अब घर-घर पहुंचेगा पशुपालन विभाग, 13 जुलाई से शुरू होगा ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’

5.72 लाख पशुपालकों तक सीधी पहुंच का लक्ष्य, नस्ल सुधार से लेकर टीकाकरण और सेक्स सॉर्टेड सीमेन तक मिलेगी वैज्ञानिक सलाह
शिवपुरी। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की सरकारी कवायद अब कागजों से निकलकर सीधे पशुपालकों के आंगन तक पहुंचने जा रही है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग 13 जुलाई से “दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान” के तीसरे चरण की शुरुआत करेगा। इस अभियान के तहत विभागीय अधिकारी और कर्मचारी गांव-गांव, घर-घर जाकर पशुपालकों से सीधे संवाद करेंगे और आधुनिक पशुपालन की नई तकनीकों की जानकारी देंगे।
सरकार ने इस चरण में उन पशुपालकों को प्राथमिकता दी है जिनके पास तीन से चार गौवंश अथवा भैंसवंश हैं। प्रशिक्षित अमला उनके घर पहुंचकर पशुओं की नस्ल सुधार, संतुलित पोषण, समय पर टीकाकरण, रोगों की रोकथाम तथा सेक्स सॉर्टेड सीमेन जैसी आधुनिक तकनीकों की विस्तार से जानकारी देगा। उद्देश्य साफ है—कम लागत में अधिक दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी।
राज्यभर में इस अभियान के तहत 5 लाख 72 हजार पशुपालकों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है। अभियान छह दिनों तक चलेगा, जबकि आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि नौ दिन तक बढ़ाई जा सकेगी। अभियान के दौरान मैदानी अमले की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी राज्य स्तर पर प्रशिक्षित नोडल अधिकारियों को सौंपी गई है।
हर गांव पर नजर, हर पशुपालक तक पहुंचने की तैयारी
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर दी है। प्रत्येक अधिकारी को अपने क्षेत्र के कम से कम 5 प्रतिशत पशुपालकों और 10 गांवों का सत्यापन एवं मूल्यांकन करना अनिवार्य होगा। वहीं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी, जिला पशु प्रजनन कार्यक्रम अधिकारी, राज्य स्तरीय जिला नोडल अधिकारी तथा सभी पशु चिकित्सक अभियान की सतत निगरानी करेंगे।
जनप्रतिनिधियों की भी रहेगी सक्रिय भागीदारी
अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक पशुपालन, बेहतर नस्ल, संतुलित आहार और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी सीधे पशुपालकों तक पहुंचने से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को नई गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की यह पहल केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पशुपालकों की आय बढ़ाने और गांवों की आर्थिक तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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