बच्चों के स्वास्थ्य पर कलेक्टर का ‘स्ट्राइक मोड’— 14 जुलाई से दस्तक अभियान, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई

“टीम भावना से करें काम, तभी मिलेगा शत-प्रतिशत लक्ष्य”; बैठक से गायब मिले आरबीएसके प्रभारी को नोटिस के निर्देश
शिवपुरी। जिले के मासूम बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े सबसे बड़े अभियान ‘दस्तक’ को लेकर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने शनिवार को सख्त तेवर दिखाए। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 14 जुलाई से 31 अगस्त तक चलने वाले अभियान में किसी भी अधिकारी-कर्मचारी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। लक्ष्य केवल अभियान चलाना नहीं, बल्कि जिले के हर पात्र बच्चे तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम, जिंक-ओआरएस और आयरन सिरप का होगा वितरण
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगी। जरूरतमंद बच्चों को जिंक की गोलियां, ओआरएस के पैकेट तथा पांच वर्ष तक के बच्चों को आयरन सिरप उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही अभियान से जुड़े सभी रिकॉर्ड और आंकड़ों का अगले दो दिनों में शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
एनीमिया के खिलाफ सख्त अभियान, हर मंगलवार स्कूलों में अनिवार्य होगी आयरन डोज
एनीमिया मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक मंगलवार कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को गुलाबी आयरन गोली और कक्षा 6 से 9 तक के विद्यार्थियों को नीली आयरन गोली अनिवार्य रूप से खिलाई जाए। इसके पालन की निगरानी के लिए संबंधित अधिकारियों को स्कूलों और आंगनबाड़ियों का नियमित औचक निरीक्षण करने तथा मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
आयुष्मान, टीकाकरण, एएनसी और टीबी मुक्त भारत अभियान पर भी कड़ी समीक्षा
बैठक में नियमित टीकाकरण, आयुष्मान कार्ड निर्माण, गर्भवती महिलाओं के एएनसी पंजीयन, सीएम हेल्पलाइन के लंबित मामलों और टीबी मुक्त भारत अभियान की भी विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी लक्ष्यों को तय समय में पूरा करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक से गैरहाजिर मिले आरबीएसके प्रभारी, ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने के निर्देश
बैठक के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के प्रभारी राजेंद्र शर्मा के अनुपस्थित मिलने पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने तत्काल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
संदेश साफ— बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कहा कि दस्तक अभियान तभी सफल होगा, जब सभी विभाग एक टीम की तरह काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लक्ष्य केवल आंकड़े पूरे करना नहीं, बल्कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाना है।
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