*सरकारी सेवा से विदाई, लेकिन दिलों से नहीं… 39 वर्षों तक जनसंपर्क परिवार की धड़कन रहे मोहन बाबू सोनी को भावभीनी विदाई”*

एक युग का अवसान… जनसंपर्क कार्यालय से विदा हुआ वह चेहरा, जो हर मुस्कान, हर संघर्ष और हर रिश्ते का हिस्सा था
शिवपुरी। कुछ विदाइयाँ औपचारिक नहीं होतीं, वे दिलों में खालीपन छोड़ जाती हैं। कुछ लोग दफ्तर की उपस्थिति पंजिका में दर्ज होते हैं, लेकिन कुछ लोग लोगों के दिलों में दर्ज हो जाते हैं। शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 ऐसा ही दिन रहा, जब जिला जनसंपर्क कार्यालय शिवपुरी ने अपने सबसे आत्मीय, सबसे सहज और सबसे भरोसेमंद साथी श्री मोहन बाबू सोनी को शासकीय सेवा से विदा किया।
करीब 39 वर्षों तक वाहन चालक के रूप में सेवाएँ देने वाले मोहन बाबू सोनी ने केवल सरकारी गाड़ी का स्टीयरिंग नहीं संभाला, बल्कि रिश्तों, विश्वास और अपनत्व की उस डोर को भी थामे रखा, जिसने जनसंपर्क कार्यालय और पत्रकार परिवार को वर्षों तक एक सूत्र में बाँधे रखा। यही कारण है कि उनकी विदाई केवल एक कर्मचारी की सेवानिवृत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसे दौर का समापन है, जिसकी यादें लंबे समय तक लोगों के मन में जीवित रहेंगी।

समय बदलता रहा… अधिकारी आते रहे, तबादले होते रहे, पत्रकारों की नई पीढ़ियाँ जुड़ती रहीं। लेकिन यदि कोई चेहरा हर दौर में समान आत्मीयता, समान मुस्कान और समान समर्पण के साथ सबके बीच मौजूद रहा, तो वह मोहन बाबू सोनी थे। वे पद से वाहन चालक थे, लेकिन व्यवहार से पूरे जनसंपर्क परिवार के संरक्षक, सहयोगी और शुभचिंतक बन चुके थे।
किसी पत्रकार के घर में खुशी हो या किसी साथी के परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़े… देर रात की कवरेज हो या सुबह-सुबह किसी सरकारी कार्यक्रम की दौड़… किसी को मदद की ज़रूरत हो या किसी को केवल एक अपने की मौजूदगी चाहिए हो—सोनी जी हमेशा सबसे पहले खड़े दिखाई देते थे। उन्होंने कभी रिश्तों को पद और परिचय की सीमाओं में नहीं बाँधा। उनके लिए हर व्यक्ति अपना था और हर परेशानी साझा थी।
पत्रकारों के बीच आत्मीयता, भाईचारा और एकजुटता बनाए रखने में उनकी भूमिका हमेशा विशेष रही। मतभेदों के दौर में भी वे संवाद का पुल बनते थे। नए पत्रकारों को अपनापन देना, वरिष्ठों का सम्मान करना और हर व्यक्ति को समान भाव से देखना उनकी पहचान थी। शायद यही वजह है कि वे केवल जनसंपर्क विभाग के नहीं, बल्कि पूरे शिवपुरी के पत्रकार जगत के सबसे चहेते चेहरों में गिने जाते रहे।
शुक्रवार को आयोजित विदाई समारोह में जब सहायक संचालक जनसंपर्क श्रीमती प्रियंका शर्मा, वरिष्ठ पत्रकारों और विभागीय कर्मचारियों ने उन्हें शॉल, श्रीफल और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया, तो माहौल भावनाओं से भर उठा। हर चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन आँखों में बिछड़ने की नमी भी साफ दिखाई दे रही थी। यह सम्मान केवल 39 वर्षों की नौकरी का नहीं, बल्कि उस विश्वास, उस आत्मीयता और उस इंसानियत का था, जिसे मोहन बाबू सोनी ने अपने पूरे सेवाकाल में जिया।
अपने संक्षिप्त लेकिन भावुक उद्बोधन में श्री मोहन बाबू सोनी ने कहा कि उन्होंने हमेशा शासन की मंशा के अनुरूप पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि “यह कार्यालय मेरे लिए केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि मेरा परिवार रहा है। पत्रकार साथियों और अधिकारियों से जो स्नेह, सम्मान और अपनापन मिला, वही मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।”
सरकारी अभिलेखों में आज उनकी सेवा समाप्त हो गई होगी, लेकिन जनसंपर्क कार्यालय के गलियारों में उनकी मुस्कान, उनकी सहजता, उनका सहयोग और उनका अपनापन हमेशा गूँजता रहेगा। क्योंकि कुछ लोग सेवा से सेवानिवृत्त होते हैं, यादों से नहीं।
मोहन बाबू सोनी की विदाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसका पद नहीं, बल्कि उसका व्यवहार होता है। और यही व्यवहार उन्हें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रखता है।
Live Cricket Info







