“ताले में बंद स्कूल, जिम्मेदारी से भागता सिस्टम: डीईओ की नाकामी ने खोल दी शिक्षा विभाग की हकीकत”

कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली पोल — निगरानी फेल, बच्चों का भविष्य दांव पर
शिवपुरी/ जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। तहसील शिवपुरी के ग्राम खोरघार में कलेक्टर अर्पित वर्मा जब औचक निरीक्षण पर पहुंचे, तो सरकारी स्कूल पर लटका ताला पूरे सिस्टम पर सवाल बनकर सामने आ गया। यह सिर्फ एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि उस ढीली निगरानी का नतीजा है, जिसकी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी पर है।
पूर्व मे रहे कलेक्टर के आशीर्वाद से जिला शिक्षा अधिकारी की पूरे जिले मे मनमानी चलती रही है क्युकी जैसा की सुनने मे आता रहा है की जिला शिक्षा अधिकारी कलेक्टर साहब के सबसे चहेते अधिकारियों मे गिने जाते थे जिले के ऐसे कई गंभीर मामले रहे जिनमे जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली सुस्त रही अब नबीन कलेक्टर अर्पित वर्मा की औचक नीरीक्षण की कार्यप्तनाली को देखते हुए लग था है की पिछले दो टीन बर्षो से पत्री से उतरी हुई जिले की शिक्षा व्यबस्था पत्री पर आ जायेगी
सबसे गंभीर सवाल यही है कि आखिर शिक्षा विभाग की नियमित मॉनिटरिंग कहां गायब है? जब कलेक्टर के पहुंचने पर स्कूल बंद मिलता है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि सामान्य दिनों में हालात कितने बदतर होंगे। बच्चों की पढ़ाई, उनका भविष्य—सब कुछ लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यशैली अब सीधे निशाने पर है। क्या उन्हें जमीनी स्थिति की जानकारी नहीं, या फिर जानकर भी अनदेखी की जा रही है? सवाल कड़े हैं और जवाब अब टाले नहीं जा सकते।
हालांकि कलेक्टर अर्पित वर्मा की सख्ती ने शिक्षा विभाग में हलचल जरूर पैदा की है। अगर इसी तरह लगातार कार्रवाई जारी रही, तो शिक्षकों की उपस्थिति सुधरेगी, स्कूल समय पर खुलेंगे और पढ़ाई पटरी पर लौट सकती है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि ऐसी सख्ती अक्सर कुछ समय बाद ठंडी पड़ जाती है।
अब असली परीक्षा प्रशासन की है—क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद फाइलों में दबकर रह जाएगा? जिले के अभिभावकों और छात्रों की नजरें अब इसी जवाब पर टिकी हैं।
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