गुरुपूर्णिमा महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब बाणगंगा मंदिर में गुरुदेव पं. देवकी नंदन पाराशर का भव्य पूजन, सुंदरकाण्ड की संगीतमय प्रस्तुति से भक्तिमय हुआ वातावरण

शिवपुरी। गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर शिवपुरी के प्राचीन बाणगंगा मंदिर परिसर में परम श्रद्धेय पंडित देवकी नंदन पाराशर जी के सान्निध्य में गुरुपूर्णिमा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में शिवपुरी सहित दूर-दराज़ क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं और शिष्यों ने अपने गुरुदेव का विधिवत पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में “जय गुरुदेव” के जयघोष और भक्ति रस की अविरल धारा बहती रही।

गुरुपूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ गुरुदेव के पूजन एवं चरण वंदन से हुआ। इसके पश्चात सुंदरकाण्ड का संगीतमय पाठ आयोजित किया गया, जिसमें भजनों और श्रीहनुमान जी की महिमा से ओत-प्रोत प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए।
इस अवसर पर अपने आशीर्वचन में पंडित देवकी नंदन पाराशर जी ने कहा कि “जिसका गुरु नहीं, उसका कोई नहीं। गुरु ही मनुष्य के जीवन का वास्तविक पथ-प्रदर्शक होता है। गुरु के मार्गदर्शन के बिना जीवन की दिशा अधूरी रहती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है।” उनके प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन के महत्व का संदेश दिया।
विशेष बात यह रही कि शिवपुरी के अलावा दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में शिष्य और श्रद्धालु बाणगंगा मंदिर पहुंचे, जिन्होंने गुरुदेव के दर्शन कर उनका पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

धार्मिक कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे आयोजन में सेवा, श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला।
गुरुपूर्णिमा महोत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति में गुरु केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य प्रकाश हैं। बाणगंगा मंदिर में आयोजित यह भव्य आयोजन श्रद्धा, आध्यात्मिकता और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण बन गया।
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