शहर के बीच होटल में लगी भीषण आग, दमकल नदारद – पुलिस बनी हीरो!

शिवपुरी – शहर के दिल में गुरुवार शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब वीर सावरकर उद्यान के सामने स्थित गैलेक्सी होटल में अचानक आग भड़क उठी। होटल के किचन से उठता धुआं देखते ही इलाके में हड़कंप मच गया।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो सामने आया, उसने नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
एक घंटे तक नहीं पहुंची दमकल, पुलिस ने संभाला मोर्चा
आग लगते ही होटल प्रबंधन ने तुरंत नगरपालिका को सूचना दी, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि दमकल करीब एक घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची।
इस बीच, कोतवाली टीआई रोहित दुबे अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना इंतजार किए खुद ही आग बुझाने में जुट गए।
बाल्टी और जग से पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश
निजी टैंकर मंगवाकर आग बुझाने की व्यवस्था
खुद होटल के अंदर जाकर जोखिम उठाया
पुलिस की इसी मुस्तैदी से एक बड़ा हादसा टल गया।
जब सब खत्म हो गया, तब पहुंची दमकल
सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि जब तक आग पूरी तरह काबू में आ चुकी थी, तब जाकर नगरपालिका की दमकल सिर्फ एक ड्राइवर के साथ मौके पर पहुंची।
अब सवाल ये उठता है कि:
क्या शहर की सुरक्षा भगवान भरोसे है?
क्या दमकल विभाग सिर्फ कागजों में ही सक्रिय है?
नगरपालिका पर भ्रष्टाचार के आरोप, सिस्टम फेल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगरपालिका भ्रष्टाचार में डूबी हुई है, जिसका सीधा असर आपात सेवाओं पर पड़ रहा है।
आग जैसी गंभीर स्थिति में भी समय पर रिस्पॉन्स न मिलना, सिस्टम की बड़ी नाकामी को उजागर करता है।
बड़ी घटना टली, लेकिन सवाल कायम
हालांकि राहत की बात यह रही कि पुलिस की सक्रियता से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई।
लेकिन यह घटना कई बड़े सवाल छोड़ गई:
शहर की आपात सेवाएं कितनी तैयार हैं?
जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?
क्या अगली बार भी ऐसे ही भगवान भरोसे रहेगा सिस्टम?
जनता का गुस्सा फूटा
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर नहीं पहुंचती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
शिवपुरी की यह घटना सिर्फ एक आगजनी नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही और भ्रष्टाचार का आईना है।
जहां एक तरफ पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी निभाई, वहीं नगरपालिका की नाकामी साफ उजागर हो गई।
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