बच्चों की जान से खिलवाड़ नहीं चलेगा”—कलेक्टर अर्पित वर्मा का शिक्षा विभाग पर बड़ा एक्शन

जर्जर स्कूल भवनों पर सख्ती, एक सप्ताह में मांगी पूरी रिपोर्ट; बीईओ-बीआरसीसी को चेतावनी, लक्ष्य पूरे नहीं हुए तो तय होगी जवाबदेही
शिवपुरी। शिक्षा व्यवस्था को लेकर अब जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में संदेश दे दिया कि बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई काम नहीं है और जर्जर भवनों में स्कूल संचालित करने की लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान कलेक्टर ने विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) और विकासखंड स्रोत समन्वयकों (बीआरसीसी) को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिले के प्रत्येक शाला भवन का तत्काल भौतिक सत्यापन किया जाए। जहां भी भवन खतरनाक या जर्जर स्थिति में मिले, वहां बिना देर किए शैक्षणिक गतिविधियां बंद कर विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया जाए।

एक सप्ताह की मोहलत, अब सामने आएगी स्कूल भवनों की असली तस्वीर
कलेक्टर ने सभी बीआरसीसी को सिर्फ एक सप्ताह का समय देते हुए जिले के सभी जर्जर शाला भवनों की अद्यतन सूची जिला कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि निरीक्षण में लापरवाही, गलत जानकारी या रिपोर्ट छिपाने की कोशिश किसी भी अधिकारी के लिए महंगी साबित हो सकती है।
नामांकन से लेकर छात्र डेटा तक हर बिंदु पर हुई सर्जिकल समीक्षा
बैठक में कक्षा 1 से 12 तक के नामांकन, कक्षा 5 से 6 एवं 8 से 9 के ट्रांजिशन, अपार आईडी निर्माण और यू-डाइस प्रोग्रेशन की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विद्यार्थी का रिकॉर्ड शत-प्रतिशत अपडेट किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी न हो।
किताबों में देरी नहीं, हर बच्चे तक समय पर पहुंचे पाठ्य-पुस्तक
‘उल्लास नव भारत’ अभियान, एफएलएन मेंटरिंग और चाइल्ड ट्रैकिंग की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकों का वितरण निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। किसी भी बच्चे की पढ़ाई केवल प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
सीएम हेल्पलाइन पर भी सख्त तेवर
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों को फाइलों में दबाकर रखने की प्रवृत्ति अब स्वीकार नहीं होगी।
स्कूलों में होगा लगातार निरीक्षण, जवाबदेही होगी तय
बैठक के अंत में कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शासन की सभी योजनाओं का समय पर लाभ मिले। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि तय समय-सीमा में लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
शिवपुरी मेल की नजर
शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक से साफ संकेत मिल गया है कि जिला प्रशासन अब केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम चाहता है। आने वाला एक सप्ताह यह तय करेगा कि जिले के कितने स्कूल सुरक्षित हैं और कितनी जगहों पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।
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