एक कुआं बना चार मासूमों की कब्र, एक ही परिवार के चार चिराग हमेशा के लिए बुझ गए

चंदेरी के विक्रमपुर में दिल दहला देने वाला हादसा, खेलने निकले चार सगे भाइयों की कुएं में डूबने से मौत
अशोकनगर/चंदेरी। चंदेरी थाना क्षेत्र के ग्राम विक्रमपुर में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। एक ही परिवार के चार सगे भाई खेत में बने कुएं में डूब गए और चारों की मौत हो गई। मृतकों में 9 वर्षीय देव, 7 वर्षीय त्रिदेव, 6 वर्षीय महादेव और 4 वर्षीय प्रियांशु शामिल हैं। चारों मजदूर बलवीर कुशवाहा के बेटे बताए गए हैं। जानकारी के अनुसार चारों बच्चे घर से निकले थे और काफी देर तक वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। तलाश करते हुए परिजन खेत की ओर पहुंचे, जहां कुएं में एक बच्चे का शव दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस और ग्रामीणों की मदद से एक-एक कर चारों बच्चों के शव कुएं से बाहर निकाले गए। घटना के समय पिता मजदूरी के लिए बाहर गए हुए थे, जबकि मां मायके में थी। एक ही परिवार के चार मासूमों की मौत की खबर फैलते ही विक्रमपुर सहित पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया।
हादसा आखिर हुआ कैसे, इसे लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। प्रारंभिक जानकारी में चारों बच्चों के कुएं के पास खेलने अथवा नहाने जाने की बात सामने आई है, वहीं यह आशंका भी जताई जा रही है कि एक बच्चे के कुएं में गिरने के बाद उसे बचाने के प्रयास में बाकी बच्चे भी हादसे का शिकार हो गए। घटना की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी। सूचना मिलने पर चंदेरी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा चारों शवों को कुएं से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंपे गए।
घटना ने सिर्फ एक परिवार की दुनिया नहीं उजाड़ी, बल्कि खेतों और गांवों में मौजूद खुले अथवा असुरक्षित कुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कुएं में चार मासूमों की जान गई, वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, कुएं की मुंडेर और आसपास की स्थिति कैसी थी तथा बच्चों को ऐसे खतरनाक स्थान तक पहुंचने से रोकने के लिए कोई व्यवस्था थी या नहीं—ये सवाल अब जांच और पड़ताल के केंद्र में होने चाहिए। प्रशासन की ओर से नियमानुसार सहायता की बात कही गई है, लेकिन एक मजदूर पिता के चारों बेटे एक साथ चले जाने का दर्द किसी सहायता से पूरा नहीं हो सकता। जिस घर में कुछ घंटे पहले चार बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और मातम है। चार मासूमों की मौत को महज एक हादसा कहकर भुला देना आसान होगा, लेकिन इस त्रासदी ने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—क्या खुले और खतरनाक कुओं की सुरक्षा पहले से सुनिश्चित की जाती तो चार मासूम जिंदगियां बच सकती थीं?
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