Telegram Join our Telegram Channel for Daily Latest News Updates! Join Now ×

मोती सागर की जलकुंभी से जूझता पिछोर, जब व्यवस्था थमी तो युवाओं ने संभाली कमान किले की छांव में खामोश पड़ा शहर का गौरव, अब युवाओं के हाथों से लौट रही तालाब की सांस

पिछोर। पिछोर के किले को देखकर अगर कोई उसकी पुरानी तस्वीर तलाशना चाहे तो उसे बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। किले के नीचे पसरा मोती सागर तालाब आज भी उस दौर की कहानी कहता है, जब तालाब केवल पानी का ठिकाना नहीं, बल्कि किसी शहर की जरूरत, उसकी पहचान और उसकी जीवनशैली का हिस्सा हुआ करते थे। पीढ़ियां बदलीं, पिछोर बदला, लेकिन मोती सागर आज भी पिछोर के साथ खड़ा है। फर्क सिर्फ इतना है कि कभी तालाब शहर को जीवन देता था और अब शहर को अपने इस पुराने साथी को बचाने के लिए आगे आना पड़ रहा है।

इन दिनों मोती सागर की तस्वीर बदली हुई है। पानी के बड़े हिस्से पर जलकुंभी फैल गई है। दूर से देखने पर पानी के ऊपर हरी चादर जैसी दिखाई देती है, लेकिन करीब जाने पर यह किसी खूबसूरत हरियाली की तस्वीर नहीं, बल्कि तालाब की बिगड़ती हालत का संकेत नजर आती है। यही वह स्थिति है जिसने पिछोर के कुछ युवाओं को बेचैन किया और उन्होंने इंतजार करने के बजाय खुद तालाब में उतरने का फैसला किया।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

सुबह हो या दिन का दूसरा पहर, युवा जुट रहे हैं। हाथों में कोई बड़ा सरकारी संसाधन नहीं, बस रस्सियां, जाल और मेहनत। पानी से जलकुंभी खींची जा रही है, बाहर निकाली जा रही है और धीरे-धीरे तालाब की पानी की सतह दिखाई देने लगी है।

यह काम देखने में जितना आसान लगता है, जमीन पर उतना ही कठिन है। तालाब से जलकुंभी निकालना केवल पौधा उखाड़ना नहीं है। पानी में उतरना, उसे पकड़ना, खींचकर किनारे तक लाना और फिर उसे तालाब से दूर करना—इसके लिए समय और लगातार मेहनत दोनों चाहिए। युवाओं ने यह काम किसी आदेश के इंतजार में नहीं, बल्कि अपने शहर के प्रति जिम्मेदारी समझकर शुरू किया है।

इस मुहिम को पिछोर विधायक प्रीतम लोधी का भी साथ मिला है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जुड़ने की अपील की है। इससे युवाओं का उत्साह और बढ़ा है।

लेकिन मोती सागर की मौजूदा स्थिति एक दूसरी तस्वीर भी सामने रखती है।

जिस काम के लिए आज युवा अपने हाथ गंदे कर रहे हैं, वह काम व्यवस्था की नियमित जिम्मेदारी में पहले से शामिल होना चाहिए था।

नगर पालिका की ओर से तालाब की सफाई पर राशि खर्च किए जाने और सफाई कराए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि कुछ समय बाद वही जलकुंभी फिर पूरे तालाब पर फैलने लगे तो साफ है कि समस्या केवल सफाई की नहीं है। जलकुंभी निकाल देने से उसका दोबारा आना नहीं रुकता। उसके पीछे पानी में पहुंचने वाले पोषक तत्व, गंदे पानी का प्रवेश, नालों की स्थिति और तालाब की पूरी जलव्यवस्था जैसे कारणों को देखना पड़ेगा।

यही वजह है कि मोती सागर के लिए एक दिन की सफाई नहीं, लगातार देखरेख की जरूरत है।

तालाब की जलकुंभी निकालने के साथ यह भी देखना होगा कि आखिर वह बढ़ क्यों रही है। तालाब में कौन-कौन से नाले आकर मिलते हैं, उनमें किस तरह का पानी आता है, आसपास से गंदगी या सीवेज तो नहीं पहुंच रहा, बारिश के साथ क्या-क्या तालाब में आ रहा है और पानी में पोषक तत्वों की मात्रा कितनी है—इन सबकी जांच के बिना हर साल जलकुंभी निकालने पर मेहनत और पैसा दोनों लगेंगे, लेकिन बीमारी वहीं रहेगी।

मोती सागर के मामले में एक और बात महत्वपूर्ण है। इतिहास को केवल किले की दीवारों में खोजने से काम नहीं चलेगा। किले के नीचे मौजूद तालाब भी उसी पुराने परिदृश्य का हिस्सा है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों में मोती सागर को पिछोर किले के पश्चिमी हिस्से से जुड़ा बताया गया है और किले की जलव्यवस्था में तालाब-बावड़ी जैसी संरचनाओं की भूमिका का उल्लेख मिलता है। ऐसे में इस जलाशय को सामान्य नगर पालिका तालाब मानकर केवल सफाई कराना पर्याप्त नहीं होगा।

इसे पिछोर की ऐतिहासिक जलधरोहर मानकर काम करने की जरूरत है।

और यहीं युवाओं की मुहिम सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।

युवा यह बता रहे हैं कि किसी शहर की विरासत केवल सरकारी बोर्ड लगाने से सुरक्षित नहीं रहती। उसके लिए शहर के लोगों को भी खड़ा होना पड़ता है। मोती सागर की सफाई में जुटे इन युवाओं ने फिलहाल किसी बड़े मंच की तलाश नहीं की। उन्होंने सीधे तालाब का रास्ता चुना है।

यह श्रमदान केवल जलकुंभी हटाने का काम नहीं है, यह पिछोर की उस पीढ़ी की आवाज है जो अपने शहर की पुरानी पहचान को अपनी आंखों के सामने खत्म होते नहीं देखना चाहती।

लेकिन युवाओं की यह मेहनत तभी स्थायी परिणाम दे पाएगी, जब इसके बाद व्यवस्था भी अपनी जिम्मेदारी निभाए। तालाब से निकली जलकुंभी फिर पानी में न पहुंचे, तालाब में गंदा पानी न आए, जलग्रहण क्षेत्र सुरक्षित रहे और समय-समय पर सफाई होती रहे—इसके लिए नगर पालिका को नियमित व्यवस्था बनानी होगी।

आज युवाओं ने तालाब की सफाई का बीड़ा उठाया है। कल यही युवा यह भी चाहेंगे कि उन्हें बार-बार तालाब में उतरने की जरूरत न पड़े।

मोती सागर को बचाने का असली रास्ता यही है—जलकुंभी को ऊपर से निकालने के साथ उस वजह को भी खत्म किया जाए जो उसे बार-बार जन्म दे रही है।

किले के नीचे खड़ा मोती सागर आज जैसे पिछोर से कुछ कह रहा है। पानी अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा, लेकिन युवाओं की मेहनत ने उसकी सतह के नीचे छिपी उम्मीद जरूर दिखाई है।

जिस तालाब की पहचान पिछोर की पहचान रही है, उसे बचाने के लिए आज युवा आगे आए हैं। अब इस मुहिम को केवल युवाओं का अभियान बनाकर छोड़ना नहीं, पूरे शहर की जिम्मेदारी बनाना होगा।

पिछोर के इन युबाओ की टीम ने तालाब को जिंदा करने का लिया संकल्प और उतर गये मैदान मे :-

गौरव मिश्रा (नीटू भैया),वंश रावत,अमन् पटेरिया, अनिरुद्ध भट्ट,सागर पाराशर,प्रतीक भार्गव,पीयूष राजोरिया,अभिषेक लोधी,सजल भार्गव,ताहिर राईन,सिब्बू पंडा,राज पाराशर,राहुल डांगी,पुष्पेंद्र डांगी,कुणाल सेन,राज गुप्ता,प्रिंस कोली,चुन्नू कोली,,श्यामू,वेदांत शर्मा,तिलक गौर,,देव भट्ट।

क्योंकि मोती सागर की जलकुंभी हटने से सिर्फ पानी साफ नहीं होगा—पिछोर की एक पुरानी पहचान फिर से दिखाई देगी।

📢 सूचना एवं विज्ञापन हेतु निवेदन: यदि आपके क्षेत्र से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण स्थानीय खबर, सामाजिक गतिविधि या जनहित से संबंधित जानकारी है, तो कृपया प्रकाशन के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल के साथ साझा करें। विज्ञापन एवं प्रचार-प्रसार हेतु भी आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। संपर्क करने के लिए कांटेक्ट उस पेज पर जाये। धन्यवाद्!

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

संजीव पुरोहित

मैं संजीव पुरोहित, शिवपुरी (मध्य प्रदेश) से हूँ और शिवपुरी मेल का चीफ एडिटर हूँ। मेरा उद्देश्य स्थानीय और जनहित से जुड़ी सच्ची, निष्पक्ष व ज़मीनी खबरें आप तक पहुँचाना है। ताज़ा अपडेट के लिए Telegram और WhatsApp पर हमारे साथ जुड़ें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button
Close

Ad Blocker Detected

We rely on advertising revenue to support our journalism and keep this website running. Please consider disabling your ad blocker to continue accessing our content.