राखी का धागा कितना शक्तिशाली? सावन पूर्णिमा पर बन रहा खास संयोग, जानिए भाई-बहन के लिए कौन-से उपाय माने जाते हैं शुभ

विशेष खबर | सावन की पूर्णिमा आते ही बाजारों में राखियों की चमक बढ़ जाती है और घरों में बहन के मायके पहुंचने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन रक्षाबंधन केवल मिठाई, उपहार और कलाई पर बंधने वाली राखी का त्योहार नहीं है। इसके पीछे सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा, रक्षा-सूत्र की मान्यता और भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का सामाजिक संदेश जुड़ा है। इस बार 28 अगस्त, शुक्रवार को रक्षाबंधन मनाया जाएगा और भोपाल सहित मध्यप्रदेश के लिए सुबह का समय राखी बांधने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बार कब बांधें राखी?
पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे शुरू हुई और 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। भोपाल के लिए रक्षा-सूत्र बांधने का मुहूर्त सुबह 6:01 बजे से 9:48 बजे तक दिया गया है। भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी है, इसलिए सुबह राखी बांधने को लेकर भद्रा की बाधा नहीं रहेगी।
यानी जो परिवार सुबह राखी बांधना चाहते हैं, उनके लिए यह समय सबसे सुविधाजनक और पंचांगानुसार शुभ माना जा रहा है। स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट का अंतर संभव है।
राखी आखिर शुरू कैसे हुई?
रक्षाबंधन की कोई एक निश्चित ऐतिहासिक शुरुआत बताना आसान नहीं है। प्राचीन परंपरा में सावन पूर्णिमा पर रक्षा-सूत्र बांधने की धार्मिक प्रथा मिलती है। बाद में यही परंपरा भाई-बहन के रिश्ते से गहराई से जुड़ती चली गई।
धार्मिक कथाओं में इंद्राणी द्वारा इंद्र को रक्षा-सूत्र बांधने और कृष्ण-द्रौपदी के प्रसंग को प्रमुखता से याद किया जाता है। इन कथाओं का ऐतिहासिक स्वरूप अलग-अलग माना जाता है, लेकिन इनके केंद्र में एक ही भाव है—संकट के समय रक्षा, विश्वास और साथ।
राखी बांधते समय भाई किस दिशा में बैठे?
धार्मिक परंपरा के अनुसार भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाना शुभ माना जाता है। बहन तिलक, अक्षत और आरती के बाद दाहिनी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधती है। राखी बांधते समय प्रचलित मंत्र—
“येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
का उच्चारण किया जाता है।
भाई-बहन इस दिन कौन-से उपाय कर सकते हैं?
ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में रक्षाबंधन को शुभ संकल्प और दान का दिन माना गया है। मान्यता के अनुसार—
भाई-बहन साथ मिलकर भगवान गणेश या अपने इष्टदेव की पूजा करें।
बहन राखी बांधते समय भाई की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करे।
भाई बहन को केवल उपहार देने के बजाय सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प ले।
जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है।
घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना पर्व की धार्मिक भावना को और मजबूत करता है।
भाई-बहन के बीच यदि लंबे समय से मनमुटाव है तो इस दिन बातचीत कर उसे समाप्त करना भी इस पर्व का सबसे बड़ा “उपाय” माना जा सकता है।
राशि के हिसाब से क्या करें?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन पर अपनी राशि से संबंधित देवता का स्मरण और दान करना शुभ माना जाता है। हालांकि यह सामान्य ज्योतिषीय उपाय हैं; व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर उपाय अलग हो सकते हैं।
मेष और वृश्चिक: हनुमानजी का स्मरण करें और जरूरतमंद को लाल वस्तु या गुड़ का दान करें।
वृषभ और तुला: लक्ष्मीजी का पूजन करें तथा सफेद वस्तु या मिठाई का दान करें।
मिथुन और कन्या: गणेशजी की पूजा करें और हरी वस्तु का दान करना शुभ माना जाता है।
कर्क: शिव-पार्वती का स्मरण कर दूध या चावल का दान करें।
सिंह: सूर्यदेव को जल अर्पित कर गुड़ का दान करें।
धनु और मीन: भगवान विष्णु का स्मरण कर पीली वस्तु या अन्न का दान करें।
मकर और कुंभ: जरूरतमंद को काला तिल, कंबल अथवा अन्न दान करने की परंपरा मानी जाती है।
इन उपायों को धार्मिक-ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए, किसी निश्चित फल की गारंटी के रूप में नहीं।
चंद्रग्रहण भी उसी दिन, फिर क्या राखी पर असर पड़ेगा?
इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण का संयोग भी चर्चा में है। उपलब्ध खगोलीय जानकारी के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसके आधार पर सूतक मानने की आवश्यकता नहीं बताई जा रही है। फिर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में ग्रहण संबंधी नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए राखी के समय को लेकर सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि अपने स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दी जाए।
सबसे बड़ा उपाय—रिश्ते में आई दूरी मिटाना
रक्षाबंधन की सबसे खूबसूरत बात शायद कोई मंत्र या ज्योतिषीय उपाय नहीं, बल्कि उसका सामाजिक संदेश है। आज भाई-बहन अलग-अलग शहरों और देशों में रहते हैं, मुलाकातें कम होती हैं और कई बार छोटी-छोटी बातों से रिश्तों में दूरी आ जाती है।
ऐसे में राखी का एक धागा दोनों को फिर एक जगह ला खड़ा करता है।
कलाई पर बंधने वाली राखी कुछ दिनों में कमजोर पड़ सकती है, लेकिन उसके पीछे लिया गया भरोसे का संकल्प मजबूत रहे तो रिश्ता उम्रभर कायम रहता है।
इसलिए इस रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर सिर्फ राखी न बांधे—अपना विश्वास बांधे। भाई सिर्फ उपहार न दे—बहन के सम्मान और साथ का वचन दे।
क्योंकि राखी का असली अर्थ कलाई पर बंधा धागा नहीं, वह रिश्ता है जो मुश्किल वक्त में भी टूटने से इनकार कर देता है।
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