आग का कालखंड या ग्रहों का प्रकोप?” बसें जल रहीं, ट्रेनों में धुआं, मशीनें बन रहीं मौत का जाल — क्या अंगारक योग दे रहा विनाश के संकेत? डॉ शची केशरी (ज्योतिषाचार्य)

“धधकती बसें, सुलगती ट्रेनें और सहमा देश — क्या ग्रहों ने दे दिए महाविनाश के संकेत?”
“आग का कालखंड शुरू? मंगल-राहु युति के बीच बढ़ते अग्निकांडों ने खड़े किए डरावने सवाल”

डॉ शची केशरी (सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य टेरो कार्ड रीडर ) से जाने ग्रहो की चाल और अंगारक योग के संकेत।
भोपाल/ देशभर में लगातार बढ़ती आगजनी की घटनाओं ने लोगों के मन में डर, बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
कहीं चलती बस अचानक आग का गोला बन रही है, कहीं ट्रेन के ए.सी. कोच धू-धू कर जल उठते हैं, तो कहीं पेड़ तक अपने आप सुलगते दिखाई दे रहे हैं।
हाल ही में इंदौर–शिवपुरी इंटरसिटी ए.सी. स्लीपर बस में लगी भीषण आग में एक मासूम बालक की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। इसके बाद शिवपुरी–ग्वालियर मार्ग पर बस में आग लगने की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी। वहीं राजधानी एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों के ए.सी. कोचों में आग और धुएं की खबरों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है —
क्या यह केवल तकनीकी लापरवाही है या ग्रहों की कोई भयावह चाल भी सक्रिय है?
सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य शची केसरी के अनुसार वर्तमान ग्रह स्थिति अत्यंत विस्फोटक और अस्थिर मानी जा रही है।
उनका कहना है कि इस समय “मंगल-राहु युति” यानी “अंगारक योग” का प्रभाव गहरा दिखाई दे रहा है, जिसे ज्योतिष में अग्निकांड, विस्फोट, दुर्घटनाओं और अचानक होने वाली त्रासदियों का प्रमुख कारण माना जाता है।

मंगल-राहु युति: जब अग्नि और धुआं मिलते हैं
ज्योतिष शास्त्र में मंगल को अग्नि, मशीनरी, विस्फोट, युद्ध, वाहन दुर्घटना और रक्तपात का ग्रह माना गया है, जबकि राहु धुआं, गैस, भ्रम, तकनीकी खराबी, विषैले प्रभाव और अचानक संकटों का कारक माना जाता है।
जब ये दोनों ग्रह एक साथ आते हैं तो “अंगारक योग” बनता है, जिसे अत्यंत उग्र और अस्थिर योग माना गया है।

मंगल + राहु = अंगारक योग
ज्योतिषाचार्य शची केसरी के अनुसार फरवरी से अप्रैल 2026 तक यह योग अत्यधिक प्रभावी रहा और उसका असर मई तक खिंचता हुआ माना जा रहा है।
इसी दौरान अग्निकांड, वाहन हादसे, इलेक्ट्रॉनिक फेलियर, शॉर्ट सर्किट और अचानक होने वाली घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है।
सूर्य-राहु का ग्रहण प्रभाव भी बढ़ा रहा संकट
मई 2026 में सूर्य और राहु का प्रभाव भी संवेदनशील माना जा रहा है।
सूर्य ऊर्जा, अग्नि, शासन और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि राहु उसके प्रकाश को धूमिल कर भ्रम और असंतुलन पैदा करता है।
सूर्य + राहु = ग्रहण योग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह योग प्रशासनिक लापरवाही, मानसिक अशांति, तकनीकी गड़बड़ी और अचानक संकटों को बढ़ावा दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि छोटी तकनीकी चूक भी बड़े हादसों में बदलती दिखाई दे रही है।
“आग केवल मशीनों में नहीं, ग्रहों में भी धधक रही है”
शची केसरी का कहना है कि वर्तमान समय में अग्नि तत्व अत्यधिक सक्रिय है।
वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, ट्रांसफॉर्मर, ए.सी. यूनिट, बैटरी सिस्टम और ज्वलनशील पदार्थों के उपयोग में विशेष सावधानी की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ सप्ताह तक लापरवाही भारी पड़ सकती है।
ग्रहो की उथल पुथल से होने वाली अनहोनी से बचने के लिए ज्योतिषीय परंपराओं में कुछ आध्यात्मिक उपाय शुभ माने जाते हैं—
मंगलवार को हनुमान पूजा और हनुमान चालीसा पाठ
मंगल मंत्र और राहु शांति का जाप
रविवार को सूर्य को जल अर्पित करना
यात्रा से पहले वाहन की तकनीकी जांच
ए.सी., वायरिंग और गैस सिस्टम की नियमित सर्विसिंग
विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ज्योतिष संभावित ऊर्जा और संकेतों की व्याख्या करता है, यह कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं है।
वास्तविक दुर्घटनाओं के पीछे तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि और प्रशासनिक लापरवाही जैसे कारण भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।
लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने इतना तो जरूर साबित कर दिया है कि चाहे कारण ग्रह हों या व्यवस्था —
आग का यह दौर लोगों के मन में भय की लपटें छोड़ रहा है।
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