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पांच दिन से शराब के खिलाफ तांडव: कहीं चक्काजाम, कहीं प्रदर्शन तो कहीं मोबाइल टावर पर चढ़ीं महिलाएं, आखिर क्यों नहीं थम रहा गुस्सा?

सड़कों से मोबाइल टावर तक पहुंचा शराब विरोध् शिवपुरी में पांच दिन से महिलाओं का लगातार प्रदर्शन, कहीं चक्काजाम तो कहीं उग्र विरोध; कलेक्टर के नंबर जारी करने के बाद भी नहीं थम रहा गुस्सा, आबकारी विभाग की जिम्मेदारी भी सवालों में !

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शिवपुरी। जिले में अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ महिलाओं का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले चार-पांच दिनों से जिले में कहीं न कहीं महिलाएं शराब के खिलाफ सड़क पर उतर रही हैं। कहीं चक्काजाम किया जा रहा है तो कहीं शराब की बिक्री बंद कराने के लिए प्रदर्शन। सोशल मीडिया पर भी महिलाओं के विरोध की अलग-अलग तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं। बुधवार को पिछोर क्षेत्र के गूगरी गांव में तो मामला उस समय चौंकाने वाला हो गया, जब विरोध कर रही महिलाएं मोबाइल टावर पर चढ़ गईं और वहीं से शराब के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।

पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद महिलाओं को नीचे उतारा गया। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि आखिर शराब के खिलाफ महिलाओं का विरोध सड़कों से होते हुए मोबाइल टावर तक क्यों पहुंच रहा है?

इधर प्रशासन ने भी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के लिए कदम उठाए हैं। कलेक्टर ने अवैध शराब की बिक्री की सूचना देने के लिए मोबाइल नंबर जारी किए हैं और आम लोगों से अपील की है कि जहां भी अवैध शराब बिकती दिखाई दे, उसकी सूचना प्रशासन को दें। गांव के पटवारी, सरपंच-सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पुलिस और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

इसके बावजूद अगर महिलाएं लगातार प्रदर्शन कर रही हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि शिकायत मिलने के बाद जमीन पर क्या हो रहा है?

सबसे अहम जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है। अवैध शराब की बिक्री रोकना और शराब से जुड़े नियमों का पालन कराना आबकारी विभाग के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में जिन गांवों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, वहां आबकारी अमला कितनी बार पहुंचा, क्या जांच हुई, कितनी शराब पकड़ी गई और कितने मामले बनाए गए, इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

सिर्फ कार्रवाई की खबर जारी कर देने से गांव की समस्या खत्म नहीं होगी। अगर किसी जगह से बार-बार अवैध शराब की शिकायत मिल रही है तो वहां लगातार निगरानी भी जरूरी है। कार्रवाई के बाद फिर उसी जगह शराब बिकने लगे तो यह भी देखना होगा कि आखिर निगरानी में कमी कहां रह गई।
पुलिस की भी अपनी जिम्मेदारी है। अवैध शराब के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को रोकना भी जरूरी है। अमोलपठा में शराब दुकान में तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारियां की हैं। यानी मामला अब सिर्फ विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है।

महिलाओं के विरोध को भी केवल हंगामा कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शराब का असर घर तक पहुंचता है और इसका सबसे ज्यादा सामना अक्सर परिवार की महिलाओं को करना पड़ता है। घर का खर्च बिगड़ना, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना और परिवार में विवाद जैसी परेशानियां शराब के कारण बढ़ने की शिकायतें गांवों में आम हैं। यही वजह है कि इस बार महिलाओं की आवाज लगातार तेज होती दिखाई दे रही है।

लेकिन विरोध का तरीका भी कानून के दायरे में होना चाहिए। शराब के खिलाफ आवाज उठाना अलग बात है और तोड़फोड़, आगजनी या अपनी जान जोखिम में डालना अलग। ऐसी घटनाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायत करने वाले लोगों को बार-बार सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े।

कलेक्टर ने नंबर जारी कर दिए हैं, गांव स्तर पर जिम्मेदारियां भी तय कर दी गई हैं। अब देखना यह है कि इन नंबरों पर आने वाली शिकायतों का क्या होता है। किस गांव से शिकायत मिली, कौन मौके पर गया, क्या मिला और क्या कार्रवाई हुई—इसकी ठीक से निगरानी हो तो व्यवस्था का असर जमीन पर दिखाई देगा।

आबकारी विभाग के सामने भी अब यही चुनौती है। जिन इलाकों में लगातार अवैध शराब की शिकायतें आ रही हैं, वहां नियमित दबिश और निगरानी हो। पुलिस और आबकारी विभाग आपस में तालमेल से काम करें और जरूरत पड़ने पर गांव स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों से भी जानकारी ली जाए। तभी यह पता चलेगा कि अवैध शराब पर रोक लगाने की कोशिश कागज पर है या वास्तव में गांवों तक पहुंच रही है।

शिवपुरी में पांच दिन से लगातार उठ रही महिलाओं की आवाज को अब हल्के में लेना मुश्किल है। आज विरोध सड़क पर है, कहीं चक्काजाम हो रहा है और अब मोबाइल टावर तक मामला पहुंच गया है। प्रशासन ने शिकायत के रास्ते खोल दिए हैं, अब उन शिकायतों पर कार्रवाई कितनी तेजी से होती है, यही सबसे बड़ा सवाल है।

शराब बंद कराने की मांग कर रही महिलाओं की आवाज कब थमेगी, इसका फैसला किसी आश्वासन से नहीं बल्कि अवैध शराब की बिक्री पर होने वाली वास्तविक कार्रवाई से होगा।

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संजीव पुरोहित

मैं संजीव पुरोहित, शिवपुरी (मध्य प्रदेश) से हूँ और शिवपुरी मेल का चीफ एडिटर हूँ। मेरा उद्देश्य स्थानीय और जनहित से जुड़ी सच्ची, निष्पक्ष व ज़मीनी खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

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