शिवपुरी बना अबैध कॉलोनाइजरो का गढ़।
शिवपुरी में बिना अनुमति के अवैध कॉलोनियां का बिछा जाल

शिवपुरी में बिना अनुमति के अवैध कॉलोनियां का बिछा जाल, नियमों की उड़ाई
जा रही हैं धज्जियां
-राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा भूमाफिया तंत्र, प्रशासन बना मूकदर्शक
शिवपुरी ब्यूरो। प्रदेश सरकार द्वारा कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनी काटने वालों के विरुद्ध सख्त कानून बनाए गए हैं, लेकिन शिवपुरी जिले में ये नियम केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। शहर और उसके आसपास 10 किलोमीटर के दायरे में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां तान दी गई हैं और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
बताया गया है कि भूमि कारोबारी किसानों से उनकी कृषि योग्य भूमि को बीघा के हिसाब से औने-पौने दामों में खरीद रहे हैं और उसी भूमि को फुट के हिसाब से प्लॉट बनाकर आम नागरिकों को कई गुना कीमत पर बेचा जा रहा है। सुविधाओं के नाम पर सड़क, नाली, पानी, बिजली और पार्क के सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन प्लॉट बिकते ही कारोबारी पीछे मुड़कर नहीं देखते और नागरिक मूल भूत सुविधाओं के लिए परेशान होता हुआ नजर आता हैं।
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राजस्व की लूट, आमजन की मेहनत पर डाका
शहर में भूमि के अवैध करोबार से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। वहीं दूसरी ओर, जीवनभर की पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदने वाले लोग जब सुविधाओं के लिए भटकते हैं, तो आंदोलन करने को मजबूर हो जाते हैं। विडंबना यह है कि नागरिकों का आंदोलन का रुख कॉलोनी काटने वालों की बजाय प्रशासन और नगर पालिका की ओर होता है।
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छोटों पर कार्रवाई, बड़ों को संरक्षण
समय-समय पर शासन के दवाब में आकर प्रशासन द्वारा चलाए जाने वाले अभियानों में केवल उन्हीं लोगों को नोटिस दिए जाते हैं, जो अपनी पैतृक जमीन पर कुछ हिस्सा प्लॉट के रूप में काट विक्रय करते हैं, ताकि उनकी आर्थिर्क स्थिति मजबूत हो सके। जबकि शहर के चारों ओर सैकड़ों बीघा भूमि पर कॉलोनियां बसाने वाले बड़े- बड़े भूमि कारोबारी आज भी कार्रवाई से बाहर हैं। शहर में लगभग दो दर्जन से अधिक भूमि कारोबारी सक्रिय हैं। लेकिन उनके खिलाफ आज तक प्रशासन जानते हुए भी कार्यवाही करने से कतराता हैं। इस कारोबार में वो भी हिस्सेदार हैं या कमीशन के रूप में मोठी रकम प्राप्त करता है। सवाल यह है कि क्या नियम केवल कमजोरों के लिए हैं?
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राजनीति की छाया में पनपता अवैध साम्राज्य
शहर से लेकर तहसील स्तर तक अवैध कॉलोनी काटने वाले कई कारोबारियों पर नजर डालते हैं तो पता चलता है कि ये लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता और विपक्ष से जुड़े दायित्ववान नेता हैं। शहर में अवैध रूप से भूमि का कारोबार करने वाले आज के माफियाओं के इतिहास को खंगालने पर पता चलता है कि उनका जीवन 10 वर्ष पहले मध्यम वर्गीय था, वे आज अवैध कॉलोनियों के दम पर करोड़पति या उनसे ऊपर के धन्नासेठ बन चुके हैं। अवैध रूप से कमाई करने वाले ये भूममाफिया न शासन को टेक्स दे रहे हैं और न ही वैधानिक रूप से स्टांप शुल्क को भी चपत लगा रहे हैं। राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक मिलीभगत ने इस अवैध तंत्र को मजबूत बना दिया है।
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शहर के चारों ओर फैला अवैध जाल
शिवपुरी शहर के चारों ओर बेशुमार अवैध कॉलोनियां तान दी गई है। गुना-ग्वालियर वायपास रोड, ग्वालियर-झांसी वायपास रोड़, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, माधव नगर, मेडीकल कॉलेज के आस पास, नोहरी, ठकुरपुरा, मंशापूर्ण, दर्पण कॉलोनी, मनियर कॉलोनी, फतेहपुर रोड़, शिवपुरी पब्लिक स्कूल के चारों ओर, बड़ौदी, दर्रोनी रोड, पिपरसमा रोड, सिंहनिवास रोड़, सेंटचार्ज स्कूल के आगे पीछे, टीवी टावर रोड और नक्षत्र गार्डन के चारों तरफ, सोनचिरैया होटल के सर्कयूलर रोड़, झींगुरा बस्ती सहित 15 कि.मी. के ऐरिया सैकड़ों बीघा जमीन पर 300 से अधिक अवैध कॉलोनियां अस्तित्व में आ चुकी हैं। भूमि का कारोबार शासन के सख्त निर्देश और स्थानीय सांसद केन्द्रीय मंत्री के कड़े निर्देशों के बाद भी धड़ल्ले से कॉलोनियां बनाई जा रही हैं।
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अवैध कॉलोनियों में नपा करा रहा है विकास कार्य
शासकीय नियमों के अनुसार अवैध कॉलोनियों में नगर पालिका या कोई भी विभाग द्वारा न तो निर्माण की अनुमति दी जा सकती है और न ही सड़क, नाली, पानी, बिजली, सीवेज जैसी कोई सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके बावजूद नगर पालिका हर वर्ष करोड़ों रुपये इन कॉलोनियों में विकास कार्य करा रही है, जिससे भूमाफियाओं को खुला संरक्षण और आर्थिक लाभ की मदद हो रही हैं।
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सहर को बचाना है तो माफियाओं पर करनी होगी कार्यवाही
शिवपुरी में अवैध कॉलोनियों का यह खेल केवल जमीन का नहीं, बल्कि कानून, शासन और आम नागरिकों के विश्वास का खुला उल्लंघन है। यदि समय रहते बड़े भूमाफियाओं पर निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में शहर का नियोजित विकास केवल एक सपना बनकर रह जाएगा।
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क्या कहता हैं शासन का निमय:-
* बिना अनुमति कॉलोनी काटना दंडनीय अपराध है
* कॉलोनी काटने वाले पर भारी जुर्माना और भूमि सील की कार्रवाई
* प्लॉट की रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक
* निर्माण करने पर तोड़फोड़ (डिमोलिशन) की कार्रवाई
* गंभीर मामलों में एफआईआर और गिरफ्तारी का प्रावधान
* अवैध कॉलोनी में कोई भी सरकारी सुविधा देना गैरकानूनी
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