खनियाधाना में विकास का नया दांव: 4.50 करोड़ का निवेश, अब फाइलों से बाहर निकलने की बारी

कलेक्टर अर्पित वर्मा ने उद्यमियों से सीधा संवाद कर सुनी समस्याएं; बिजली और सुविधाओं पर सख्ती, युवाओं को 6.68 लाख के ऋण प्रमाण पत्र
शिवपुरी। खनियाधाना में ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान-2026’ के तहत हुआ ‘उद्यम संवाद’ सिर्फ भाषणों और तस्वीरों तक सीमित नहीं रहा। अम्बेडकर भवन में संभागायुक्त मनोज खत्री की मौजूदगी में कलेक्टर अर्पित वर्मा ने उद्यमियों और उद्योग लगाने के इच्छुक युवाओं से सीधा संवाद किया और साफ संदेश दिया कि उद्योगों को कागजी दफ्तरों में उलझाकर विकास की रफ्तार नहीं रोकी जा सकती। बिजली से लेकर जरूरी मूलभूत सुविधाओं तक की समस्याओं को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए और नए उद्यमियों को यूनिट स्थापित करने तक प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया गया।
खनियाधाना के लिए सबसे बड़ी खबर यह रही कि उद्यमियों ने क्षेत्र में 4 करोड़ 50 लाख रुपए के नए एवं भावी निवेश प्रस्ताव रखे। एम-सैंड प्लांट के लिए 2 करोड़, कृषि उपकरण निर्माण के लिए 1 करोड़, ऑयल मिल एवं मूंगफली दाना निर्माण के लिए 50 लाख, ऑयल मिल के लिए 50 लाख तथा स्टील फैब्रिकेशन एवं एग्रो इंडस्ट्रीज के लिए 50 लाख रुपए के प्रस्ताव सामने आए। इन प्रस्तावों की कुल रकम 4.50 करोड़ है और इनके धरातल पर उतरने से स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा कारोबार के नए अवसर बनने की संभावना है।

लेकिन इस कार्यक्रम की असली धार सिर्फ निवेश प्रस्तावों में नहीं, बल्कि उस सवाल में है जो अब इन प्रस्तावों के साथ खड़ा हो गया है—क्या 4.50 करोड़ की घोषणाएं वास्तव में उद्योग बनेंगी या हमेशा की तरह फाइलों और प्रस्तावों तक सीमित रह जाएंगी? उद्यमियों ने निवेश की इच्छा दिखाई है, अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि अनुमति, बिजली, भूमि, कनेक्शन और दूसरी प्रक्रियाओं की उलझनों को समय पर दूर कर इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारे।
इसी दौरान मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत चार युवाओं को कुल 6 लाख 68 हजार रुपए के ऋण स्वीकृति प्रमाण पत्र दिए गए। धर्मेंद्र केवट को कियोस्क के लिए 73 हजार, अरुण कुमार झा को वेल्डिंग शॉप के लिए 3.20 लाख, राहुल देव जोशी को कियोस्क के लिए 75 हजार और ब्रजेश कुमार साहू को किराना कारोबार के लिए 2 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया। रकम भले छोटी हो, लेकिन छोटे कारोबार शुरू करने वाले युवाओं के लिए यही पूंजी आत्मनिर्भरता की पहली सीढ़ी बन सकती है।
कार्यक्रम में क्षेत्र के स्थापित उद्यमियों ने भी सहभागिता की और अपने कारोबार व निवेश की जानकारी साझा की। इससे यह संकेत जरूर मिला कि खनियाधाना में स्थानीय स्तर पर व्यापार और उद्योग की संभावनाएं मौजूद हैं, जरूरत सिर्फ उन्हें लालफीताशाही, सुविधाओं की कमी और अनावश्यक देरी से बाहर निकालने की है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अधिकारियों को बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि नया उद्योग लगाने वाले युवाओं को कागजी प्रक्रिया से लेकर यूनिट स्थापित होने तक प्रशासनिक सहयोग दिया जाएगा। यह आश्वासन अब इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उद्यमी पैसा लगाने को तैयार हैं, लेकिन व्यवस्था को भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी होगी।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ विजय राज, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक अजय तिवारी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, व्यापारी और नागरिक मौजूद रहे।
खनियाधाना में अब गेंद प्रशासन के पाले में है। 4.50 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आ चुके हैं, युवाओं को ऋण मिल चुका है और उद्यमियों ने आगे बढ़ने की इच्छा जता दी है। अब जरूरत मंच से आगे बढ़कर मशीनों की आवाज सुनाने की है। अगर प्रस्ताव जमीन पर उतरते हैं तो खनियाधाना की तस्वीर बदल सकती है; अगर फाइलों में दब गए तो ‘उद्यम संवाद’ भी उन सरकारी कार्यक्रमों की सूची में जुड़ जाएगा, जिनमें संवाद तो खूब हुआ, लेकिन धरातल पर बदलाव नहीं आया।
Live Cricket Info








