टीकमगढ़ में सियासी भूचाल: नगर पालिका अध्यक्ष पप्पू मलिक बर्खास्त, 5 साल के लिए चुनाव लड़ने पर भी रोक


टीकमगढ़। बुंदेलखंड की राजनीति में आज बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मध्य प्रदेश शासन के नगरीय प्रशासन विभाग ने एक सख्त और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए नगर पालिका टीकमगढ़ के अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार खान उर्फ पप्पू मलिक को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इतना ही नहीं, शासन ने उन्हें आगामी 5 वर्षों तक किसी भी चुनाव में भाग लेने के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद जिले से लेकर प्रदेश तक सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
शिकायतों से शुरू हुई कार्रवाई, हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
सूत्रों के अनुसार, पप्पू मलिक के खिलाफ लंबे समय से अनियमितताओं और शिकायतों का सिलसिला चल रहा था। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने 26 फरवरी 2026 को मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 41-क के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
मामले ने उस वक्त नया मोड़ लिया जब पप्पू मलिक ने जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के निर्देश पर 18 मार्च 2026 को उन्हें जांच प्रतिवेदन सौंपा गया और जवाब देने के लिए समय दिया गया।
जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ विभाग, गिर गई कुर्सी
1 अप्रैल 2026 को पप्पू मलिक खुद पेश हुए और लिखित जवाब दिया, लेकिन विभाग उनके तर्कों से संतुष्ट नहीं हुआ। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए शासन ने आखिरकार उनकी कुर्सी छीनने का फैसला ले लिया।
नगर पालिका अध्यक्ष को पद् से हटाकर सरकार ने दिया जीरो टोलरेंस का शख्त संदेश
भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के रूप में देखा जा रहा है। साफ संकेत है कि अब नगर निकायों में बैठे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होगी और लापरवाही या गड़बड़ी पर सीधी कार्रवाई होगी।
अब क्या होगी टीकमगढ़ की राजनीति में हलचल हुई ?
अध्यक्ष पद खाली होने के बाद अब टीकमगढ़ नगर पालिका में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। सत्ता और विपक्ष दोनों ही इस मौके को अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी भूचाल के बाद कुर्सी पर किसका कब्जा होता है।
फिलहाल, एक बात साफ है—टीकमगढ़ की राजनीति में यह फैसला लंबे समय तक असर छोड़ने वाला है।
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