, SDRF की टीमें मोर्चे पर—प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा
चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी ने शनिवार को ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि रामघाट से लेकर आसपास के इलाकों तक पानी ने जनजीवन की रफ्तार रोक दी। मध्यप्रदेश के सतना क्षेत्र में भारी बारिश और गोरगी बांध से जुड़े हालात के बाद मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और रामघाट, भरतघाट, नयागांव, बरहा, बड़खेड़ा, बाल्हा रइया और गोबरियां समेत कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए। करीब 36 गांव हाई अलर्ट पर रखे गए हैं। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब नौ मीटर ऊपर पहुंचने की रिपोर्ट है और इसे वर्ष 2003 तथा पिछले साल की बाढ़ से भी अधिक गंभीर बताया गया है।

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रामघाट का करीब 300 मीटर लंबा पुल बह गया। जहां रोज श्रद्धालुओं की भीड़, आरती और धार्मिक गतिविधियां दिखाई देती थीं, वहां अब पानी का कब्जा है। घाटों और आसपास के बाजार में पानी भरने से सैकड़ों दुकानें प्रभावित हुई हैं। कई घरों और धार्मिक परिसरों तक पानी पहुंच गया है और कुछ मार्गों पर आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ा है।

मंदाकिनी यहां सिर्फ नदी नहीं, बल्कि रामघाट, मंदिरों, आश्रमों और तीर्थ आस्था की जीवनरेखा है। इसलिए यह संकट घरों और दुकानों तक सीमित नहीं है। बाढ़ ने धार्मिक गतिविधियों के साथ उन परिवारों की रोजी-रोटी पर भी चोट की है जिनका कारोबार श्रद्धालुओं और पर्यटन से जुड़ा है।

हालात बिगड़ते ही राहत-बचाव तंत्र सक्रिय किया गया। सतना में SDRF की टीमें मोर्चे पर हैं, रीवा से अतिरिक्त SDRF बुलाया गया है और जबलपुर से NDRF की तीन टीमें सतना के लिए रवाना की गई हैं। चित्रकूट के गोबरियां क्षेत्र में SDRF की नावों से करीब 50 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू और सुरक्षित निकासी का काम जारी है।

पुलिस भी लगातार निगरानी में जुटी है। ड्रोन कैमरों से जलभराव वाले क्षेत्रों, घाटों, रास्तों और संवेदनशील स्थानों पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन और पुलिस ने स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों से नदी के घाटों, तेज बहाव और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। लाउडस्पीकर के जरिए भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी जा रही है।
बाढ़ ने एक बार फिर यूपी-एमपी के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत सामने ला दी है। नदी सीमा नहीं पहचानती, इसलिए उसका संकट भी प्रशासनिक सीमाओं में नहीं बंट सकता। सतना सांसद गणेश सिंह द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से स्थिति पर चर्चा कर अतिरिक्त सहायता और हेलिकॉप्टर की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं मध्यप्रदेश की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था में अतिरिक्त NDRF और SDRF बल लगाए जा रहे हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी का उफान नया नहीं है। पिछले वर्षों में भी रामघाट और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचता रहा है। इसी अनुभव के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ नियंत्रण, कटाव रोकने और नदी के प्राकृतिक क्षेत्र को चिह्नित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। मई 2026 में करीब 100 वर्ष पुराने बाढ़ रिकॉर्ड के आधार पर मंदाकिनी के फ्लड-प्लेन का सीमांकन कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अब इस बार की बाढ़ उन तैयारियों की भी बड़ी परीक्षा बन गई है।
सवाल इसलिए भी गंभीर है कि हर बड़ी बाढ़ के बाद अगर नए इंतजाम किए जाते हैं, तो क्या नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र और बाढ़ की संभावित सीमा को लेकर जमीन पर उतनी ही सख्ती दिखाई जा रही है? इस बार पानी उतरने के बाद इस सवाल का जवाब तलाशना जरूरी होगा।
फिलहाल प्रशासन के सामने पहली जिम्मेदारी साफ है—हर फंसे व्यक्ति तक पहुंचना, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और किसी को भी बाढ़ के तेज बहाव के बीच जाने से रोकना। पानी उतरने के बाद पेयजल, बिजली, चिकित्सा, सड़क, सफाई और प्रभावित परिवारों के नुकसान का सर्वे दूसरी बड़ी चुनौती होगी।
चित्रकूट की मंदाकिनी आज उफान पर है। राम की तपोभूमि में आरती फिर होगी, घाट फिर सजेंगे और जिंदगी फिर पटरी पर लौटेगी, लेकिन इस बाढ़ ने प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—
अगली बार मंदाकिनी बढ़े तो क्या पानी के साथ खतरा भी बढ़ेगा, या इस बार की तबाही से सबक लेकर ऐसी व्यवस्था तैयार होगी कि नदी उफने, लेकिन जिंदगी न डूबे?
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