“नस्तियों से लेकर कैशबुक तक ‘कब्जे’ का आरोप: शिवपुरी नगर पालिका में अंदरूनी संग्राम फिर भड़का”

प्रभारी लेखापाल की शिकायत से खुली परतें, वायरल वीडियो ने बढ़ाई सियासी तपिश—प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल
शिवपुरी /नगर पालिका परिषद एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं, बल्कि वित्तीय दस्तावेजों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक मर्यादा और सत्ता के दखल तक पहुंचता दिख रहा है। प्रभारी लेखापाल रविकांत झा द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को सौंपे गए शिकायती आवेदन ने पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
“फाइलें ले गए, रसीद तक नहीं दी”
शिकायत के मुताबिक, झा जब ठेकेदारों के भुगतान से जुड़ी नस्तियां और फाइलें स्वीकृति के लिए अध्यक्ष के पास लेकर पहुंचे, तो उनसे कुछ फाइलों पर तत्काल जानकारी मांगी गई। संबंधित नस्ती मौके पर उपलब्ध न होने पर उनके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया।
आरोप है कि फाइलें फेंकी गईं और सभी नस्तियां अपने पास रख ली गईं—बिना किसी पावती या रसीद के।
यह सिर्फ व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि सरकारी प्रक्रिया के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
कैशबुक भी ‘निजी नियंत्रण’ में?
मामला तब और गंभीर हो जाता है जब झा बताते हैं कि बाद में अध्यक्ष द्वारा कैशबुक पेश करने के निर्देश दिए गए।
नगर पालिका निधि और अनुदान दोनों की कैशबुक प्रस्तुत की गईं, लेकिन आरोप है कि उनका अवलोकन करने के बाद अध्यक्ष और उनके पति संजय शर्मा ने उन्हें वाहन चालक के माध्यम से अपने पास रखवा लिया।
सरकारी वित्तीय दस्तावेजों का इस तरह कार्यालय से बाहर जाना कई सवाल खड़े करता है—क्या यह नियमों के अनुरूप है?
“कोई भुगतान मत करना” — मौखिक आदेश का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार का भुगतान न करने के मौखिक निर्देश दिए गए।
अगर यह सच है, तो इसका सीधा असर विकास कार्यों और ठेकेदारों के भुगतान पर पड़ सकता है।
धमकी, दबाव और मानसिक तनाव
रविकांत झा ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि जब-जब वे फाइलें लेकर अध्यक्ष के निवास पर जाते हैं, उन्हें दुर्व्यवहार और नौकरी से निकालने की धमकी झेलनी पड़ती है।
उन्होंने खुद को “मानसिक रूप से परेशान और असुरक्षित” बताया है—जो किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए गंभीर स्थिति है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई आग
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक 3 मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में कथित रूप से नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा की आवाज सुनाई दे रही है, जिसमें वे कहती हैं—
“सीएमओ हमारी कृपा से यहां है, हम कभी भी उसका काला मुंह कर देंगे।”
यह बयान सामने आते ही शांत पड़ी अंदरूनी खींचतान फिर भड़क उठी है।
प्रशासनिक सिस्टम पर बड़े सवाल
यह पूरा मामला सिर्फ एक कर्मचारी और अध्यक्ष के बीच का विवाद नहीं है। यह नगर पालिका के कामकाज के तरीके पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है—
क्या वित्तीय दस्तावेजों का संचालन नियमों के अनुसार हो रहा है?
क्या प्रशासनिक फैसले निजी स्तर पर प्रभावित हो रहे हैं?
और सबसे अहम—क्या ऐसे माहौल में निष्पक्ष काम संभव है?
विकास पर असर की आशंका
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस तरह की अंदरूनी लड़ाई का असर शहर के विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि इससे बड़े स्तर पर योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
अब सबकी नजर प्रशासन पर
फिलहाल, यह मामला जांच और कार्रवाई की मांग कर रहा है।
यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
शिवपुरी नगर पालिका का यह विवाद अब महज अंदरूनी खींचतान नहीं रह गया है।
यह एक ऐसा मामला बन चुका है, जो तय करेगा कि स्थानीय शासन में पारदर्शिता और नियमों की कितनी अहमियत बची है।
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