सिकंदरा बैरियर पर ‘वसूली गैंग’ का राज: पैसे नहीं दिए तो बरसी लाठियां, NH-27 पर फूटा गुस्सा

- सिकंदरा बैरियर अब कानून का चेक पोस्ट नहीं, बल्कि ‘वसूली का टोल प्लाजा’ बन चुका है?
शिवपुरी। दिनारा थाना क्षेत्र का सिकंदरा बैरियर एक बार फिर ‘उगाही और उत्पात’ का अड्डा बन गया है। बीती रात यहां जो हुआ, उसने सिस्टम की हकीकत को फिर बेनकाब कर दिया। यात्रियों से भरी बस और ट्रेवलर को बीच सड़क रोककर दबंगों ने खुलेआम गुंडागर्दी की—पैसे मांगे, इंकार हुआ तो ड्राइवरों पर टूट पड़े, और जब यात्रियों ने विरोध किया तो उन्हें भी नहीं छोड़ा।
रात 1:30 बजे ‘वसूली का खेल’, इंकार पर बर्बरता
राजस्थान से श्रद्धालुओं को लेकर लौट रही बस जैसे ही देर रात सिकंदरा बैरियर पहुंची, वहां पहले से मौजूद कथित ‘वसूली गैंग’ ने वाहन को घेर लिया। ड्राइवर लाखाराम से 2 हजार रुपए मांगे गए। जैसे ही उसने विरोध किया, उस पर लात-घूंसों की बारिश कर दी गई।
इतना ही नहीं, नेपाल से लौट रही एक ट्रेवलर को भी निशाना बनाया गया—ड्राइवर के साथ मारपीट और यात्रियों के साथ बदसलूकी ने माहौल को और भड़का दिया।
हाईवे बना रणभूमि, श्रद्धालुओं ने किया चक्का जाम
दबंगई से तिलमिलाए यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। NH-27 पर चक्का जाम कर दिया गया। देर रात तक हाईवे जाम रहा—लंबी कतारें, फंसे वाहन और अफरा-तफरी का माहौल।
सूचना मिलते ही एसडीओपी आयुष जाखड़ पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत और समझाइश के बाद जाम खुल सका, लेकिन बैरियर पर मौजूद लोगों और यात्रियों के बीच तीखी बहस ने हालात को तनावपूर्ण बनाए रखा।
‘एक लाख में निपटा लो मामला’—सौदेबाजी का सनसनीखेज आरोप
स्थानीय सूत्रों ने चौंकाने वाला दावा किया है—मारपीट के बाद मामला दबाने के लिए एक लाख रुपए में ‘सेटिंग’ की पेशकश की गई!
अगर यह सच है, तो सवाल सिर्फ गुंडागर्दी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले सड़ांध का है।
बसूली गेंग पर FIR दर्ज, लेकिन फिर भी खुलेआम बसूली पर सवाल कायम
दिनारा थाना पुलिस ने चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पहचान के प्रयास जारी हैं।
दूसरी ओर, हाईवे जाम करने वाले यात्रियों पर भी कार्रवाई की तैयारी की बात सामने आ रही है—यानी पीड़ित ही अब कठघरे में?
बीते दिवस पहले भी हो चुका हाई चेकपोस्ट अर जबरदस्त बवाल
यह कोई पहली घटना नहीं है। 8-9 अप्रैल की रात भी इसी बैरियर पर महिला टीएसआई के साथ मारपीट और छेड़छाड़ हुई थी। उस मामले में 8 आरोपी जेल भेजे गए थे।
फिर सवाल उठता है—क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?
हाइबे पर लूट का खुला वाही सिस्टम चेक पोस्ट पर, ‘प्राइवेट कटरों’ का धड़ल्ले से कब्जा
सूत्रों के मुताबिक, बैरियर पर जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी न के बराबर है। नतीजा—पूरा नियंत्रण कथित प्राइवेट कटरों और दलालों के हाथ में।
यहां नियम नहीं चलते, यहां ‘रेट’ चलता है… और जो नहीं दे, उसके लिए लाठी तैयार है।
जब सड़क पर चलना ही खतरे से खाली न हो, तो सिस्टम पर भरोसा कैसे किया जाए?
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