अतिक्रमण माफियाओं पर एसडीएम की सख्ती बनी वजह? कूटरचित ऑडियो से एफआईआर के पीछे साजिश का आरोप, प्रशासनिक सेवा संघ उतरा मैदान में

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष, स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच की मांग; बोले—बिना ठोस साक्ष्य अधिकारी की छवि धूमिल करना न्यायोचित नहीं
शिवपुरी। पोहरी एसडीएम जेपी गुप्ता के विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में दर्ज एफआईआर ने अब प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की जिला इकाई शिवपुरी ने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष, स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच की मांग की है।
संघ का कहना है कि एसडीएम जेपी गुप्ता ने 12 जून को ही पोहरी में पदभार ग्रहण किया था, जबकि जिस अभिलेख दुरुस्ती प्रकरण का हवाला एफआईआर में दिया गया है, वह 15 जून को पहली बार उनके न्यायालय में प्रस्तुत हुआ। मामले में आवेदक बाबू सिंह राजपूत को 6 जुलाई को प्रथम सुनवाई के लिए तलब किया गया था और तब तक एसडीएम द्वारा कोई अंतिम आदेश पारित ही नहीं किया गया था। ऐसे में बिना न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुए एफआईआर दर्ज होने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता गोविंद शिवहरे का संबंधित प्रकरण से न तो कोई प्रत्यक्ष सरोकार है और न ही वह मामले का पक्षकार है। ऐसी स्थिति में उसकी शिकायत के आधार पर दर्ज प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।
प्रशासनिक सेवा संघ ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि हाल के दिनों में एसडीएम जेपी गुप्ता द्वारा शासकीय भूमि तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमणों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। संघ का आरोप है कि इन कार्रवाइयों से प्रभावित कथित भूमाफियाओं एवं स्वार्थी तत्वों ने दुर्भावनावश कूटरचित ऑडियो और फर्जी शिकायत के माध्यम से अधिकारी को विवादों में घसीटने का प्रयास किया है।
संघ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी अधिकारी पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, लेकिन उतना ही जरूरी यह भी है कि अपुष्ट और संदिग्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी ईमानदार अधिकारी की प्रतिष्ठा और मनोबल को ठेस न पहुंचे। इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक जांच कराकर सत्य को सार्वजनिक किया जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारियों सहित जिले के अनेक प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस संवेदनशील प्रकरण में जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।
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