पाखंडी बाबा’ की पेनड्राइव ने हिलाया महाराष्ट्र का तख्त: महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष का रसूख मिट्टी में मिला, ‘एप्सटिन फाइल्स’ से खुला राज!

डसंजीव पुरोहित,सम्पादक)
मुंबई/:- कहते हैं वक्त जब करवट लेता है, तो बड़े-बड़े सूरमाओं के ताज जमीन पर आ गिरते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय एक ऐसा ही तूफान आया है जिसने सत्ता, ग्लैमर और रसूख के संगम को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। नासिक के ‘भोंदू बाबा’ अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद जो ‘एप्सटिन फाइल्स’ (पेनड्राइव) सामने आई है, उसने न केवल ज्योतिष के नाम पर चल रहे काले धंधे को उजागर किया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी हड़कंप मचा दिया है।
अर्श से फर्श तक का सफर
इस पूरे मामले के केंद्र में हैं महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष। कभी एमबीए (MBA) कर सरकारी नौकरी का सपना देखने वाली इस महिला ने अशोक खरात के संपर्क में आने के बाद राजनीति की सीढ़ियां इतनी तेजी से चढ़ीं कि देखते ही देखते वह महिलाओं के अधिकारों की रक्षक बनकर सर्वोच्च कुर्सी पर बैठ गईं। लेकिन नियति का खेल देखिए, जिस बाबा ने उन्हें कुर्सी तक पहुँचाने का ‘रास्ता’ दिखाया, उसी की एक करतूत ने उन्हें पद और प्रतिष्ठा दोनों से हाथ धोने पर मजबूर कर दिया।
58 महिलाएं और वो 17 वीडियो!
पुलिस जांच में बाबा अशोक खरात के पास से जो डिजिटल साक्ष्य (पेन ड्राइव) मिले हैं, उनमें कथित तौर पर 58 महिलाओं के अश्लील वीडियो होने की बात सामने आई है। चौंकाने वाला दावा यह है कि इनमें से 17 वीडियो महिला आयोग की उसी पूर्व अध्यक्ष के हैं, जो कल तक महिलाओं की गरिमा की रक्षा की कसमें खाती थीं। इस खुलासे ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सत्ता की भूख इंसानी स्वाभिमान से बड़ी हो सकती है?
पाखंड का साम्राज्य और ‘डर’ की खेती
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अशोक खरात खुद को एक भविष्यवक्ता और रक्षक बताकर प्रभावशाली महिलाओं को अपने जाल में फंसाता था। पहले ‘ग्रह-नक्षत्र’ के नाम पर डराना और फिर ‘समाधान’ के बहाने उनका शोषण करना उसका मुख्य हथियार था। आज जब वह जेल की सलाखों के पीछे है, तब उसके आलीशान बंगलों और करोड़ों की संपत्ति के पीछे छिपे काले सच दुनिया के सामने आ रहे हैं।

जिंदगी का कड़वा सच
कल तक जो नाम सत्ता का पर्याय था, आज वही एक बड़ा सवालिया निशान बन गया है। कल तक जो ताकत थी, आज वही सबसे बड़ा इल्जाम है। यह मामला उन सभी के लिए एक सबक है जो शॉर्टकट और अंधविश्वास के सहारे ऊँचाइयों को छूना चाहते हैं। ऊँचाइयां स्थायी नहीं होतीं, और गलत नींव पर खड़ी इमारत एक न एक दिन गिरती जरूर है।
फिलहाल, विशेष जांच टीम (SIT) इस ‘पेनड्राइव कांड’ की गहराई से पड़ताल कर रही है। देखना होगा कि इस मकड़जाल में अभी और कितने सफेदपोश चेहरों के नकाब उतरते हैं।
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