फाइलों में दौड़ी सड़क, खेत में हल! RES का 21 लाख का खेल—शिवपुरी में ‘गायब सड़क’ ने खोली पोल”

नवीन खेत सड़क योजना पर सवालों का पहाड़, जांच में खाली ज़मीन—अधिकारियों के दावे और ग्रामीणों की सच्चाई आमने-सामने
शिवपुरी। ग्रामीण विकास के नाम पर सरकारी खजाने की कहानी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शिवपुरी जिले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) की “नवीन खेत सड़क योजना” अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है—और वजह है एक ऐसी सड़क, जो कागज़ों में बनी, पैसे भी निकल गए, लेकिन जमीन पर उसका कोई अस्तित्व नहीं मिला जिला पंचायत सदस्य् अबधेश सिंग को ग्रामीणो द्वारा शिकायत प्राप्त हुई की ग्राम पंचायत रातीकिरार मे 1.80 कि मी लम्बी सडक 2020-21 मे दस्ताबेजो मे स्वीकृत हुई थी जिसकी कुछ राशि भी निकल चुकी है लेकिन मौक़े पर वाह सडक मौजूद ही नाही है इस ओर उन्होंने बरिष्ठ बिभागीय अधिकारी से शिकायत कि तो एक जांच दल बनाकर गाम पंचायत मे भेजा गया जांच के दिउरान ग्रामीणो ने बताया की यह सड़क मौक़े पर् है ही नही बिभागीय अधिकारी जिस सड़क डालने का दाबा कर रहा है वह मौक़े पर है ही नहीं अब एक तरफ बिभाग अपनी तरफ से सडक डालने की बात कह रहा है और इसके वीडो फोटो भी बता रहा है वाही दूसरी तरफ ग्रामीन इस बात को माने से इंकार कर रहे है अब बिभाग होने स्तर पर संबंधित सडक के पुख्ता दस्ताबेज निकलबा रहा है केकिन फिलहॉल यह मामला सोसल मीडिया पर बायरल होकर काफी सुर्खिया बटोर रहा है चुकी आर ई एस बिभाग घोटाले को लेकर ओूर्व मे भी सोसल मीडिया कि सुर्खियों मे रह चुका है इसलिए एक तरफ लोग इस मामाके को भी हकीकत मानकर चर्चाए कर रहे है अब देखना होगा कि बिभाग इस गुप्त हुई सड़क के संबंधित पुख्ता दस्ताबेज निकालकर शिकायतकरता और ग्रामीणो को संतुष्ट करने मे सफलता हसील कर पाता है या नहीं या फिर यह मामला युही सोसल मीडिया कि सुर्खियों मे बायरल होकर बिभाग कि छवि को धूमिल करता रहेगा।
योजना में ‘सड़क’ या सिर्फ कागज़ी खेल?
मामला वर्ष 2020-21 का है, जब ग्राम पंचायत रातीकिरार में 1.80 किमी लंबी सड़क स्वीकृत हुई थी।यह सड़क रामचरण धाकड़ के खेत से पूरन धाकड़ के खेत तक बननी थी, जिसमें तीन पुलिया भी शामिल थीं।
कुल लागत: 40.91 लाख रुपए
भुगतान: 21 लाख रुपए जारी
हकीकत: मौके पर सड़क गायब
जांच टीम पहुंची… और सामने आया बायरल ‘सच’
शिकायत मिलने पर जब RES के एसडीओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे, तो जो तस्वीर सामने आई वह चौंकाने वाली थी—
सड़क की जगह जुते हुए खेत ग्रामीणों का साफ बयान—
“यहां कभी कोई सड़क नहीं बनी”यह दृश्य ही पूरे मामले की गंभीरता बताने के लिए काफी था।
वीडियो से बचाव या नया विवाद?
मामले को और पेचीदा बना दिया अधिकारियों के उस दावे ने, जिसमें सड़क निर्माण का वीडियो होने की बात कही गई।
बायरल मामले मे आरोप यह भी लग रहे है कि जांच के दौरान किसी दूसरी जगह की सड़क का वीडियो दिखाकर मामले को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है क्या वीडियो सच है या सच्चाई को छिपाने का जरिया?
अधिकारियों और शिकायतकर्ता के बयान
RES के एई का पक्ष:
“यह सड़क मेरे कार्यकाल की नहीं है। बिना दस्तावेज देखे कुछ कहना सही नहीं होगा, हम पूरे रिकॉर्ड निकलवा रहे हैं बिना पुख्ता दस्ताबेज निकलवाए हम कुछ भी कहने की स्थिति मे नहीं है।”
वही जिला पंचायत सदस्य अवधेश सिंह का कहना है कि:
“ग्रामीणों से जानकारी मिली थी, इसलिए शिकायत की गयी और जांच टीम गठित कर ग्राम ओंचायत मे भेजी गयी जांच में सड़क नहीं मिली मौक़े पर उपस्थित ग्रामीणो ने भी सड़क न होने कि पुष्ठी की है अब मे भी होने स्तर से इस सड़क के दस्तावेज निकलबा रहा हू।”
सच क्या है—जमीन या कागज़?
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है। एक तरफ ग्रामीणों का दावा है कि सड़क कभी बनी ही नहीं, तो दूसरी तरफ विभाग कागज़ों और वीडियो के आधार पर निर्माण होने की बात कह रहा है।
पहले भी विवादों में रहा है विभाग
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) पहले भी कई निर्माण कार्यों और योजनाओं में अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में रह चुका है।
ऐसे में यह मामला विभाग के लिए “गले की हड्डी” बनता जा रहा है।
सोसल मीडिया पर बायरल इस मामले को लेकर आमजन कि निगाह अब इसकी बिभागीय जांच पर टिकी हुई है।
क्या दस्तावेज सच्चाई उजागर करेंगे? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
शिवपुरी की यह “गायब सड़क” सिर्फ एक योजना का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
अब सबकी नजर जांच पर टिकी है—क्योंकि सच्चाई चाहे खेत में हो या फाइलों में, सामने आना तय है।
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