सात हजार शिक्षकों के इंतजार पर लगा विराम, अब स्कूल आवंटन की बारी—वर्षों की मेहनत के बाद कक्षा में पहुंचेंगे चयनित शिक्षक

भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे करीब 7 हजार चयनित प्राथमिक शिक्षकों के लिए आखिरकार राहत की खबर है। वर्ग-3 चयनित शिक्षकों की शाला आवंटन प्रक्रिया 31 अगस्त से शुरू हो रही है। स्कूल आवंटित होने के बाद संबंधित चयनित शिक्षक को सात दिन के भीतर कार्यभार ग्रहण करना होगा। यानी परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति की लंबी प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थियों का इंतजार अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।
यह सिर्फ करीब सात हजार युवाओं को स्कूल मिलने की खबर नहीं है, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा मामला है जिन्होंने वर्षों तक अपने बेटे-बेटियों को शिक्षक बनने की तैयारी करते देखा है। परीक्षा दी, परिणाम का इंतजार किया, दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की और फिर पदस्थापना की राह देखी। अब जब शाला आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो रही है तो चयनित शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि उन्हें किस विद्यालय में जिम्मेदारी मिलती है और कब वे वास्तव में बच्चों के बीच खड़े होकर पढ़ाना शुरू करते हैं।
पदस्थापना की प्रक्रिया के दौरान स्थान को लेकर सामने आई परिस्थितियों के बीच करीब 400 चयनित अभ्यर्थियों द्वारा म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प अपनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि शिक्षक नियुक्ति का मामला केवल पद भरने तक सीमित नहीं है। अभ्यर्थियों के लिए उनका कार्यस्थल, दूरी और पारिवारिक परिस्थितियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अब शाला आवंटन में प्रशासनिक आवश्यकता और चयनित शिक्षकों की परिस्थितियों के बीच कितना बेहतर संतुलन बैठता है, इस पर भी नजर रहेगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब प्रक्रिया कागज से निकलकर स्कूल की कक्षा तक पहुंचने जा रही है। शाला आवंटन के बाद सात दिन में जॉइनिंग की समय-सीमा तय है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह तस्वीर भी साफ होगी कि कितने चयनित शिक्षक आवंटित विद्यालयों में पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करते हैं और किन स्कूलों में शिक्षक की कमी वास्तव में दूर होती है।
इस पूरी प्रक्रिया का एक दूसरा पहलू भी है। यदि शाला आवंटन और जॉइनिंग के बाद भी कुछ पद रिक्त रह जाते हैं तो प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों की उम्मीदें उन्हीं रिक्तियों पर टिकी रहेंगी। इसलिए मौजूदा पदस्थापना प्रक्रिया का असर केवल चयनित शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रतीक्षा सूची के उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ेगा जो अब भी अपने अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
वर्ग-3 के साथ वर्ग-2 की प्रतीक्षा सूची से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इससे शिक्षक भर्ती की पूरी कवायद एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल भर्ती प्रक्रिया की फाइलों का नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की कक्षाओं का है।
कितने स्कूलों में शिक्षक की कमी दूर होगी? कितने शिक्षक समय पर जॉइन करेंगे? दूरस्थ और ग्रामीण विद्यालयों तक नए शिक्षक कितनी जल्दी पहुंचेंगे? और क्या पदस्थापना के बाद वास्तव में उन बच्चों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से शिक्षक की कमी का सामना कर रहे हैं—इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे।
फिलहाल हजारों चयनित शिक्षकों के लिए यह खबर राहत की है। वर्षों की मेहनत और लंबे इंतजार के बाद अब उन्हें अपने नियुक्ति स्थल का इंतजार है। सरकार और शिक्षा विभाग के लिए भी यह मौका है कि भर्ती की इस प्रक्रिया को केवल आदेश और आंकड़ों तक सीमित न रखकर उसे स्कूल की कक्षा तक पहुंचाएं। आखिर शिक्षक की असली नियुक्ति कागज पर नहीं, उस दिन मानी जानी चाहिए जब वह बच्चों के सामने खड़ा होकर पहली बार पढ़ाना शुरू करे।
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