“सड़क पर सरेआम मौत का तांडव: करधोनी लूटते -लूटते बदमाशो ने छीन ली जिंदगी !” “खनियांधाना बना लूट का गलियारा: एक और बारदात,एक और मौत…पुलिस फिर खाली हाथ !”

“करधौनी की खींचातानी ने ले ली जान: खनियाधाना में चलती बाइक पर लूट, महिला की मौत… अब भी खुलेआम घूम रहे दरिंदे!”
खनियाधाना। शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग में कानून-व्यवस्था पर एक और करारा तमाचा उस वक्त लगा, जब शुक्रवार रात करीब 9 बजे अछरौनी मार्ग पर चलती बाइक को निशाना बनाकर तीन अज्ञात बदमाशों ने एक महिला की चांदी की करधौनी लूटने की कोशिश की—और इस दुस्साहस ने एक जिंदगी छीन ली।
राजपुर निवासी 42 वर्षीय मीना लोधी अपने रिश्तेदार के साथ बामौरकलां से शादी समारोह से लौट रही थीं। रास्ता वही, समय वही—लेकिन घात लगाए बैठे अपराधियों की नीयत खौफनाक थी। नहर के पास जैसे ही उनकी बाइक पहुंची, पीछे से आए तीन बदमाशों ने चलती बाइक पर झपट्टा मारा और महिला की कमर में बंधी करधौनी को खींच डाला।
करधौनी टूटी… संतुलन टूटा… और जिंदगी भी!
अचानक हुए हमले से बाइक का संतुलन बिगड़ा और मीना सड़क पर जा गिरीं। करधौनी का आधा हिस्सा बदमाशों के हाथ लगा, जबकि आधा उनकी कमर में ही अटका रह गया। लेकिन इस छीना-झपटी ने जो घाव दिए, वे जानलेवा साबित हुए।
गंभीर हालत में परिजन उन्हें रातों-रात झांसी अस्पताल ले गए, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया—इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। एक मामूली जेवर की लूट ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया।
एक ही अंदाज, एक ही वारदात—क्या गैंग सक्रिय है?
चौंकाने वाली बात यह है कि ठीक इसी तरह की घटना दो दिन पहले अमोला घाटी के पास भी सामने आई थी। वहां भी बदमाशों ने चलती बाइक पर महिला की करधौनी लूटी थी—और वहां भी आधी करधौनी ही हाथ लगी थी।
एक जैसी वारदातें, एक जैसा तरीका… सवाल उठता है—क्या इलाके में कोई संगठित गैंग सक्रिय है?
आक्रोश उबाल पर, पुलिस फिर “कार्रवाई जारी” के भरोसे
घटना के बाद परिजन और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन खनियाधाना थाने पहुंचे और सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूट और हत्या का मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन हर बार की तरह बयान वही—“जल्द पकड़ेंगे”।
एसडीओपी पिछोर प्रशांत शर्मा का कहना है कि आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
सवाल वही—आखिर कब तक?
लगातार हो रही इस तरह की वारदातें साफ संकेत दे रही हैं कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और उन्हें कानून का खौफ नहीं।
एक और मौत… एक और जांच… और फिर वही इंतजार—क्या इस बार सच में बदमाश पकड़े जाएंगे, या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
फिलहाल, खनियाधाना की सड़कों पर डर दौड़ रहा है… और इंसाफ अब भी रास्ता खोज रहा है।
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