सागर में जहरीली शराब से मौतें, शिवपुरी में आबकारी महकमा अब भी बेखबर! गांवों में महिलाएं कर रहीं ‘रेड’, शहर में खुले अहाते—आखिर किसके भरोसे चल रहा शराब का खेल?

सोशल मीडिया पर रोज सामने आ रहे अवैध शराब के वीडियो ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर खड़े किए सवाल—कहीं महिलाएं शराब की पेटियां बाहर फेंक रहीं तो कहीं कच्ची शराब नष्ट कर रही हैं, फिर भी विभाग की कार्रवाई क्यों नहीं तोड़ पा रही सप्लाई की जड़?
शिवपुरी। सागर के बंडा में जहरीली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया, लेकिन इस भयावह घटना के बाद भी शिवपुरी जिले में अवैध शराब के कारोबार को लेकर सामने आ रहे घटनाक्रम आबकारी महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर जिले के अलग-अलग गांवों से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें महिलाएं और ग्रामीण खुद शराब के खिलाफ मोर्चा संभालते दिखाई दे रहे हैं। कहीं कथित अवैध शराब की बोतलें दुकानों और ठिकानों से निकालकर सड़क पर फेंकी जा रही हैं, तो कहीं कच्ची शराब और उसे बनाने की सामग्री नष्ट की जा रही है। सवाल यह है कि जिस अवैध शराब को गांव की महिलाएं ढूंढकर पकड़ लेती हैं, उसे आबकारी विभाग की निगरानी आखिर क्यों नहीं पकड़ पाती?

खनियाधाना क्षेत्र के कफार गांव में महिलाओं द्वारा कथित कच्ची शराब के ठिकानों पर पहुंचकर कार्रवाई करने का वीडियो सामने आया। इसके बाद पिछोर क्षेत्र के दविया कला और चमरौआ सहित दूसरे इलाकों में भी शराब के खिलाफ महिलाओं के विरोध के मामले सामने आते रहे। हाल में सिरसौद-अमोला क्षेत्र में भी शराब दुकान को लेकर महिलाओं के विरोध और हंगामे का वीडियो सामने आया। यानी मामला किसी एक गांव या एक दिन की शिकायत नहीं रह गया है। एक के बाद एक गांव से महिलाओं का शराब के खिलाफ सड़क पर उतरना अपने आप में आबकारी विभाग के लिए सबसे बड़ा फील्ड अलर्ट होना चाहिए। लेकिन तस्वीर यह है कि सोशल मीडिया पर वीडियो पहले दिखाई देता है और सरकारी कार्रवाई बाद में।

सबसे बड़ा सवाल यहीं से पैदा होता है—क्या आबकारी विभाग को गांवों में शराब बिकने की जानकारी तभी मिलती है जब उसका वीडियो वायरल हो जाए? यदि ऐसा नहीं है तो फिर नियमित निगरानी व्यवस्था कहां है? गांवों में कौन शराब पहुंचा रहा है, सरकारी दुकान से बाहर कथित रूप से शराब की सप्लाई किस नेटवर्क के जरिए हो रही है, किन स्थानों पर अवैध बिक्री की शिकायतें बार-बार मिल रही हैं और उन शिकायतों के बाद विभाग ने क्या किया—इन सवालों का जवाब अब केवल कुछ लीटर शराब पकड़कर या एक-दो प्रकरण दर्ज कर देने से नहीं मिलेगा।

शिवपुरी शहर को लेकर भी सोशल मीडिया पर अहातों के खुले रूप से संचालित होने और बंद कराए गए अहातों के फिर सक्रिय होने के आरोप सामने आते रहे हैं। इन दावों की हर घटना की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर जरूरी है, लेकिन इतना जरूर है कि जब शराब बिक्री और अहातों को लेकर सार्वजनिक रूप से वीडियो और शिकायतें सामने आती हैं तो आबकारी विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। अगर शहर में नियमों के विपरीत अहाते संचालित होने की बात कही जा रही है तो विभाग को स्वयं मैदान में उतरकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए—कौन संचालित कर रहा है, किस अनुमति के तहत कर रहा है और यदि अनुमति नहीं है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

विभाग की ओर से समय-समय पर अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई और जब्ती के दावे सामने आते हैं। लेकिन जमीनी सवाल यह है कि यदि कार्रवाई के बावजूद कुछ ही दिनों बाद उसी क्षेत्र से फिर शराब की शिकायत सामने आ जाए तो कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शराब की बोतल पकड़ना आसान हिस्सा है, असली कार्रवाई उस व्यक्ति तक पहुंचना है जो गांव तक शराब पहुंचाने वाली सप्लाई लाइन चला रहा है। जब तक सप्लाई का स्रोत नहीं टूटेगा, तब तक एक ठिकाने पर कार्रवाई के बाद दूसरा ठिकाना खड़ा होता रहेगा।
और यही वह बिंदु है जहां आबकारी विभाग की जवाबदेही सबसे ज्यादा बनती है। ग्रामीणों को यह पता है कि उनके आसपास शराब कहां बिकती है, महिलाओं को पता है कि शराब कहां रखी है और सोशल मीडिया तक इन घटनाओं के वीडियो पहुंच रहे हैं, तो क्या आबकारी विभाग के पास अपना सूचना तंत्र नहीं है? क्या बीट स्तर पर निगरानी केवल कागजों तक सीमित है? क्या जिन गांवों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, वहां विशेष निगरानी की सूची बनाई गई? कितनी शिकायतें मिलीं, कितनों पर जांच हुई और कितनों में कार्रवाई हुई—यह पूरा रिकॉर्ड अब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

सागर की घटना के बाद मामला और गंभीर हो गया है। जहरीली शराब की एक घटना केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं होती, यह सीधे लोगों की जान से जुड़ी होती है। ऐसे में शिवपुरी में लगातार सामने आ रही अवैध शराब की शिकायतों को तब तक हल्के में नहीं लिया जा सकता जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित न हो जाए कि गांव-गांव पहुंच रही कथित अवैध शराब की सप्लाई लाइन पर प्रभावी रोक लग चुकी है। कल अगर किसी गांव में जहरीली शराब से कोई अनहोनी होती है तो उसके बाद कार्रवाई करने से पहले आज की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
अब समय छिटपुट कार्रवाई से आगे बढ़कर जवाबदेही तय करने का है। कलेक्टर को जिले के सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए कि जिस गांव में अवैध शराब की बिक्री पकड़ी जाती है, वहां केवल शराब बेचने वाले पर कार्रवाई न हो, बल्कि यह भी जांच हो कि संबंधित क्षेत्र में पहले शिकायत मिली थी या नहीं और स्थानीय स्तर पर निगरानी में लापरवाही हुई या नहीं। जरूरत पड़े तो संबंधित बीट प्रभारी, पटवारी, ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव तथा संबंधित क्षेत्र के आबकारी अधिकारी की भूमिका की भी जांच हो और लापरवाही प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इससे जिम्मेदारी ऊपर से नीचे तक तय होगी और हर गांव का स्थानीय तंत्र यह समझेगा कि अवैध शराब की मौजूदगी को नजरअंदाज करना भी गंभीरता से लिया जाएगा।
क्योंकि आखिर सवाल सिर्फ यह नहीं है कि शराब कौन बेच रहा है? सवाल यह भी है कि उसे गांव तक पहुंचने दिया किसने? शिकायत के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? विभाग को जानकारी क्यों नहीं मिली? और अगर जानकारी मिली थी तो कार्रवाई का असर जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दिया?
शिवपुरी की जनता को शराब की बोतलें पकड़ने के लिए सड़क पर उतरना पड़े और आबकारी विभाग सोशल मीडिया देखकर जागे—इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी? सागर की त्रासदी चेतावनी बनकर सामने खड़ी है। अब देखना यह है कि शिवपुरी का आबकारी महकमा इस चेतावनी को समझता है या फिर अगली वायरल वीडियो और अगली शिकायत का इंतजार करता है।
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