चार दिन के शराबी तांडव के बाद कलेक्टर का कड़ा आदेश, अब गांव में अवैध शराब मिली तो आबकारी अमले की भी होगी जवाबदेही !

शिवपुरी। जिले में पिछले चार-पांच दिनों से अवैध शराब को लेकर गांव-गांव से सामने आए विरोध और कार्रवाई की मांग के बीच अब कलेक्टर (आबकारी) ने अवैध शराब के निर्माण, संग्रहण, बिक्री और परिवहन पर शिकंजा कसने के लिए विशेष अभियान के निर्देश जारी किए हैं। शिवपुरी मेल ने भी कुछ दिन पहले यह सवाल उठाया था कि जिस गांव में अवैध शराब बिक रही है, वहां केवल शराब बेचने वाले की जिम्मेदारी तय करने के बजाय संबंधित पटवारी, सरपंच-सचिव, पुलिस बीट प्रभारी और आबकारी क्षेत्र के अधिकारी की भूमिका भी तय होनी चाहिए। अब जारी आदेश में गांव स्तर तक सूचना तंत्र को सक्रिय करते हुए इसी दिशा में जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
कार्यालय कलेक्टर (आबकारी), जिला शिवपुरी से जारी पत्र क्रमांक/आब0/अप्र0/2026-27/3193, दिनांक 14/09/2026 में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 का हवाला देते हुए अवैध रूप से मदिरा का निर्माण, परिवहन, कब्जा अथवा विक्रय दंडनीय अपराध बताया गया है। पत्र में अधिनियम की धारा 50 के तहत ऐसी गतिविधियों की जानकारी तत्काल संबंधित मजिस्ट्रेट, आबकारी वृत्त अथवा थाना प्रभारी को देने के निर्देश दिए गए हैं। समस्त सरपंच, पटवारी, सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम कोटवार/चौकीदार और आशा कार्यकर्ता को अपने क्षेत्र में अवैध शराब से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने और जानकारी तत्काल प्रशासन तक पहुंचाने को कहा गया है।
आदेश में सूचना के लिए पुलिस नियंत्रण कक्ष 7049101055, आबकारी नियंत्रण कक्ष 9993963103, आबकारी वृत्त शिवपुरी/पिछोर 9993963103, आबकारी वृत्त करैरा 9300809126, आबकारी वृत्त पोहरी 7879278698 और आबकारी वृत्त कोलारस 8435675150 नंबर सार्वजनिक किए गए हैं। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अवैध शराब से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देकर प्रशासन को अवगत कराया जाए और सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जाएगा।
पिछले दिनों जिस तरह कई इलाकों में अवैध शराब को लेकर विरोध सामने आया, उसने आबकारी विभाग की मैदानी निगरानी को भी चर्चा में ला दिया है। सवाल यह है कि यदि किसी गांव में लंबे समय से सरकारी दुकान के अलावा अवैध शराब बिक रही है तो संबंधित आबकारी वृत्त की निगरानी में वह क्यों नहीं आई। अब कलेक्टर के आदेश के बाद किसी क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री सामने आती है तो कार्रवाई के साथ यह भी देखा जाना स्वाभाविक होगा कि संबंधित आबकारी क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी को इसकी जानकारी थी या नहीं और सूचना मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई।
पिछले चार-पांच दिनों के घटनाक्रम को देखते हुए यह पहलू भी जांच का विषय है कि सामने आया विरोध पूरी तरह स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया था या इसके पीछे किसी व्यक्ति अथवा संगठन की कोई भूमिका थी। इसका फैसला जांच के बाद ही हो सकता है, लेकिन प्रशासन के लिए दोनों पहलुओं को अलग-अलग देखना जरूरी है। अवैध शराब मिले तो कार्रवाई हो और यदि विरोध या घटनाक्रम के पीछे कोई सुनियोजित प्रयास था तो उसकी वास्तविकता भी सामने आए।
कलेक्टर के इस आदेश ने अब गेंद गांव से लेकर आबकारी विभाग के मैदानी अमले तक पहुंचा दी है। सरकारी दुकान के बाहर यदि कहीं अवैध शराब बिकती पाई जाती है तो केवल विक्रेता पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र में निगरानी और सूचना व्यवस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। अब देखना यही है कि आदेश कागज से निकलकर गांव की गलियों तक कितना असर दिखाता है।
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