गणेश चतुर्थी आज : शुभ मुहूर्त में विराजेंगे विघ्नहर्ता, राशि के अनुसार ये उपाय बदल सकते हैं भाग्य का रुख

शिवपुरी। विघ्नहर्ता, बुद्धि और मंगल के देवता भगवान गणेश के स्वागत का पर्व गणेश चतुर्थी इस बार 14 सितंबर सोमवार को मनाया जा रहा है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे शुरू होकर 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। मध्यप्रदेश में गणेश स्थापना और पूजन के लिए सबसे महत्वपूर्ण मध्यान्ह मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:30 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इसी काल में गणेशजी की जन्मलीला से जुड़ा पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।
एक दिन का पर्व नहीं, भक्ति का लंबा उत्सव—25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन
गणेशोत्सव की शुरुआत स्थापना से होगी और मुख्य विसर्जन 25 सितंबर अनंत चतुर्दशी को होगा। हालांकि परंपरा के अनुसार श्रद्धालु अपनी कुल-परंपरा के मुताबिक डेढ़, तीन, पांच या सात दिन में भी विसर्जन कर सकते हैं।
कहां से शुरू हुई सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा?
गणेश पूजा की परंपरा प्राचीन है, लेकिन आधुनिक सार्वजनिक गणेशोत्सव को व्यापक स्वरूप महाराष्ट्र में मिला। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में गणेश उत्सव को सार्वजनिक आयोजन का रूप देकर सामाजिक एकता और जनजागरण का माध्यम बनाया। आज महाराष्ट्र के साथ मध्यप्रदेश, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित देश के अनेक हिस्सों में गणेशोत्सव बड़े उत्साह से मनाया जाता है। मुंबई, पुणे, नागपुर, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में इसकी विशेष धूम रहती है।
स्थापना में क्या रखें ध्यान?
घर में स्वच्छ स्थान पर मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित कर पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है। गणेशजी को दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर, चंदन, मोदक और गुड़ अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद गणेश मंत्र, गणेश अथर्वशीर्ष अथवा गणेश चालीसा का पाठ और आरती की जा सकती है। धार्मिक मान्यता में गणेशजी को प्रथम पूज्य तथा विघ्नहर्ता माना गया है, इसलिए नए कार्य, शिक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण संकल्पों के लिए उनका स्मरण विशेष महत्व रखता है।
राशि के अनुसार करें ये छोटे उपाय
मेष: लाल फूल और गुड़ चढ़ाकर “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें।
वृषभ: गणेशजी को सफेद तिल से बने मिष्ठान का भोग लगाएं और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
मिथुन: दूर्वा अर्पित कर विद्यार्थियों और बुद्धि-विवेक की उन्नति के लिए गणेशजी का ध्यान करें।
कर्क: मोदक का भोग लगाकर घर में शांति और मानसिक स्थिरता की कामना करें।
सिंह: लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित कर कार्यों में सफलता का संकल्प लें।
कन्या: दूर्वा की माला या गुच्छा अर्पित कर पढ़ाई, नौकरी और निर्णय क्षमता के लिए प्रार्थना करें।
तुला: गुड़-धनिया या मोदक का भोग लगाकर आर्थिक स्थिरता और संबंधों में मधुरता की कामना करें।
वृश्चिक: लाल फूल चढ़ाकर बाधाओं से मुक्ति और साहस के लिए गणेश मंत्र का जाप करें।
धनु: पीले पुष्प अर्पित कर ज्ञान, शिक्षा और भाग्योदय की कामना करें।
मकर: काले तिल के स्थान पर गणेशजी को दूर्वा और गुड़ अर्पित कर कार्य में आ रही बाधाओं के निवारण की प्रार्थना करें।
कुंभ: गणेशजी को मोदक चढ़ाकर नए कार्य और रोजगार में सफलता की कामना करें।
मीन: पीले फूल, दूर्वा और मोदक अर्पित कर ज्ञान, धन और पारिवारिक सुख के लिए प्रार्थना करें।
ज्योतिषीय मान्यता में सबसे सरल और प्रभावी उपाय
यदि कोई व्यक्ति राशि के अनुसार उपाय नहीं कर पाता तो केवल 21 दूर्वा दल, लाल पुष्प और मोदक अर्पित कर 108 बार “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करना भी श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है। मान्यता है कि गणेश उपासना से बुद्धि, विवेक, सफलता और विघ्नों से मुक्ति की कामना की जाती है।
एक सावधानी भी जरूरी—चंद्र दर्शन से बचें
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन को लेकर धार्मिक परंपरा में विशेष सावधानी बताई गई है। मध्यप्रदेश के पंचांग अनुसार 14 सितंबर को लगभग सुबह 8:57 से रात 8:12 बजे तक चंद्र दर्शन से बचने की सलाह दी गई है।
आस्था के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी
गणेशोत्सव का संदेश केवल पूजा और उत्सव तक सीमित नहीं होना चाहिए। मिट्टी की प्रतिमा, प्राकृतिक रंग और निर्धारित अथवा कृत्रिम विसर्जन स्थल का उपयोग करके श्रद्धालु आस्था के साथ पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी ले सकते हैं।
ज्योतिषीय उपाय आस्था और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
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